उन्नाव में जर्जर मकान मालिकों को 15 दिन का अल्टीमेटम:खुद गिराने होंगे मकान, नहीं तो होगी कानूनी कार्रवाई; जलभराव वाले इलाकों का भी हुआ निरीक्षण
उन्नाव में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ने बावजूद बारिश के कारण शहर के निचले इलाकों में जलभराव की समस्या बनी हुई है। रविवार शाम करीब 4 बजे एसडीएम सदर राजेश विश्वकर्मा ने मिश्रा कॉलोनी स्थित बाढ़ चौकी, गोताखोर मोहल्ला और नमामि गंगे घाट का निरीक्षण कर जमीनी स्थिति देखी। उन्होंने जलभराव वाले स्थानों पर लोगों की परेशानी कम करने के लिए स्थानीय लेखपाल को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। साथ ही जरूरत वाले स्थानों पर नाव उपलब्ध कराने को कहा, ताकि बारिश या बाढ़ के पानी के बीच लोगों के आवागमन में परेशानी न हो। एसडीएम ने निरीक्षण के दौरान जलभराव वाले क्षेत्रों की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने कर्मचारियों से कहा कि जहां पानी अधिक होने के कारण लोगों को आने-जाने में दिक्कत हो रही है, वहां तत्काल आवश्यक व्यवस्था की जाए। प्रशासन की ओर से ऐसे स्थानों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। गंगा का पानी घटने के बाद भी लगातार बारिश से निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति को देखते हुए प्रशासन एहतियात बरत रहा है। जर्जर मकानों पर अब सख्ती निरीक्षण का दूसरा अहम पहलू शहर के अति जर्जर मकान रहे। एसडीएम राजेश विश्वकर्मा खुद बालाजी वाली गली समेत उन स्थानों पर पहुंचे, जहां पुराने और जर्जर भवन लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं। उन्होंने बताया कि नगर पालिका की ओर से संबंधित मकान मालिकों को पहले ही नोटिस दिया जा चुका है। इसके बावजूद कई लोग न तो जर्जर मकान खाली कर रहे हैं और न ही उन्हें गिराने की कार्रवाई कर रहे हैं। एसडीएम ने ऐसे भवन स्वामियों को स्पष्ट हिदायत दी कि वे 15 दिन के भीतर जर्जर मकान को स्वयं गिरवा लें। निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं करने पर विधिक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि जर्जर भवन के कारण किसी प्रकार की जनहानि होने पर संबंधित मकान मालिक स्वयं जिम्मेदार होंगे। बारिश के मौसम में पुराने और कमजोर मकानों पर खतरा और बढ़ जाता है। ऐसे में प्रशासन की ओर से जर्जर भवनों को लेकर सख्ती शुरू की गई है। एसडीएम ने संबंधित अधिकारियों को भी ऐसे मकानों की निगरानी रखने और लोगों को खतरे के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए हैं। वहीं जलभराव वाले इलाकों में जरूरत के अनुसार नाव की व्यवस्था करने को कहा गया है, ताकि किसी आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
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