‘समझौता करो या तबाही झेलो’, ट्रंप की ईरान को खुली धमकी से बढ़ा वैश्विक तनाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि या तो बेहतर समझौता होगा या फिर ईरान को पूरी तरह तबाह कर दिया जाएगा। ट्रंप के इस बयान के बाद वैश्विक राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
दि राइजिंग न्यूज |अमेरिका | 24 मई 2026
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब वैश्विक राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए साफ संकेत दिए हैं कि अब अमेरिका किसी भी हाल में पीछे हटने वाला नहीं है। ट्रंप ने अपने हालिया बयान में कहा कि ईरान के सामने अब केवल दो रास्ते बचे हैं — पहला, अमेरिका के साथ एक बड़ा और सख्त समझौता करना, और दूसरा विनाशकारी परिणामों का सामना करना। ट्रंप के इस बयान के बाद पूरी दुनिया में हलचल तेज हो गई है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, व्हाइट हाउस में लगातार उच्च स्तरीय बैठकों का दौर चल रहा है। ट्रंप प्रशासन ईरान की तरफ से दिए गए नए प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है। माना जा रहा है कि अमेरिका अगले कुछ घंटों या दिनों में बड़ा फैसला ले सकता है। इस फैसले में या तो परमाणु समझौते को लेकर नई वार्ता शुरू होगी या फिर अमेरिका सैन्य कार्रवाई जैसे कठोर कदम उठा सकता है।
सीबीएस को दिए एक साक्षात्कार
सीबीएस को दिए एक साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा कि हालात इस समय “पचास-पचास” की स्थिति में हैं। उन्होंने दावा किया कि दोनों देशों के बीच बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, लेकिन अगर ईरान पीछे हटता है तो अमेरिका कड़ा जवाब देने से नहीं हिचकेगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा।, प्रस्तावित समझौते में ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार पर कड़ी निगरानी, परमाणु कार्यक्रम की सीमाएं और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की निगरानी जैसे कई बड़े बिंदु शामिल हैं। हालांकि ईरान अब भी कुछ शर्तों को लेकर सहमत नहीं हुआ है, जिसके चलते बातचीत पूरी तरह सफल नहीं हो पाई है।
मध्य पूर्व में बढ़ी सैन्य गतिविधियां
ट्रंप के बयान के बाद मध्य पूर्व में सैन्य हलचल भी तेज हो गई है। अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। कई युद्धपोत और लड़ाकू विमान रणनीतिक क्षेत्रों में तैनात किए गए हैं। वहीं ईरान ने भी अपनी सेना को हाई अलर्ट पर रखा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बातचीत विफल होती है तो क्षेत्र में बड़ा सैन्य संघर्ष शुरू हो सकता है।
कूटनीतिक स्तर पर भी तेज हुई गतिविधियां
तनाव के बीच अमेरिका ने अपने सहयोगी देशों के साथ बातचीत तेज कर दी है। जानकारी के मुताबिक, ट्रंप सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, मिस्र, तुर्की और पाकिस्तान के नेताओं से संपर्क में हैं। अमेरिका चाहता है कि अगर हालात बिगड़ते हैं तो उसे अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिल सके। वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी संकेत दिए हैं कि ईरान वार्ता को लेकर जल्द कोई बड़ा ऐलान हो सकता है। दूसरी ओर, ईरान ने दावा किया है कि उसने 14 सूत्रीय समझौते के मसौदे को लगभग अंतिम रूप दे दिया है और वह बातचीत जारी रखने के पक्ष में है।
भारत समेत पूरी दुनिया पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध जैसी स्थिति बनती है तो इसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। सबसे बड़ा प्रभाव कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिल सकता है, क्योंकि मध्य पूर्व दुनिया में तेल आपूर्ति का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली हो सकती है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा तेल आयात करता है। अगर तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते हैं और महंगाई में भी तेजी आ सकती है। इसी बीच अमेरिका भारत में निवेश बढ़ाने की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के मामले में दूसरा सबसे बड़ा निवेशक बन चुका है। विशेष रूप से प्रौद्योगिकी, डाटा सेंटर और डिजिटल सेवाओं में अमेरिकी कंपनियां बड़े स्तर पर निवेश कर रही हैं। ऐसे में अमेरिका और मध्य पूर्व के तनाव का असर भारतीय बाजार और निवेश माहौल पर भी पड़ सकता है।