एक दिन में 319 लोग लगवा रहे रेबीज का टीका:अगस्त में 9,897 नए मरीज; सितंबर में केवल कबीर चौरा में पहुंचे 1,196 लोग
वाराणसी में पशुओं के काटने के बाद एंटी-रेबीज टीका लगवाने वालों की संख्या बड़ी है। अगस्त में जिलेभर में 9,897 नए मरीज एंटी-रेबीज टीकाकरण के लिए पहुंचे। यानी रोज औसतन 319 नए मरीज अस्पतालों में पहुंचे। वहीं सितंबर में 1 से 26 तारीख तक सिर्फ कबीर चौरा मंडलीय अस्पताल में 1,196 मरीज और अगस्त में कुल 1,439 मरीज पशु के काटने के बाद पहुंचे। विश्व रैबीज दिवस के मौके पर सीएमओ एनपी सिंह ने लोगों ने कहा कुत्ता बिल्ली बंदर या अन्य जानवर के काटने पर घरेलू उपचार से बचे तुरंत डॉक्टर की सलाह से टीकाकरण कराएं। अगस्त में कबीर चौरा में 1,439 मरीज, 4,281 डोज लगीं कबीर चौरा मंडलीय अस्पताल में अगस्त में कुल 1,439 मरीज पशु के काटने के बाद पहुंचे। इनमें 989 डॉग बाइट, 259 मंकी बाइट, 172 कैट बाइट और 19 अन्य मामलों के मरीज शामिल रहे। इन मरीजों को कुल 4,281 एंटी-रेबीज वैक्सीन की डोज दी गईं। सितंबर में 26 दिन में 1,196 मरीज पहुंचे कबीर चौरा में 1 से 26 सितंबर तक 1,196 मरीज एंटी-रेबीज टीकाकरण के लिए पहुंचे। इनमें 800 डॉग बाइट, 229 मंकी बाइट, 138 कैट बाइट और 29 अन्य मामलों के मरीज हैं। इस अवधि में कुल 3,654 एंटी-रेबीज वैक्सीन की डोज लगाई गईं। यानी सितंबर के इन 26 दिनों में रोज औसतन करीब 46 मरीज अस्पताल पहुंचे। कुत्ते के काटने के सबसे ज्यादा मामले कबीर चौरा के आंकड़ों में सबसे ज्यादा मरीज कुत्ते के काटने के हैं। अगस्त में कुल 1,439 मरीजों में 989 मामले डॉग बाइट के थे। सितंबर के 26 दिनों में भी 1,196 मरीजों में 800 मरीज कुत्ते के काटने के बाद अस्पताल पहुंचे। इसके बाद बंदर और बिल्ली के काटने के मामले रहे। 28 सितंबर को मनाया जाता है वर्ल्ड रेबीज डे हर साल 28 सितंबर को वर्ल्ड रेबीज डे मनाया जाता है। इसका उद्देश्य रेबीज की रोकथाम, समय पर उपचार और बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। 2026 की थीम ‘Stronger Together’ है। डब्ल्यू.एच.ओ के मुताबिक रेबीज से होने वाली मौतों को समय पर पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (PEP) से रोका जा सकता है। इसमें घाव की अच्छी तरह सफाई, जरूरत के अनुसार एंटी-रेबीज वैक्सीन और गंभीर एक्सपोजर में रैबीज इम्युनोग्लोबुलिन शामिल होता है। CMO बोलें-घाव को 15 मिनट तक साबुन और बहते पानी से धोएं सीएमओ ने विश्व रेबीज दिवस पर कहा रेबीज गंभीर और जानलेवा बीमारी है, लेकिन पूरी तरह से रोकथाम योग्य है। कुत्ते, बिल्ली या किसी संक्रमित जानवर के काटने या खरोंचने से संक्रमण हो सकता है। ऐसी स्थिति में घाव को कम से कम 15 मिनट तक साबुन और बहते पानी से धोना चाहिए और तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। घरेलू उपचार से बचे सीएमओ ने लोगों से घरेलू उपचार, झाड़-फूंक, मिर्च-मसाला या तेल लगाने से बचने और डॉक्टर की सलाह के बिना टीकाकरण बीच में नहीं छोड़ने की अपील की है। स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य ‘जीरो रेबीज डेथ’ है। WHO भी पशु के काटने या खरोंचने के बाद घाव को तुरंत कम से कम 15 मिनट तक साबुन और पानी से धोने और चिकित्सकीय सलाह लेने की सिफारिश करता है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)