विंध्य एक्सप्रेस-वे मुआवजे को लेकर किसानों ने किया प्रदर्शन:नामांतरण न होने से विक्रेताओं के नाम बन रहा मुआवजा, न्याय की मांग
मिर्जापुर में विंध्य एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए मौजा देवरी, आमघाट में अधिग्रहित की जा रही भूमि के मुआवजे को लेकर काश्तकारों ने जिलाधिकारी को पत्रक सौंपकर न्याय की मांग की है। सोमवार को जिला मुख्यालय पहुंचे किसानों ने प्रदर्शन कर अपनी मांग रखी। कहा कि जो जमीन बेंच चुके हैं उनके नाम मुआवजा भुगतान करने के लिए तैयारी की जा रही है। किसानों का आरोप है कि भूमि का बैनामा होने और आकार पत्र-23 में दाखिल-खारिज की कार्रवाई पूरी होने के बावजूद तहसील की खतौनी में बैनामेदारों का नाम दर्ज नहीं किया गया है। इसके बावजूद अधिग्रहित भूमि का मुआवजा विक्रेताओं के नाम से तैयार किया जा रहा है।
काश्तकारों ने बताया कि मौजा देवरी, तप्पा-84, परगना कंतित, तहसील सदर में वर्ष 1972-73 से चकबंदी प्रक्रिया चल रही थी। प्रक्रिया के दौरान आकार पत्र-23 (भाग-1) तैयार किया गया। वर्ष 2019 में चकबंदी की प्रक्रिया रोक दी गई और गांव को धारा-6 के तहत तहसील सदर की उद्धरण खतौनी में दर्ज किया गया। किसानों के अनुसार चक संख्या के प्रस्तावित गाटों से बैनामा किए गए हैं। आकार पत्र-23 (भाग-1) में दाखिल-खारिज की कार्रवाई भी पूरी हो चुकी है। इसके बावजूद तहसील की खतौनी में मूल गाटा ही दर्ज है और बैनामेदारों के नाम दर्ज करने का कोई आदेश नहीं हुआ है। काश्तकारों ने कहा कि गांव में ऐसे सैकड़ों किसान हैं, जिनकी जमीन विंध्य एक्सप्रेस-वे के लिए अधिग्रहित की जा रही है। उनका कहना है कि वे अपने मूल बैनामा दस्तावेज लेकर अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक नामांतरण और उनके पक्ष में मुआवजा भुगतान को लेकर कार्रवाई नहीं हुई है। किसानों ने जिलाधिकारी से मांग की कि मूल बैनामा दस्तावेजों के आधार पर नामांतरण की कार्रवाई कराई जाए और अधिग्रहित भूमि का मुआवजा वास्तविक काश्तकारों को दिलाने के लिए विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी को निर्देशित किया जाए। ज्ञापन देने वालों में अर्जुन यादव, बाबी देवी एवं पियारी देवी आदि काश्तकार शामिल रहे।
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