योगी सरकार की दिव्यांग पेंशन योजना बनी लाखों का सहारा
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चलाई जा रही दिव्यांग पेंशन योजना लाखों दिव्यांगजनों के लिए आर्थिक सहारा बन रही है। इस योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को हर महीने 1000 रुपये की सहायता सीधे बैंक खाते में मिल रही है, जिससे उनकी दवा, भोजन और दैनिक जरूरतें पूरी करने में मदद मिल रही है। वर्ष 2025-26 में 12 लाख से अधिक लोगों को इसका लाभ मिला है, जिससे राज्य में दिव्यांगजनों के जीवन स्तर में सुधार देखा जा रहा है।
दि राइजिंग न्यूज़ | उत्तर प्रदेश | 08 जून 2026
लाखों दिव्यांगजनों को मिल रही नियमित आर्थिक सहायता
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में संचालित दिव्यांग भरण-पोषण अनुदान/पेंशन योजना लाखों दिव्यांगजनों के जीवन में बड़ा बदलाव ला रही है। इस योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को हर महीने 1000 रुपये की पेंशन सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जा रही है, जिससे उन्हें आर्थिक सुरक्षा और जीवन यापन में मदद मिल रही है।
पेंशन से सुधर रही गरीब परिवारों की स्थिति
बाराबंकी के लाभार्थी आशा और उनके पति हरिलाल ने बताया कि इस पेंशन से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। दोनों ही गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं, ऐसे में यह सहायता उनके लिए जीवनरेखा साबित हो रही है। समय पर पेंशन मिलने से दवा, भोजन और बच्चों की जरूरतें पूरी करने में मदद मिल रही है।
इलाज और रोजमर्रा के खर्चों में मिल रही राहत
लाभार्थी हरिलाल ने बताया कि चार बेटियों के परिवार का भरण-पोषण सीमित आय में कठिन था, लेकिन सरकार की पेंशन योजना से अब उन्हें काफी राहत मिली है। उन्होंने कहा कि समय पर मिलने वाली राशि से उन्हें आर्थिक मदद के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ता।
लखनऊ और अन्य जिलों में भी मिल रहा लाभ
लखनऊ के गोसाईगंज निवासी कौशल, जो पिछले 5-6 वर्षों से इस योजना का लाभ ले रहे हैं, ने बताया कि हर तीन महीने में मिलने वाली 3000 रुपये की राशि उनके जीवन में काफी सहायक है। वहीं लखनऊ के ही रजनीश ने भी कहा कि खेती-किसानी के साथ यह पेंशन उनके परिवार के लिए बड़ी आर्थिक राहत बन चुकी है।
12 लाख से अधिक लाभार्थियों को मिल रहा लाभ
सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025-26 में प्रदेश के 12 लाख से अधिक पात्र दिव्यांगजनों को इस योजना का लाभ दिया गया है। सरकार की यह पहल उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रही है जिनके पास आय का कोई स्थायी साधन नहीं है और जो शारीरिक रूप से काम करने में असमर्थ हैं।