अमेरिका ने पावरफुल एआई पर लगाया बैन
अमेरिका ने एंथ्रोपिक के उन्नत एआई मॉडल Fable 5 और Mythos 5 पर कड़े निर्यात नियंत्रण लागू कर दिए हैं। आशंका जताई जा रही है कि इन तकनीकों तक चीन की पहुंच राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती थी।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 16 जून 2026
अमेरिका ने पावरफुल एआई मॉडल्स पर लगाया प्रतिबंध
कृत्रिम बुद्धिमत्ता की दुनिया में तेजी से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच अमेरिका ने एआई कंपनी एंथ्रोपिक के दो अत्याधुनिक मॉडल Fable 5 और Mythos 5 पर सख्त निर्यात नियंत्रण लागू कर दिए हैं। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि इन अत्यधिक शक्तिशाली तकनीकों तक विदेशी नागरिकों, विशेष रूप से चीन से जुड़े समूहों की पहुंच राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। नए नियमों के तहत इन दोनों एआई मॉडलों का उपयोग अमेरिका के भीतर और बाहर मौजूद गैर-अमेरिकी नागरिकों के लिए सीमित कर दिया गया है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब दुनिया भर में एआई तकनीक को लेकर रणनीतिक प्रतिस्पर्धा लगातार तेज हो रही है।
चीन को लेकर बढ़ी अमेरिका की चिंता
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी सरकार को आशंका थी कि यदि चीन से जुड़े किसी संगठन या शोध समूह को इन एआई मॉडलों तक पहुंच मिल जाती है, तो वह इनका उपयोग संवेदनशील तकनीकी और साइबर गतिविधियों में कर सकता है। हालांकि अब तक ऐसा कोई आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है कि चीन के किसी समूह ने वास्तव में इन मॉडलों तक पहुंच हासिल कर ली थी। इसके बावजूद संभावित जोखिमों को देखते हुए अमेरिकी प्रशासन ने पहले से ही एहतियाती कदम उठाने का फैसला किया। अमेरिका और चीन के बीच तकनीकी वर्चस्व की प्रतिस्पर्धा अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में भी निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है।
क्या है मिथोस 5 और फेबल 5 की खासियत
एंथ्रोपिक द्वारा विकसित Fable 5 और Mythos 5 को अब तक के सबसे उन्नत एआई मॉडलों में गिना जा रहा है। कंपनी का दावा है कि Mythos स्तर की तकनीक जटिल सॉफ्टवेयर प्रणालियों की कमजोरियों को बेहद कम समय में पहचान सकती है। जिन खामियों को खोजने में साइबर विशेषज्ञों को कई महीने लग सकते हैं, उन्हें यह एआई कुछ ही समय में चिन्हित कर सकता है। इसी क्षमता के कारण इन मॉडलों को साइबर सुरक्षा, शोध, रक्षा और तकनीकी विकास के क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
साइबर सुरक्षा को लेकर उठे सवाल
एंथ्रोपिक ने इन मॉडलों में विशेष सुरक्षा व्यवस्था लागू की थी ताकि वे साइबर हमलों या संवेदनशील सुरक्षा जानकारी से जुड़े प्रश्नों के उत्तर न दे सकें। इसके बावजूद एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि अमेजन के कुछ शोधकर्ताओं ने विशेष प्रॉम्प्ट तकनीक का उपयोग कर इन सुरक्षा प्रतिबंधों को आंशिक रूप से दरकिनार कर दिया। इस प्रक्रिया को तकनीकी भाषा में "जेलब्रेक" कहा जाता है। रिपोर्ट के अनुसार इसके बाद मॉडल ने सॉफ्टवेयर कमजोरियों और सुरक्षा खामियों से जुड़ी कुछ जानकारी उपलब्ध कराई। इस घटना ने अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और बढ़ा दी।
व्हाइट हाउस क्यों है चिंतित
अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि यदि इस स्तर की कृत्रिम बुद्धिमत्ता चीन या किसी प्रतिद्वंद्वी देश के हाथ लगती है तो उसका उपयोग साइबर जासूसी, डिजिटल हमलों और संवेदनशील प्रणालियों की कमजोरियां खोजने में किया जा सकता है। रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी एजेंसियों को यह भी चिंता थी कि चीन इन मॉडलों की "डिस्टिलेशन" तकनीक के माध्यम से उनकी क्षमताओं की नकल कर सकता है। डिस्टिलेशन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें किसी उन्नत एआई मॉडल के व्यवहार और ज्ञान का अध्ययन करके उसका सरल लेकिन प्रभावी संस्करण तैयार किया जाता है। यदि ऐसा होता है तो अमेरिका की तकनीकी बढ़त को चुनौती मिल सकती है।
एंथ्रोपिक और सरकार के बीच जारी है बातचीत
एंथ्रोपिक ने इस मामले पर अमेरिकी प्रशासन के साथ संवाद जारी रखा है। कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी और इंजीनियर सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर ऐसे समाधान तलाश रहे हैं जिससे सुरक्षा चिंताओं का समाधान हो सके और तकनीक का विकास भी प्रभावित न हो। कंपनी को उम्मीद है कि भविष्य में ऐसे नियम विकसित किए जाएंगे जो सुरक्षा और नवाचार के बीच संतुलन बनाए रख सकें।
एआई तकनीक पर बढ़ रहा वैश्विक नियंत्रण
दुनिया के कई देश अब उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीकों को रणनीतिक संसाधन के रूप में देखने लगे हैं। जिस प्रकार परमाणु तकनीक, रक्षा उपकरण और अर्धचालक चिप्स पर निर्यात नियंत्रण लागू किए जाते हैं, उसी तरह अब एआई मॉडल भी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा विषय बनते जा रहे हैं। अमेरिका का यह कदम संकेत देता है कि आने वाले वर्षों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता केवल तकनीकी विकास का विषय नहीं रहेगी, बल्कि वैश्विक राजनीति, सुरक्षा और आर्थिक प्रतिस्पर्धा का भी प्रमुख केंद्र बनेगी।