गो सेवा से होती है कई पीढ़ियों की रक्षा:साप्ताहिक संगोष्ठी में बोले उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग के अध्यक्ष

Sep 28, 2026 - 18:30
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गो सेवा से होती है कई पीढ़ियों की रक्षा:साप्ताहिक संगोष्ठी में बोले उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग के अध्यक्ष
ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं एवं ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित साप्ताहिक संगोष्ठी में सोमवार को ‘भारतीय संस्कृति एवं गो सेवा’ विषय पर विद्वानों एवं संतों ने अपने विचार व्यक्त किए। मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने कहा कि गो सेवा करके हम केवल गो रक्षा नहीं करते बल्कि गाय के माध्यम से हमारी कई पीढ़ियों की रक्षा होती है। प्रदेश सरकार लगभग 7000 गो शालाओं का संचालन कर रही है। घरों में पाली जा रही गायों के लिए भी चारे की व्यवस्था सरकार द्वारा की जा रही है। उन्होंने कहा कि समुद्र मंथन से निकले रत्नों में एक विष था और दूसरा कामधेनु। विष के शमन का श्रेष्ठ साधन गो माता से प्राप्त गव्य पदार्थ हैं। गो माता धरती के समस्त प्राणियों की रक्षा करती हैं। देशी गो माता के दूध और घी के सेवन से हमारे भोजन में मौजूद विषाक्त तत्वों के प्रभाव को कम करने में सहायता मिलती है। हमारी संस्कृति में गो माता को अपने संबंधियों को भी दान करने की परंपरा रही है। यदि हम सभी गाय का दूध पीने लगें तो गाय का दूध भैंस के दूध से अधिक मूल्यवान हो जाएगा। जिस दिन गाय का दूध मूल्यवान होगा, उसी दिन से गो सेवा के प्रति समाज का दृष्टिकोण भी और मजबूत होगा। गो सेवा आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि खेती में रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से हमारा भोजन भी विषाक्त हो रहा है। जहर मुक्त भोजन तभी संभव है, जब घर-घर गो सेवा हो और गोबर खेतों तक पहुंचे। विकास की दौड़ में हमें केवल फ्लैट नहीं, बल्कि ऐसे फार्म हाउस की कल्पना करनी चाहिए, जहां गो सेवा की व्यवस्था हो। आज एलपीजी गैस की समस्या है। यदि घर-घर गोबर गैस का प्रयोग किया जाए तो इस संकट का समाधान करने में सहायता मिल सकती है। मुख्य अतिथि वृंदावनधाम से पाए स्वामी राजेंद्रदास देवाचार्य ने कहा कि जिस पीठ के नाम के साथ ही गोरक्षा शब्द जुड़ा हुआ है, वहां गो सेवा पर चर्चा करना और संतों का मार्गदर्शन प्राप्त करना सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि भगवान की श्रेष्ठ रचना मनुष्य ने ही भगवान की सुंदर प्रकृति को विषैला बनाया है। मनुष्य केवल स्थूल चीजों का चिंतन करता है, सूक्ष्म चीजों पर पर्याप्त ध्यान नहीं देता। हमें यह समझना होगा कि यदि सूक्ष्म का विनाश होगा तो स्थूल की सत्ता भी संभव नहीं है। हमारे ऋषियों ने गो माता के महत्व को इसी दृष्टि से समझाया है। गो माता हमारी स्थूल प्रकृति के साथ-साथ सूक्ष्म प्रकृति की भी रक्षा करती हैं। उन्होंने कहा कि हमारे जीवन में प्राचीन ऋषियों का बहुत महत्व है और हम ऋषि ऋण से कभी उऋण नहीं हो सकते। ऐसे ऋषियों से भी श्रेष्ठ यदि कोई है तो वह गो माता ही हैं। गोबर तथा गोमूत्र को खेतों में डालने से ऊसर भूमि भी उपजाऊ हो सकती है और उस भूमि में उत्पन्न अन्न बल एवं आयु को बढ़ाने वाला होता है। उन्होंने कहा कि संपूर्ण वैदिक संस्कृति, ऋषि संस्कृति, देव संस्कृति तथा प्रकृति-पर्यावरण का मूल गो माता हैं। नर गोवंश की हत्या धर्म की हत्या है और गो रक्षा धर्म की रक्षा है। गोरक्षपीठ की महान ऊर्जा का एक प्रमाण यह भी है कि परिसर में लगभग साढ़े पांच सौ शुद्ध देशी गायों की सेवा होती है। विशिष्ट वक्ता एवं गीताप्रेस, गोरखपुर के प्रबंधक लालमणि त्रिपाठी ने कहा कि गो माता के दर्शन मात्र से सभी देवी-देवताओं के दर्शन का पुण्य प्राप्त होता है। हमारी संस्कृति में गाय कोई सामान्य पशु नहीं है। जिस प्रकार तुलसी सामान्य वनस्पति नहीं, बल्कि लक्ष्मी स्वरूपा मानी जाती हैं, उसी प्रकार गो माता को साक्षात् देवताओं का स्वरूप माना गया है।

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