यूपी में हुक्का बार पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक:रेस्टोरेंट में हुक्का सेवा भी गैरकानूनी; जज बोले- पहली सिगरेट आदत बन जाती है
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश में हुक्का बार के संचालन पर फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ किया कि सार्वजनिक जगहों पर बने धूम्रपान क्षेत्र में भी रेस्टोरेंट या अन्य प्रतिष्ठानों द्वारा हुक्का देना गैरकानूनी है। न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अब्धेश कुमार चौधरी की पीठ ने हुक्का बार से जुड़ी सभी याचिकाएं खारिज कर दीं। कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर हुक्का सेवा देना 2017 के संशोधित धूम्रपान निषेध नियम, 2008 के नियम 4(3) का उल्लंघन है। इस दौरान जस्टिस शेखर बी. सराफ ने युवाओं को धूम्रपान से बचने की सलाह दी। उन्होंने अपने छात्र जीवन का अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे मजाक में शुरू हुई एक सिगरेट धीरे-धीरे आदत बन गई और इसे छोड़ना मुश्किल हो गया। जस्टिस सराफ ने कहा- "पहली सिगरेट को हल्के में न लें।" कोर्ट ने यह भी साफ किया कि हुक्का तैयार करना, सामग्री भरना और ग्राहक को देना 'सेवा' है। लेकिन, ऐसी सेवा गैरकानूनी है। पीठ ने यह दलील भी स्वीकार नहीं की कि ग्राहक को केवल हुक्का उपकरण किराये पर दिया जा सकता है और वह स्वयं उसका इस्तेमाल करेगा। न्यायालय ने कहा कि हुक्का चलाने की पूरी प्रक्रिया में सेवा का तत्व मौजूद रहता है। इसलिए इसे केवल उपकरण किराये पर देने की गतिविधि नहीं माना जा सकता। स्वच्छ हवा में सांस लेना भी मौलिक अधिकार फैसले में न्यायालय ने कहा कि व्यापार करने का मौलिक अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन सार्वजनिक स्थान पर तंबाकू के धुएं के अनैच्छिक संपर्क से बचना और स्वच्छ हवा में सांस लेना भी संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार है। न्यायालय ने कहा कि किसी प्रतिष्ठान के व्यावसायिक हित के कारण गैर-धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के इस अधिकार को कम नहीं किया जा सकता। पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 47 में सार्वजनिक स्वास्थ्य को लेकर राज्य के दायित्व का भी उल्लेख किया। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग तथा नगर निगम को हुक्का बार के नियमन के लिए लाइसेंस जारी करने का अधिकार नहीं है। पुलिस अधिकारियों के पास कार्रवाई का अधिकार सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम के तहत पुलिस अधिकारियों को कानून के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित कराने का अधिकार है। न्यायालय ने कहा कि इसके अंतर्गत नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ तलाशी, जब्ती और दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है। न्यायालय ने स्पष्ट निष्कर्ष दिया कि उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक स्थानों के निर्धारित धूम्रपान क्षेत्र में हुक्का बार संचालित करना और रेस्टोरेंट द्वारा हुक्का सेवा उपलब्ध कराना कानून के विपरीत है। इसके बाद पीठ ने सभी संबंधित रिट याचिकाएं खारिज कर दीं।
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