आठवां वेतन आयोग: क्या खाने की थाली तय करेगी वेतन 69 हजार रुपये की मांग तेज

आठवें वेतन आयोग को लेकर कर्मचारियों के संगठनों ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के 3490 कैलोरी मानक को वेतन निर्धारण का आधार बनाने की मांग की है। इसके साथ ही न्यूनतम वेतन 69 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग भी उठी है।

आठवां वेतन आयोग: क्या खाने की थाली तय करेगी वेतन 69 हजार रुपये की मांग तेज

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 30 मई 2026

देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनभोगी आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार कर रहे हैं। इसी बीच कर्मचारियों के संगठनों की ओर से एक नया प्रस्ताव चर्चा का विषय बन गया है। यह प्रस्ताव भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद द्वारा सुझाए गए 3490 कैलोरी मानक से जुड़ा है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि न्यूनतम वेतन तय करते समय केवल महंगाई ही नहीं, बल्कि कर्मचारियों और उनके परिवार की वास्तविक पोषण आवश्यकताओं को भी आधार बनाया जाना चाहिए। यही कारण है कि अब वेतन निर्धारण में भोजन और पोषण संबंधी मानकों को शामिल करने की मांग तेज हो गई है।

क्या है 3490 कैलोरी का फॉर्मूला

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद देश की प्रमुख स्वास्थ्य अनुसंधान संस्था है, जो समय-समय पर नागरिकों की पोषण संबंधी आवश्यकताओं का अध्ययन करती है। संस्था के अनुसार एक सामान्य कामकाजी व्यक्ति को प्रतिदिन लगभग 3490 कैलोरी ऊर्जा की आवश्यकता होती है। यह ऊर्जा केवल भोजन करने तक सीमित नहीं है, बल्कि शारीरिक क्षमता बनाए रखने, कार्यकुशलता बढ़ाने और स्वस्थ जीवन जीने के लिए आवश्यक मानी जाती है। कर्मचारियों के संगठनों का मानना है कि यदि वेतन निर्धारण में इस मानक को शामिल किया जाता है तो कर्मचारियों को वास्तविक जरूरतों के अनुरूप वेतन मिल सकेगा।

वेतन निर्धारण में भोजन को आधार बनाने की मांग

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि किसी भी कर्मचारी के जीवन स्तर का सबसे महत्वपूर्ण आधार उसकी भोजन व्यवस्था होती है। यदि किसी परिवार की आय इतनी नहीं है कि वह पौष्टिक और पर्याप्त भोजन खरीद सके, तो उसे सम्मानजनक जीवन नहीं कहा जा सकता। इसी वजह से संगठनों ने सरकार से मांग की है कि न्यूनतम वेतन तय करते समय भोजन की लागत और पोषण संबंधी आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी जाए। उनका तर्क है कि बढ़ती महंगाई के दौर में पुराने मानकों से वेतन का आकलन करना उचित नहीं है।

क्यों महत्वपूर्ण मानी जा रही है यह मांग

वेतन आयोगों के इतिहास पर नजर डालें तो कर्मचारियों की मूलभूत जरूरतों को हमेशा वेतन निर्धारण का आधार बनाया गया है। इनमें भोजन, वस्त्र, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन और अन्य दैनिक खर्च शामिल रहे हैं। हालांकि समय के साथ इन जरूरतों की लागत में काफी बढ़ोतरी हुई है। कर्मचारी संगठनों का मानना है कि वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों में नई वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए वेतन संरचना तैयार की जानी चाहिए। इसी सोच के तहत 3490 कैलोरी मानक को शामिल करने की मांग की जा रही है।

69 हजार रुपये न्यूनतम वेतन की मांग क्यों उठी

राष्ट्रीय संयुक्त परामर्श तंत्र ने केंद्र सरकार को सौंपे गए ज्ञापन में केंद्रीय कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन लगभग 69 हजार रुपये प्रतिमाह निर्धारित करने की मांग की है। संगठनों का कहना है कि वर्तमान वेतन संरचना तेजी से बढ़ती महंगाई का सामना करने में सक्षम नहीं है। खाद्य सामग्री, मकान किराया, बच्चों की शिक्षा, चिकित्सा खर्च, बिजली, पानी और परिवहन जैसी आवश्यक सेवाओं की लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में कर्मचारियों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए न्यूनतम वेतन में उल्लेखनीय वृद्धि आवश्यक बताई जा रही है।

समायोजन गुणांक को लेकर भी बढ़ी चर्चा

आठवें वेतन आयोग में समायोजन गुणांक भी प्रमुख मुद्दों में शामिल है। इसी के आधार पर कर्मचारियों के मूल वेतन में वृद्धि तय की जाती है। कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि समायोजन गुणांक ऐसा निर्धारित किया जाए जिससे कर्मचारियों की आय में पर्याप्त बढ़ोतरी हो सके। उनका मानना है कि यदि समायोजन गुणांक को उचित स्तर पर रखा गया तो लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। फिलहाल इस संबंध में सरकार की ओर से कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।

महंगाई ने बढ़ाई कर्मचारियों की चिंता

पिछले कुछ वर्षों में जीवनयापन की लागत में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। खाद्य पदार्थों से लेकर स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा तक लगभग हर क्षेत्र में खर्च बढ़ा है। कर्मचारियों का कहना है कि मौजूदा वेतन वृद्धि इन बढ़ती लागतों की भरपाई नहीं कर पा रही है। यही वजह है कि वेतन निर्धारण के पुराने तरीकों में बदलाव और आधुनिक आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप नई व्यवस्था की मांग जोर पकड़ रही है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि आठवां वेतन आयोग उनकी इन चिंताओं पर गंभीरता से विचार करेगा।

सरकार की ओर से अभी नहीं आया कोई फैसला

केंद्र सरकार ने अभी तक 3490 कैलोरी फॉर्मूले या 69 हजार रुपये न्यूनतम वेतन की मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। आठवें वेतन आयोग से संबंधित विभिन्न सुझावों और मांगों पर विचार-विमर्श जारी है। अंतिम निर्णय आयोग की सिफारिशों और सरकार की मंजूरी के बाद ही सामने आएगा। इसलिए फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि कर्मचारियों की सभी मांगों को स्वीकार किया जाएगा या नहीं।

लाखों कर्मचारियों की टिकी हैं उम्मीदें

देशभर के केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनभोगी आठवें वेतन आयोग से बड़ी राहत की उम्मीद लगाए हुए हैं। उनका मानना है कि इस बार वेतन निर्धारण में केवल महंगाई नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन की जरूरतों को भी महत्व दिया जाना चाहिए। यदि पोषण और जीवनयापन से जुड़े आधुनिक मानकों को वेतन संरचना में शामिल किया जाता है तो यह कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है। आने वाले समय में सरकार का रुख इस पूरे मामले की दिशा तय करेगा।