ज्ञानेश कुमार पर अभिजीत दीपके का बड़ा आरोप, सरकार से पूछे सवाल

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने जंतर-मंतर प्रदर्शन, छात्रों की भूमिका और अपनी गिरफ्तारी को लेकर बयान दिया। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सरकार पर आरोप लगाए।

Oct 23, 2026 - 15:52
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ज्ञानेश कुमार पर अभिजीत दीपके का बड़ा आरोप, सरकार से पूछे सवाल

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 23 अक्टूबर 2026

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आंदोलन और सत्ता परिवर्तन की आशंकाओं को लेकर बड़ा बयान दिया है। एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर छात्रों ने बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया, लेकिन उनके अनुसार प्रदर्शनकारियों की ओर से हिंसा नहीं की गई। दीपके ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कठोर रवैया अपनाया। उन्होंने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन, महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए शांतिपूर्ण विरोध को देश की परंपरा बताया।

 सत्ता परिवर्तन और हिंसा की आशंकाओं पर क्या बोले अभिजीत दीपके

अभिजीत दीपके से दिल्ली में नेपाल, बांग्लादेश और फ्रांस जैसी परिस्थितियां पैदा होने तथा हिंसा के माध्यम से सत्ता परिवर्तन किए जाने की आशंकाओं को लेकर सवाल पूछा गया था। इस पर उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर बड़े स्तर पर प्रदर्शन होने के बावजूद छात्रों की ओर से हिंसा नहीं की गई। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के साथ कठोर व्यवहार किया।दीपके ने यह बातें रेड माइक नामक यूट्यूब चैनल को दिए गए साक्षात्कार में कहीं। उनके मुताबिक, छात्र अपनी मांगों को सामने रखने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार के खिलाफ मीम बना रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत की परिस्थितियां दूसरे देशों से अलग हैं और यहां के सामाजिक तथा ऐतिहासिक अनुभवों को ध्यान में रखकर ही आंदोलनों को समझा जाना चाहिए।

 महात्मा गांधी और डॉ. आंबेडकर के विचारों का किया उल्लेख

अभिजीत दीपके ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की विरासत शांतिपूर्ण संघर्ष से जुड़ी रही है। उन्होंने कहा कि भारतीयों ने महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों को पढ़ते हुए लोकतंत्र, अधिकारों और सामाजिक बदलाव के महत्व को समझा है। उनके अनुसार, देश में शांतिपूर्ण विरोध और अपनी मांगों को सामने रखने की परंपरा रही है।दीपके ने अपने बयान में इस बात पर जोर दिया कि भारत की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि दूसरे देशों से अलग है। उन्होंने कहा कि देश की स्वतंत्रता का आंदोलन मुख्य रूप से अहिंसक संघर्ष के लिए जाना जाता है। उनके बयान का मुख्य संदेश यह था कि छात्रों के आंदोलनों और राजनीतिक असहमति को हिंसा से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी का उठाया मुद्दा

अभिजीत दीपके ने सौरव दास और आशुतोष रांका से जुड़े मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब दोनों जेल में थे, तब वह सोचते थे कि उन्हें भी जेल में बंद कर दिया जाए। दीपके ने सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि तिरंगा फहराने के मामले में उन्हें सात दिनों तक जेल में रखा गया था।दीपके ने सवाल किया कि तिरंगा फहराने के अलावा उन लोगों की ऐसी क्या गलती थी, जिसके कारण उन्हें जेल में रहना पड़ा। यह बयान उन्होंने अपने साथियों के खिलाफ हुई कार्रवाई के संदर्भ में दिया। हालांकि, इन मामलों में गिरफ्तारी के आधिकारिक आधार और संबंधित पक्षों के विस्तृत पक्ष को स्वतंत्र रूप से सत्यापित किए बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

अपनी गिरफ्तारी को लेकर अभिजीत दीपके ने क्या आरोप लगाए

अपनी गिरफ्तारी का जिक्र करते हुए अभिजीत दीपके ने दावा किया कि उन्हें विमान के भीतर से हिरासत में लिया गया था। उन्होंने कहा कि इससे पहले उन्होंने किसी व्यक्ति को इस तरह विमान से गिरफ्तार किए जाने का उदाहरण नहीं देखा था। दीपके ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें रास्ते के बीच से हिरासत में लिया गया था।उन्होंने अपनी गिरफ्तारी की परिस्थितियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस पूरी कार्रवाई के पीछे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बचाने की मंशा थी। यह दीपके का आरोप है। उपलब्ध समाचार सामग्री में इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि या सरकार की ओर से इसका विस्तृत जवाब शामिल नहीं है, इसलिए इसे उनके दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

ज्ञानेश कुमार को लेकर सरकार से पूछे सवाल

अभिजीत दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका और सरकार के लिए उनके महत्व को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए सरकार ने उनके खिलाफ कार्रवाई की। दीपके ने सवाल किया कि ज्ञानेश कुमार सरकार के लिए इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं और उनके मामले में इस तरह की कार्रवाई करने की आवश्यकता क्यों पड़ी।उनके बयान में यह आरोप भी शामिल था कि आंदोलन से जुड़े लोगों के खिलाफ हुई कार्रवाई का संबंध ज्ञानेश कुमार को लेकर उठाए जा रहे सवालों से था। हालांकि, सरकार की मंशा और कार्रवाई के पीछे के कारणों के संबंध में दीपके के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध सामग्री से नहीं होती है। इस मामले में सरकार और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने पर पूरे घटनाक्रम की अधिक स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकती है।

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