कच्चा तेल 100 डॉलर पार, भारत की जीडीपी 7 प्रतिशत से ऊपर रहने की उम्मीद

एसोचैम की नई रिपोर्ट के अनुसार यदि कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल तक भी पहुंचती है, तब भी भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7 प्रतिशत से अधिक बनी रह सकती है। मजबूत घरेलू मांग, निवेश और निर्यात देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

कच्चा तेल 100 डॉलर पार, भारत की जीडीपी 7 प्रतिशत से ऊपर रहने की उम्मीद

 राइजिंग न्यूज़ डेस्क | 23 अप्रैल 2026 ।

एसोचैम की रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था ने स्थिरता बनाए रखी है।महंगे तेल का असर जरूर अर्थव्यवस्था पर पड़ता है, खासकर आयात लागत और महंगाई पर।लेकिन भारत की आर्थिक व्यवस्था अब पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत और संतुलित हो चुकी है।घरेलू मांग और लगातार बढ़ता निवेश देश  की आर्थिक गतिविधियों को मजबूती दे रहे हैं। इसी कारण आर्थिक विकास दर पर बड़ा नकारात्मक दबाव पड़ने की संभावना कम मानी जा रही है।


100 डॉलर प्रति बैरल के बावजूद 7 प्रतिशत से अधिक वृद्धि का अनुमान

रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2026–27 में भी भारत की विकास दर 7 प्रतिशत से ऊपर रहने की संभावना है। यह अनुमान मुख्य रूप से मजबूत घरेलू खपत और बढ़ते उपभोक्ता बाजार पर आधारित है। इसके अलावा निर्यात में सुधार  और विदेशी निवेश में वृद्धि भी अर्थव्यवस्था को सहारा दे रही है।बुनियादी ढांचे और औद्योगिक क्षेत्रों में हो रहा पूंजी निवेश भी विकास को गति दे रहा है।इन सभी कारणों से तेल  महंगा होने के बावजूद विकास  दर पर बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है।


पिछले वर्षों के आंकड़े देते हैं मजबूती का संकेत

एसोचैम के अनुसार भारत ने पहले भी उच्च कच्चे तेल कीमतों के दौर में बेहतर प्रदर्शन किया है।
वर्ष 2022–23 में लगभग 93 डॉलर प्रति बैरल तेल के बावजूद विकास दर 7.6 प्रतिशत रही।
वर्ष 2023–24 में भी करीब 82 डॉलर प्रति बैरल स्तर के बावजूद 7.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
2011 से 2014 के बीच जब तेल 100 डॉलर से ऊपर था, तब भी विकास दर 5.2 से 6.4 प्रतिशत रही।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि भारत की अर्थव्यवस्था बाहरी दबावों के बावजूद स्थिर बनी रही है।


वैश्विक तनाव से तेल कीमतों में तेजी

मध्य पूर्व क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता देखी जा रही है। इस तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 102 डॉलर प्रति बैरल के  करीब पहुंच गई है, जबकि अमेरिकी क्रूड भी 93 डॉलर से ऊपर है। इस वृद्धि का सीधा असर आयात बिल और वैश्विक महंगाई पर पड़ सकता है।हालांकि भारत जैसे बड़े उपभोक्ता 
देश पर इसका प्रभाव नियंत्रित रहने की संभावना जताई जा रही है।

भारत की अर्थव्यवस्था में बनी रहेगी विकास की गति

भारत की अर्थव्यवस्था आने वाले समय में भी मजबूत विकास की दिशा में आगे बढ़ती रहने की संभावना है। विशेषज्ञों के अनुसार देश की आर्थिक नींव  अब पहले की तुलना में अधिक स्थिर और संतुलित हो चुकी है। घरेलू खपत, औद्योगिक उत्पादन और सेवाओं
 का क्षेत्र लगातार अर्थव्यवस्था को गति दे रहा है। साथ ही बुनियादी ढांचे में निवेश  और सरकारी नीतियां भी  विकास को समर्थन  प्रदान कर रही हैं। इन्हीं कारणों से वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की विकास दर पर सकारात्मक दृष्टिकोण बना हुआ है।
 


एसोचैम का कहना है कि बाहरी वैश्विक दबावों के बावजूद भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत बनी हुई है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर होता है, लेकिन घरेलू आर्थिक ढांचा अब अधिक मजबूत हो चुका है। उपभोग, निवेश और निर्यात  तीनों ही क्षेत्र  अर्थव्यवस्था को लगातार सहारा दे रहे हैं इसी वजह से आने वाले वर्षों में भी विकास दर 7 प्रतिशत से ऊपर रहने की उम्मीद है।
यह संकेत है कि भारत वैश्विक चुनौतियों के बीच भी अपनी विकास गति बनाए रखेगा।