ये स्पेलिंग मिस्टेक नहीं…लोकतंत्र के खिलाफ साजिश:सहारनपुर में इमरान मसूद बोले- EPIC नंबर डालकर अपना नाम जांचें, पूर्व विधायक की पत्नी का भी नाम बदला
सहारनपुर में मतदाता सूची में नाम बदलने और अन्य गड़बड़ियों के आरोपों को लेकर कांग्रेस ने चुनाव आयोग और निर्वाचन व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। सहारनपुर में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि मतदाता सूची में हो रहे बदलावों की पार्टी बारीकी से जांच कर रही है। यह मामला केवल हिंदी और अंग्रेजी की वर्तनी की गलती का नहीं है, बल्कि मतदाताओं की पहचान से जुड़ा गंभीर सवाल है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक ही मतदाता पहचान पत्र (EPIC) नंबर पर नाम बदलने जैसी गड़बड़ियों को सामान्य टाइपिंग की गलती कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मसूद ने कहा कि जांच में समय लगेगा, क्योंकि एक-एक रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को आगाह करते हुए कहा कि वे अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ निभाएं। किसी नेता के दबाव में आकर अपनी नौकरी दांव पर न लगाएं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मामले में कानूनी लड़ाई लड़ेगी और हर तथ्य को अदालत के सामने रखेगी। सांसद ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में बदलावों के पीछे केवल स्थानीय स्तर के कर्मचारी जिम्मेदार नहीं हो सकते। उनके मुताबिक, जब नाम और दूसरी जानकारियां बदलने का काम सॉफ्टवेयर के जरिए हो रहा है, तो इसकी तकनीकी व्यवस्था की भी जांच होनी चाहिए। केवल अधिकारियों को निलंबित करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। पूरे मामले की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। ‘इमरान की जगह फुरकान लिखना स्पेलिंग मिस्टेक नहीं’ इमरान मसूद ने नामों में बदलाव को लेकर कहा कि यदि किसी मतदाता का नाम इमरान है और रिकॉर्ड में उसे फुरकान लिख दिया जाता है, तो इसे केवल वर्तनी की गलती मानकर नहीं छोड़ा जा सकता। उन्होंने इसे गंभीर मामला बताते हुए सवाल उठाया कि जब मतदाता का पहचान पत्र नंबर वही रहता है, लेकिन नाम बदल जाता है, तो इसकी वजह क्या है? उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस तरह के मामलों की एक-एक करके जांच कर रही है। उनके अनुसार, नामों में बदलाव, रिकॉर्ड में गड़बड़ी और निर्धारित समय के भीतर बड़ी संख्या में बदलाव होने जैसे पहलुओं को ध्यान में रखकर जानकारी जुटाई जा रही है। उन्होंने दावा किया कि कुछ बदलाव ऐसे समय पर दिखाई दिए, जिनकी जांच जरूरी है। हालांकि, इन बदलावों के पीछे किसी साजिश की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है। सांसद ने कहा कि यह केवल किसी एक व्यक्ति या परिवार का मामला नहीं है। मतदाता सूची में दर्ज नाम, पहचान संख्या और अन्य जानकारियां सही होना जरूरी है, क्योंकि इन्हीं के आधार पर मतदाता की पहचान होती है। ऐसे में किसी भी तरह की गड़बड़ी को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। पूर्व विधायक की पत्नी का नाम भी बदला इमरान मसूद ने दावा किया कि पूर्व विधायक मसूद अख्तर की पत्नी एवं पूर्व जिला पंचायत सदस्य शमा का भी नाम बदला है। उन्होंने बताया कि शमा के मतदाता पहचान पत्र (EPIC) नंबर की जांच करने पर नाम में बदलाव दिखाई दिया। सांसद ने कहा कि जब जनप्रतिनिधियों और उनके परिवारों से जुड़े रिकॉर्ड में इस तरह के बदलाव दिखाई दे रहे हैं, तो आम मतदाताओं को भी अपने रिकॉर्ड की जांच करनी चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपना EPIC नंबर डालकर मतदाता सूची में दर्ज नाम और दूसरी जानकारियों का मिलान करें। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को यह देखना चाहिए कि मतदाता पहचान पत्र पर दर्ज नाम और निर्वाचन सूची में मौजूद विवरण एक-दूसरे से मेल खाते हैं या नहीं। यदि कोई अंतर दिखाई देता है, तो संबंधित निर्वाचन अधिकारी के सामने शिकायत दर्ज करानी चाहिए, ताकि समय रहते सुधार कराया जा सके। ‘केवल अधिकारी निलंबित करने से काम नहीं चलेगा’ मतदाता सूची में गड़बड़ियों के मामले में अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इमरान मसूद ने कहा कि केवल जिला स्तर पर कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित कर देने से पूरी जिम्मेदारी तय नहीं हो जाती। उन्होंने कहा कि यह पता लगाना जरूरी है कि रिकॉर्ड में बदलाव कैसे हुए, किस स्तर पर हुए और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। उन्होंने सॉफ्टवेयर की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि बदलाव तकनीकी प्रणाली के माध्यम से हुए हैं, तो उस प्रणाली की भी जांच होनी चाहिए। केवल निचले स्तर के कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने से उन कारणों का पता नहीं चलेगा, जिनकी वजह से गड़बड़ी हुई। सांसद ने अधिकारियों और बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) से अपील की कि वे किसी के दबाव में आकर गलत काम न करें। उन्होंने कहा कि कानून के अनुसार और पारदर्शिता के साथ काम करना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। यदि रिकॉर्ड में कोई गड़बड़ी है, तो उसे छिपाने के बजाय सही किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट तक ले जाएंगे मामला इमरान मसूद ने कहा कि कांग्रेस इस मामले में कानूनी रास्ता अपनाएगी और मतदाता सूची से जुड़े तथ्यों को अदालत के सामने रखेगी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी का उल्लेख करते हुए कहा कि इस मामले में हर पहलू की जांच जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि इस मुद्दे पर उनकी ओर से भी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मतदाता का अधिकार सबसे महत्वपूर्ण है। मतदाता सूची में किसी भी तरह की गड़बड़ी से लोगों के मतदान अधिकार पर असर पड़ने की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसलिए जिम्मेदार अधिकारियों को निष्पक्षता के साथ काम करना चाहिए और रिकॉर्ड में सामने आने वाली विसंगतियों को दूर करना चाहिए। सांसद ने कहा कि कांग्रेस इस मामले में पीछे हटने वाली नहीं है। पार्टी रिकॉर्ड की जांच कर रही है और जो तथ्य सामने आएंगे, उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत उठाया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि इस मामले में केवल निलंबन नहीं, बल्कि गड़बड़ी के कारणों और जिम्मेदार लोगों की पहचान करना जरूरी है। लोकतंत्र बचाने की लड़ाई में मीडिया भी साथ दे इमरान मसूद ने प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता किसी एक राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ा विषय है। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि वे अपने मतदाता रिकॉर्ड की जांच करें और किसी तरह की गड़बड़ी मिलने पर शिकायत दर्ज कराएं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक-एक रिकॉर्ड की जांच कर रही है और मामले को आगे तक ले जाएगी। उनके मुताबिक, अधिकारियों को पारदर्शिता और ईमानदारी से काम करना चाहिए, ताकि किसी भी मतदाता के अधिकार पर असर न पड़े। सांसद ने आरोप लगाया कि देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश हो रही है।
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