युवती को ब्लैकमेल करने के आरोपी की जमानत खारिज:अलीगढ़ में इंस्टाग्राम पर फर्जी पहचान, फर्जी आधार और धर्म परिवर्तन के दबाव का प्रकरण
इंस्टाग्राम पर फर्जी पहचान बनाकर युवती से दोस्ती, फोटो खींचकर ब्लैकमेल करने और धर्म परिवर्तन कर शादी का दबाव बनाने के आरोपी मौहम्मद राशिद हुसैन की जमानत कोर्ट ने खारिज कर दी। अपर सत्र न्यायाधीश/अपर सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) कोर्ट संख्या-2 के न्यायाधीश हरेन्द्र कुमार ओझा ने 30 सितंबर को जमानत अर्जी पर फैसला सुनाया। आरोपी 8 सितंबर से जिला जेल में निरुद्ध है। मामला इगलास थाने में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 428/2026 से जुड़ा है।
सोनू चौधरी बनकर इंस्टाग्राम पर दोस्ती का आरोप अभियोजन के अधिवक्ता एडीजीसी संजय शर्मा व लव बंसल के मुताबिक पीड़िता की करीब दो साल पहले इंस्टाग्राम पर सोनू नाम के युवक से बातचीत शुरू हुई। आरोपी ने खुद को सोनू चौधरी बताया और पीड़िता को अलीगढ़ बुलाकर उसके फोटो खींचे। बाद में उसकी असली पहचान मौहम्मद राशिद के रूप में सामने आने पर पीड़िता ने बातचीत बंद करने की बात कही। आरोप है कि इसके बाद फोटो वायरल करने की धमकी दी गई और धर्म परिवर्तन कर शादी करने का दबाव बनाया गया। शादी के बाद नौकरी दिलाने का प्रलोभन देने का भी आरोप है।
होटल में छेड़छाड़ का आरोप अभियोजन के अनुसार आरोपी ने फोटो डिलीट करने की बात कहकर पीड़िता को हाथरस के गैलेक्सी होटल बुलाया। वहां छेड़छाड़ और जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाने के प्रयास का आरोप है। पीड़िता के भाइयों ने आरोपी को पकड़ लिया और इगलास ले जाने लगे, लेकिन तहसील के सामने वह भाग गया।
एक ही फोटो-नंबर वाले आधार मिले पुलिस के अनुसार आरोपी के पास से लैपटॉप, मोबाइल, चार्जर, घड़ी, परफ्यूम और चार आधार कार्ड की छायाप्रतियां मिलीं। इनमें सोनू चौधरी और राशिद हुसैन के नाम वाले आधार पर एक ही नंबर और एक ही व्यक्ति की फोटो थी। सना खान और पीड़िता के नाम वाले आधार पर भी एक ही नंबर व एक ही लड़की की फोटो लगी थी। पुलिस के अनुसार आरोपी ने सोनू चौधरी और सना खान के नाम वाले आधार को फर्जी बताया।
बचाव में 40 हजार रुपये देने का दावा बचाव पक्ष ने आरोपों को झूठा बताते हुए कहा कि घटना हाथरस की है, जबकि मुकदमा इगलास में दर्ज हुआ। आरोपी ने पीड़िता को करीब 40 हजार रुपये ऑनलाइन दिए थे और रकम वापस मांगने पर उसे हाथरस बुलाया गया, जहां उसके साथ मारपीट कर पर्स, मोबाइल और लैपटॉप छीन लिए गए। अभियोजन ने आरोपों को गंभीर बताते हुए जमानत का विरोध किया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए जमानत अर्जी खारिज कर दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आदेश में मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय व्यक्त नहीं की गई है।
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