डॉक्टर रमीज के तार आगरा-एटा मेडिकल कॉलेज तक जुड़े:धर्मांतरण-लव जिहाद की फंडिंग में 100 से ज्यादा डॉक्टर-मौलाना शामिल, जकात के नाम पर वसूला जाता था चंदा

Nov 04, 2026 - 01:43
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डॉक्टर रमीज के तार आगरा-एटा मेडिकल कॉलेज तक जुड़े:धर्मांतरण-लव जिहाद की फंडिंग में 100 से ज्यादा डॉक्टर-मौलाना शामिल, जकात के नाम पर वसूला जाता था चंदा
लखनऊ के केजीएमयू में सामने आए मतांतरण प्रकरण के तार अब आगरा और एटा मेडिकल कॉलेज तक जुड़ते नजर आ रहे हैं। एसटीएफ की जांच में सामने आए संपर्कों के मुताबिक, आगरा के सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज (एसएन मेडिकल कॉलेज) के कई डॉक्टर और केजीएमयू के कुछ छात्र इस मामले से जुड़े हैं। इनमें मुख्य आरोपित डा. रमीज के करीबी बताए जा रहे डा. रिजवान मलिक का नाम भी शामिल है। डा. रिजवान की एटा मेडिकल कॉलेज में करीब पांच साल तैनाती रही। इस दौरान वह कई विवादों में घिरा रहा। वहीं धर्मांतरण व लव जिहाद की फंडिंग करने 100 से ज्यादा डॉक्टर व मौलाना शामिल है। सभी जकात के नाम पर फंडिंग जुटाते थे। एसटीएफ की रिपोर्ट में डा. रमीज, डा. रिजवान मलिक और अदनान अंसारी समेत कई लोगों के बीच संपर्कों का जिक्र है। जांच में इस्लामिक मेडिकोज नाम के समूह का भी पता चला है। इस समूह से जुड़ी पुस्तक और पत्रिका के जरिए पुराने और नए मेडिकल छात्रों के बीच संपर्क बनाए जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि मेडिकल कॉलेजों में नए दाखिला लेने वाले छात्रों को भी इस समूह से जोड़ा जाता था। एटा में असिस्टेंट प्रोफेसर की गाड़ी तोड़ने का मुकदमा दर्ज हुआ था एटा मेडिकल कॉलेज में तैनाती के दौरान अक्टूबर 2023 में डा. रिजवान मलिक के खिलाफ असिस्टेंट प्रोफेसर की गाड़ी में तोड़फोड़ के आरोप में मुकदमा दर्ज हुआ था। इस मामले में मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डा. रजनी पटेल और अकाउंटेंट अभिषेक भी सह-आरोपित थे। सूत्रों के मुताबिक, एटा में तैनाती के दौरान डा. रिजवान की उच्चाधिकारियों से नजदीकियां थीं। आरोप है कि उसने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर कई गैर मुस्लिम छात्र-छात्राओं के परीक्षा परिणाम प्रभावित कराए और उनकी सप्लीमेंट्री लगवाई। हालांकि, इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। 100 से ज्यादा लोगों गैंग में शामिल केजीएमयू में धर्मांतरण और लव जिहाद के नेटवर्क की जांच में एसटीएफ को कई चौंकाने वाली जानकारियां मिली हैं। जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क से 100 से ज्यादा डॉक्टर और मौलाना जुड़े थे। ये लोग जकात के नाम पर हर महीने करीब 10 लाख रुपये जुटाते थे। एसटीएफ अब गिरोह से जुड़े लोगों को चिह्नित कर उनके बैंक खातों और आर्थिक लेनदेन की जानकारी जुटा रही है। जांच में पता चला है कि लखनऊ, आगरा, बस्ती, सहारनपुर के देवबंद और बरेली के सरकारी व निजी संस्थानों के डॉक्टरों के साथ कई मौलाना भी नेटवर्क से जुड़े थे। एसटीएफ की जांच के दायरे में केजीएमयू के डॉक्टर समेत 12 मेडिकल स्टाफ, शहर के दो निजी मेडिकल कॉलेजों के संचालक और अधिकारी भी हैं। इसके अलावा आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज (एसएनएमसी) के पूर्व और वर्तमान छात्रों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। गिरोह से जुड़े लोगों के बैंक खातों की जानकारी के लिए बैंकों को पत्र भेजे गए हैं। जकात के नाम पर तकरीर कर जुटाते थे रकम एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि केजीएमयू के हॉस्टलों में बाहर से आने वाले मौलाना मेडिकल स्टाफ और छात्रों के बीच तकरीर करते थे। डॉ. रमीज भी इन तकरीरों में शामिल होता था। देवबंद, बरेली और आगरा से आने वाले मौलाना जकात (दान) के नाम पर रकम जुटाते थे। नेटवर्क से जुड़े लोगों की जरूरतों और गतिविधियों पर इसी रकम को खर्च किया जाता था। हर महीने करीब 10 लाख रुपये जुटाए जाने की बात सामने आई है। हिंदू महिलाओं का धर्मांतरण सवाब मानते थे जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह से जुड़े लोग हिंदू महिलाओं का धर्मांतरण कराना सवाब (पुण्य) का काम मानते थे। केजीएमयू परिसर के हॉल में होने वाली तकरीरों में बाहर से आने वाले मौलाना महिलाओं को अपने जाल में फंसाने की रणनीति तैयार करते थे। इसके लिए बाकायदा स्क्रिप्ट तैयार की जाती थी। इसमें बताया जाता था कि हिंदू महिला डॉक्टरों को किस तरह अपने प्रभाव में लेना है और उनकी मानसिकता बदलने के लिए कैसे काम करना है। दीनी तालीम के बहाने छात्रों को भड़काते थे एसटीएफ की जांच में केजीएमयू के बंद कमरों में होने वाली बैठकों की जानकारी भी सामने आई है। आरोप है कि डॉ. रमीज दीनी तालीम के नाम पर मुस्लिम मेडिकल छात्रों को जुटाता था। इनमें कई सीधे-साधे और पढ़ाई में अच्छे छात्र भी होते थे, जिनका शुरुआत में ऐसी गतिविधियों से कोई लेना-देना नहीं था। आरोप है कि बाहर से आने वाले मौलाना इन छात्रों को धीरे-धीरे प्रभावित कर अपने नेटवर्क में शामिल करने की कोशिश करते थे। उन्हें हिंदुओं के बारे में आपत्तिजनक और भ्रामक बातें बताकर उनके मन में द्वेष पैदा किया जाता था। एसटीएफ अब इस नेटवर्क की फंडिंग, उससे जुड़े लोगों और उनकी भूमिका की कड़ियां जोड़ रही है। मतांतरण के आरोपों की दो पीढ़ियां, पिता पर भी लगे थे आरोप केजीएमयू मतांतरण प्रकरण में जांच का दायरा मुख्य आरोपित डा. रमीज के परिवार तक भी पहुंचा है। उसके पिता सलीमुद्दीन पर भी हिंदू युवती को प्रेमजाल में फंसाकर धर्म परिवर्तन कराने के आरोप लगे थे। बताया जाता है कि सलीमुद्दीन ने पंजाबी महिला खतीजा से दूसरी शादी की थी। आरोप है कि पहली पत्नी के रहते शादी करने से पहले महिला का धर्म परिवर्तन कराया गया था। सलीमुद्दीन पर अलग-अलग राज्यों की हिंदू महिलाओं को प्रेमजाल में फंसाकर मतांतरण कराने के आरोप भी लगे हैं। डा. रमीज के मामले में पुलिस ने उसके पिता सलीमुद्दीन और मां खतीजा को भी आरोपित बनाया था। दोनों पर बेटे की गतिविधियों में मदद करने और उसे संरक्षण देने का आरोप है। अब पुलिस इस बिंदु पर भी जांच कर रही है कि पिता और पुत्र एक ही नेटवर्क से जुड़े थे या दोनों के अलग-अलग नेटवर्क काम कर रहे थे। एसटीएफ और पुलिस की जांच में सामने आए संपर्कों के आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

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