उन्नाव में पितृपक्ष के पांचवें दिन श्रद्धालुओं ने किया तर्पण:गंगा तट पर उमड़ी भीड़, घरों में भी हुए श्राद्ध कर्म और दान
उन्नाव में पितृपक्ष के पांचवें दिन गुरुवार को जिले में श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद किया। सुबह से ही गंगा के विभिन्न घाटों पर लोगों ने स्नान कर पितरों का तर्पण और श्राद्ध कर्म किया। घरों में भी विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर दिवंगत परिजनों के निमित्त भोजन, दान और अन्य धार्मिक अनुष्ठान किए गए। पितृपक्ष के दौरान पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने की परंपरा के तहत लोगों ने परिवार की मान्यताओं के अनुसार कर्मकांड संपन्न कराया। गंगाघाट, शुक्लागंज सहित गंगा किनारे के अन्य क्षेत्रों में सुबह श्रद्धालुओं की आवाजाही रही। लोगों ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाने के बाद पंडितों के मार्गदर्शन में तिल, कुश और जल से पितरों का तर्पण किया। कई लोगों ने अपने पूर्वजों के नाम से पिंडदान भी किया। इसके बाद ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को भोजन कराने तथा दान देने की परंपरा निभाई गई। भोजन तैयार कर श्रद्धापूर्वक अर्पित किया पितृपक्ष के पांचवें दिन शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में कई परिवारों ने घर पर ही श्राद्ध कर्म किया। परिवार के सदस्यों ने दिवंगत परिजनों को याद कर उनके चित्र के सामने दीप जलाया। पितरों के निमित्त सात्विक भोजन तैयार कर श्रद्धापूर्वक अर्पित किया गया। इसके बाद ब्राह्मण भोजन और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र व अन्य सामग्री का दान किया गया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृपक्ष में किए जाने वाले तर्पण और श्राद्ध का उद्देश्य पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना है। यही वजह है कि इन दिनों परिवार की नई पीढ़ी को भी पूर्वजों और उनसे जुड़ी परंपराओं के बारे में बताया जाता है। कई परिवारों में कौआ, गाय और अन्य जीवों को भोजन कराने की परंपरा भी निभाई गई। स्मृतियों को याद करने का अवसर पितृपक्ष केवल धार्मिक अनुष्ठान का समय ही नहीं, बल्कि पूर्वजों के योगदान और उनकी स्मृतियों को याद करने का अवसर भी माना जाता है। लोगों ने अपने पितरों की स्मृति में जरूरतमंदों की मदद की और भोजन कराया। गंगा तटों पर तर्पण के दौरान लोगों ने परिवार की सुख-शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना की।
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