यमुना पर पक्का पुल नहीं, हजारों लोग हो रहे परेशान:बांदा में समिति ने की मांग, हर साल 6-7 महीने बंद रहता है पीपे का पुल
बांदा के जसपुरा ब्लॉक में मड़ौली कला-अढ़ावल के बीच यमुना नदी पर पक्के पुल के निर्माण की मांग फिर से उठने लगी है। मड़ौली कला-अढ़ावल पुल निर्माण संघर्ष समिति ने बुधवार को मुख्यमंत्री के नाम जिलाधिकारी को पत्र भेजा है। समिति का कहना है कि यहां हर साल करीब छह से सात महीने के लिए पीपे का अस्थायी पुल बनाया जाता है, लेकिन बाकी समय पुल नहीं होने से हजारों लोगों को लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। समिति के मुताबिक, पीपे के पुल से रोजाना करीब साढ़े चार हजार लोग बांदा, हमीरपुर, फतेहपुर, प्रयागराज और कानपुर आते-जाते हैं। अस्थायी पुल हटने के बाद लोगों को 40 से 50 किलोमीटर ज्यादा दूरी तय करनी पड़ती है। इससे करीब दो घंटे अतिरिक्त समय लगता है और ईंधन व सफर का खर्च भी बढ़ जाता है। आपातकालीन सेवाओं पर भी असर पड़ता है समिति ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में बताया है कि बरसात के दौरान समस्या और बढ़ जाती है। यमुना का पानी बढ़ने पर पीपे का पुल बंद हो जाता है, जिससे इलाके का संपर्क टूट जाता है। ऐसे में लोगों को जरूरी कामों के लिए भी लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली और आपातकालीन सेवाओं पर भी असर पड़ता है। समिति का दावा है कि पक्का पुल बनने से बांदा और हमीरपुर के करीब पांच से छह दर्जन गांवों को सीधा फायदा मिलेगा। इसके अलावा फतेहपुर जिले के भी इतने ही गांवों के लोगों को आने-जाने में आसानी होगी। संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री से जनहित को ध्यान में रखते हुए पुल बनाने को प्राथमिकता देने और कार्रवाई के निर्देश देने की मांग की है।
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