भारत में व्हाट्सऐप के नए यूजरनेम फीचर पर फिलहाल रोक

केंद्र सरकार ने व्हाट्सऐप के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर को लेकर मेटा को नोटिस जारी कर तीन दिनों के भीतर जवाब मांगा है। सरकार ने सुरक्षा और साइबर अपराध से जुड़े संभावित जोखिमों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया है कि परामर्श प्रक्रिया पूरी होने तक भारत में इस फीचर को लॉन्च नहीं किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य यूजर्स की प्राइवेसी और राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा के बीच संतुलन सुनिश्चित करना है।

भारत में व्हाट्सऐप के नए यूजरनेम फीचर पर फिलहाल रोक

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 2 जुलाई 2026

भारत में व्हाट्सऐप के नए यूजरनेम फीचर को लेकर केंद्र सरकार सतर्क हो गई है। सरकार ने इस फीचर से जुड़े सुरक्षा पहलुओं और संभावित साइबर जोखिमों को देखते हुए व्हाट्सऐप की मूल कंपनी मेटा को नोटिस जारी किया है। साथ ही कंपनी से तीन दिनों के भीतर विस्तृत जवाब मांगा गया है। सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि जब तक इस विषय पर परामर्श और समीक्षा की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस फीचर को भारत में लागू नहीं किया जाएगा।सरकारी सूत्रों के अनुसार, नए फीचर के जरिए यूजर्स बिना अपना मोबाइल नंबर साझा किए केवल यूजरनेम के माध्यम से चैट शुरू कर सकेंगे। सरकार को आशंका है कि यदि पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं हुए तो इसका दुरुपयोग फर्जी पहचान बनाकर साइबर ठगी, ऑनलाइन धोखाधड़ी और अन्य डिजिटल अपराधों में किया जा सकता है।

मेटा को तीन दिन में देना होगा जवाब

केंद्र सरकार ने मेटा से पूछा है कि यूजरनेम फीचर लागू होने के बाद यूजर्स की सुरक्षा, पहचान सत्यापन और साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए कंपनी ने क्या-क्या सुरक्षा व्यवस्था की है। सरकार चाहती है कि किसी भी नए फीचर को लागू करने से पहले उसके संभावित जोखिमों का पूरी तरह आकलन किया जाए। सरकार ने यह भी कहा है कि परामर्श प्रक्रिया पूरी होने तक WhatsApp भारत में यूजरनेम फीचर का रोलआउट नहीं करेगा।

क्या है व्हाट्सऐप का यूजरनेम फीचर

वर्तमान में व्हाट्सऐप पर किसी व्यक्ति से बातचीत शुरू करने के लिए उसका मोबाइल नंबर होना आवश्यक होता है। नए फीचर के आने के बाद यूजर अपने अकाउंट के लिए एक यूनिक यूजरनेम बना सकेंगे। इसके बाद कोई भी व्यक्ति मोबाइल नंबर की बजाय उसी यूजरनेम के जरिए नई चैट शुरू कर सकेगा।मेटा का कहना है कि इस फीचर का मुख्य उद्देश्य यूजर्स की प्राइवेसी बढ़ाना है, ताकि हर नई बातचीत के लिए मोबाइल नंबर साझा करने की आवश्यकता न पड़े। हालांकि जिन लोगों के पास पहले से आपका नंबर मौजूद है या जो पहले से आपके किसी ग्रुप में शामिल हैं, उनके लिए मोबाइल नंबर पहले की तरह दिखाई देता रहेगा।

यूजरनेम कैसे करेगा काम

मेटा के अनुसार, यूजर्स WhatsApp Settings > Account > Username में जाकर अपना पसंदीदा यूजरनेम चुन सकेंगे। प्रत्येक यूजरनेम पूरी तरह यूनिक होगा और एक ही नाम दो अलग-अलग अकाउंट इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। यदि कोई यूजरनेम पहले से उपलब्ध नहीं होगा तो दूसरा विकल्प चुनना होगा।कंपनी ने बताया है कि यह फीचर सभी देशों में एक साथ लॉन्च नहीं किया जाएगा, बल्कि इसे चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध कराया जाएगा।

यूजरनेम की देगा अतिरिक्त सुरक्षा

यूजरनेम फीचर के साथ व्हाट्सऐप एक अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था Username Key भी लाने की तैयारी कर रहा है। यदि कोई यूजर चाहे तो वह अपने यूजरनेम के साथ एक अलग सुरक्षा Key भी जोड़ सकेगा। ऐसी स्थिति में केवल यूजरनेम जानना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि नई चैट शुरू करने के लिए संबंधित Key भी आवश्यक होगी।मेटा का दावा है कि इससे यूजरनेम सार्वजनिक होने के बावजूद अनचाहे संदेशों और स्पैम से बचाव संभव होगा।

टेलीग्राम से क्यों हो रही तुलना

व्हाट्सऐप का यह नया फीचर काफी हद तक Telegram के यूजरनेम सिस्टम जैसा माना जा रहा है। Telegram पर वर्षों से यूजरनेम के जरिए बिना मोबाइल नंबर साझा किए संपर्क किया जा सकता है।NEET पेपर लीक विवाद के दौरान Telegram की भूमिका पर सवाल उठे थे। उस समय सरकार ने री-एग्जाम की अवधि के दौरान Telegram पर अस्थायी प्रतिबंध भी लगाया था। अब WhatsApp भी समान सुविधा लाने जा रहा है, इसलिए सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि पहले जैसी चुनौतियां दोबारा सामने न आएं।हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यूजरनेम होने का मतलब यह नहीं है कि किसी अपराधी को ट्रेस नहीं किया जा सकता। कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच एजेंसियों को आवश्यक होने पर अकाउंट संबंधी जानकारी उपलब्ध कराई जा सकती है।

क्या बढ़ सकता है साइबर फ्रॉड

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मजबूत सुरक्षा उपाय लागू नहीं किए गए तो फर्जी यूजरनेम बनाकर लोगों को धोखा देने की घटनाएं बढ़ सकती हैं। उदाहरण के तौर पर कोई व्यक्ति RBI, बैंक, सरकारी संस्था या किसी परिचित के नाम से मिलता-जुलता यूजरनेम बनाकर लोगों को भ्रमित कर सकता है।हालांकि मेटा का कहना है कि उसने इस तरह के दुरुपयोग को रोकने के लिए कई सुरक्षा उपाय तैयार किए हैं। कंपनी के अनुसार, प्रमुख सार्वजनिक हस्तियों और हाई-प्रोफाइल अकाउंट्स के यूजरनेम पहले से सुरक्षित रखे जाएंगे ताकि उनकी पहचान का दुरुपयोग न हो।

प्राइवेसी और सुरक्षा के बीच संतुलन सबसे बड़ी चुनौती

 यह फीचर ऑनलाइन खरीदारी, बिजनेस कम्युनिकेशन और नए लोगों से संपर्क के दौरान मोबाइल नंबर साझा करने की आवश्यकता कम कर सकता है, जिससे यूजर्स की निजता मजबूत होगी।वहीं दूसरी ओर यदि पहचान छिपाना अधिक आसान हो जाता है तो साइबर अपराधियों के लिए फर्जी प्रोफाइल बनाकर लोगों को निशाना बनाने की संभावना भी बढ़ सकती है। यही कारण है कि केंद्र सरकार इस फीचर को लागू करने से पहले सभी सुरक्षा पहलुओं की विस्तृत समीक्षा कर रही है।