काशी में 400 ग्राम चांदी से बना राफेल:एयर शो से प्रेरित होकर गुलाबी मीनाकारी से किया तैयार, कीमत एक लाख

Oct 24, 2026 - 07:29
0
काशी में 400 ग्राम चांदी से बना राफेल:एयर शो से प्रेरित होकर गुलाबी मीनाकारी से किया तैयार, कीमत एक लाख
वाराणसी में चल रहे भव्य एयर शो से प्रभावित और प्रेरित होकर काशी में 400 ग्राम चांदी का इस्तेमाल कर राफेल का मॉडल तैयार किया गया है। यह मॉडल गुलाबी मीनाकारी के नेशनल अवार्डी कुंज बिहार सिंह ने तैयार किया है। उम्मीद है कि इस भव्य एयर शो के समापन समारोह पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री को इस लड़ाकू विमान का मॉडल भेंट कर उनका स्वागत काशी में करेंगे। इसकी कीमत एक लाख रुपए के करीब बताई जा रही है। कुंज बिहारी के अनुसार इस राफेल को बनाने में एक महीना का समय लगा है और अब तक इसके बनने के बाद इसके 100 ऑर्डर भी मिल चुके हैं। एयर शो के शौर्य की झलक कुंज बिहारी ने बताया - काशी में एयर शो के आयोजन की तैयारी शुरू हुई तो कुछ खास बनाने की सोचा गया। इसके बाद राफेल लड़ाकू विमान जैसी कुछ चीज बनाने की कवायद शुरू हुई। इसके बाद राफेल लड़ाकू विमान की प्रतिकृति को गुलाबी मीनाकारी से तैयार किया गया। इसमें करीब एक महीने के समय लगा। 600 ग्राम के इस विमान को सजाने और बनाने में काफी मेहनत की गयी है और यह सरकार की ODOP योजना की खूबूसरती को दर्शाता है। 400 ग्राम चांदी से किया तैयार, ऑस्ट्रेलिया से आयी डिमांड कुंज बिहार ने बताया - मुगलों द्वारा काशी में लायी गयी इस कला में चांदी का इस्तेमाल होता है। इस राफेल लड़ाकू विमान में 400 ग्राम चांदी का इस्तेमाल किया गया है। साथ ही गुलाबी मीनाकारी का काम है। शिल्पकार कुंज बिहारी सिंह के मुताबिक, फाइटर प्लेन की तस्वीर कुछ ग्राहकों को भेजने के बाद उन्हें करीब 100 पीस के ऑर्डर मिले हैं। इनमें कैलिफोर्निया और ऑस्ट्रेलिया से मिली मांग भी शामिल है। इससे यह कारोबार और बढ़ने का अनुमान है। ब्रह्मोस के मॉडल की रही चर्चा कुंज बिहारी ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ब्रह्मोस मिसाइल का मॉडल तैयार किया था। गुलाबी मीनाकारी की इस इस कलाकृति को भी देश-विदेश में पसंद किया गया था। अब लड़ाकू विमान की नई कलाकृति के जरिए वह काशी की पारंपरिक कला को समकालीन विषयों से जोड़ रहे हैं। उनका प्रयास है कि गुलाबी मीनाकारी केवल सजावटी उत्पादों तक सीमित न रहे, बल्कि देश की उपलब्धियों, सैन्य पराक्रम और राष्ट्रीय गौरव को भी अपने भीतर समेटे। जानिए क्या है गुलाबी मीनाकारी 17 वीं शताब्दी में मुगलों ने शुरू की थी मीनाकारी मीनाकारी यानी इनेमलिंग की शुरुआत मुगलों ने 17वीं शताब्दी में की थी। कुंज बिहारी ने बताया कि इसमें सेफ इनेमल पर गुलाबी कलर के स्ट्रोक होते हैं। इसे करने वाले ही मीनाकार कहलाते हैं। कुंज ने बताया कि इसमें देवी-देवताओं की धार्मिक मूर्तियां, पारंपरिक आभूषण, सजावटी सामान और फूल, पक्षी और जानवर आदि बनाए जाते हैं। तीन प्रकार की मीनाकारी में प्रसिद्ध है बनारसी मीनाकारी कुंज बिहारी ने बताया कि मीनाकारी तीन प्रकार की होती आई है। इसमें एक रंग खुला मीना, पंच रंगी मीना और गुलाबी मीनाकारी। एक रंग खुला मीना में केवल सोने की रेखा उजागर की जाती है। वहीं पंच रंग में हरा, हल्का नीला, सफेद, गहरा नीला और लाल कलर का प्रयोग किया जाता है। वहीं बनारस की प्रसिद्ध गुलाबी मीनाकारी में चांदी पर गुलाबी रंग से मीनाकारी की जाती है। बाजार ने तोड़ दी थी उद्योग की कमर गुलाबी मीनाकारी को संजो के रखे हुए गुलाबी मीनाकारी के आर्टिजन कुंज बिहारी ने बताया कि गुलाबी मीनाकारी बनारस से खत्म होने की कगार पर थी। बाजार में सही मूल्य न मिलने और खरीद न होने की वजह से इसके पारंपरिक आर्टिजन इससे किनारा कर रहे थे। नई पीढ़ी इस तरफ नहीं देख रही थी क्योंकि यह बहुत ही बारीक काम है। ऐसे में यह उद्योग और कला धीरे-धीरे बंद हो चुकी थी। हमें किसी भी प्रकार का ऑर्डर नहीं मिल रहा था।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User