तेजस परियोजना को लगा बड़ा झटका

देश के स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस एमके1ए परियोजना को नया झटका लगा है। अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस द्वारा आपूर्ति किए गए छठे इंजन में तकनीकी खराबी सामने आई है। इस वजह से विमानों की डिलीवरी में और देरी की आशंका बढ़ गई है। रक्षा मंत्रालय ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड पर अनुबंध के तहत कार्रवाई और जुर्माने की संभावना जताई है।

तेजस परियोजना को लगा बड़ा झटका

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 28 जून 2026

देश की सबसे महत्वपूर्ण रक्षा परियोजनाओं में शामिल तेजस एमके1ए लड़ाकू विमान कार्यक्रम को एक और बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस द्वारा हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को भेजे गए छठे एफ404-आईएन20 इंजन में तकनीकी खराबी पाए जाने के बाद परियोजना की समयसीमा पर नए सवाल खड़े हो गए हैं। इस घटनाक्रम से भारतीय वायुसेना को निर्धारित समय पर लड़ाकू विमान मिलने की उम्मीदों को भी झटका लगा है।सूत्रों के अनुसार संबंधित इंजन इसी वर्ष मई महीने में भारत पहुंचा था। एचएएल द्वारा नियमित गुणवत्ता परीक्षण और तकनीकी निरीक्षण के दौरान इंजन में एक महत्वपूर्ण तकनीकी समस्या का पता चला। इसके बाद कंपनी ने मामले को तत्काल अमेरिकी निर्माता जीई एयरोस्पेस के समक्ष उठाया और विस्तृत जांच की मांग की।

जांच के लिए भारत आएंगे विशेषज्ञ

तकनीकी खराबी सामने आने के बाद जीई एयरोस्पेस के विशेषज्ञ इंजीनियरों की एक टीम भारत आने की तैयारी कर रही है। यह टीम इंजन का विस्तृत परीक्षण करेगी और यह निर्धारित करेगी कि समस्या को भारत में ही ठीक किया जा सकता है या नहीं।यदि जांच में यह पाया जाता है कि खराबी को स्थानीय स्तर पर दूर किया जा सकता है, तो मरम्मत का कार्य भारत में ही किया जाएगा। वहीं यदि समस्या गंभीर हुई और इंजन को उपयोग योग्य बनाना संभव नहीं हुआ, तो कंपनी को इसके स्थान पर नया इंजन उपलब्ध कराना पड़ सकता है।

डिलीवरी में और देरी की आशंका

तेजस एमके1ए कार्यक्रम पहले से ही इंजन आपूर्ति में देरी के कारण प्रभावित रहा है। अब छठे इंजन में आई तकनीकी समस्या ने परियोजना की चुनौतियों को और बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समस्या के समाधान में अधिक समय लगता है तो लड़ाकू विमानों की डिलीवरी कार्यक्रम पर सीधा असर पड़ सकता है।हालांकि एचएएल को उम्मीद है कि सातवां इंजन अगले महीने तक प्राप्त हो जाएगा, लेकिन मौजूदा स्थिति ने पूरी परियोजना की गति को प्रभावित किया है।

5,375 करोड़ रुपये का है इंजन सौदा

गौरतलब है कि वर्ष 2021 में एचएएल और जीई एयरोस्पेस के बीच लगभग 5,375 करोड़ रुपये का महत्वपूर्ण समझौता हुआ था। इस अनुबंध के तहत अमेरिकी कंपनी को 99 एफ404-आईएन20 इंजन की आपूर्ति करनी है, जिनका उपयोग तेजस एमके1ए लड़ाकू विमानों में किया जाना है।इन इंजनों की समय पर आपूर्ति तेजस परियोजना की सफलता के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। किसी भी प्रकार की देरी सीधे तौर पर विमान निर्माण और वायुसेना को सौंपे जाने वाले विमानों की संख्या को प्रभावित कर सकती है।

रक्षा मंत्रालय ने दिखाई सख्ती

वायुसेना में लड़ाकू विमानों की संख्या को लेकर पहले से चिंता बनी हुई है। ऐसे में तेजस एमके1ए कार्यक्रम में हो रही देरी को रक्षा मंत्रालय गंभीरता से देख रहा है। सूत्रों के मुताबिक मंत्रालय ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि अनुबंध की शर्तों के अनुसार एचएएल पर वित्तीय दंड लगाया जा सकता है।मंत्रालय का मानना है कि निर्धारित समयसीमा में परियोजना पूरी होना राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत आवश्यक है। इसी कारण सभी संबंधित पक्षों पर तेजी से काम पूरा करने का दबाव बढ़ गया है।

वायुसेना की जरूरतों के अनुसार किए जा रहे बदलाव

एचएएल फिलहाल भारतीय वायुसेना द्वारा सुझाए गए विभिन्न तकनीकी संशोधनों और उन्नयनों को विमान में शामिल करने के कार्य में जुटा हुआ है। कंपनी को उम्मीद है कि यदि सभी परीक्षण और आवश्यक बदलाव सफलतापूर्वक पूरे हो जाते हैं तथा वायुसेना अंतिम स्वीकृति दे देती है, तो वर्ष 2026 के अंत तक तेजस एमके1ए के पहले पांच लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना को सौंपे जा सकते हैं।

राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजना

तेजस एमके1ए को भारतीय वायुसेना की भविष्य की जरूरतों के लिए बेहद अहम माना जाता है। यह विमान आधुनिक रडार, उन्नत हथियार प्रणाली और बेहतर इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता से लैस है। ऐसे में परियोजना में आने वाली हर देरी का असर वायुसेना की परिचालन क्षमता और आधुनिकीकरण योजनाओं पर पड़ सकता है।फिलहाल सभी की नजरें जीई एयरोस्पेस की जांच टीम की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि तकनीकी खराबी का समाधान कितनी जल्दी संभव है और तेजस परियोजना अपनी निर्धारित गति दोबारा हासिल कर पाएगी या नहीं।