INDIA गठबंधन की बैठक में क्यों नहीं आए AAP और DMK? जानिए पूरा मामला
इंडिया गठबंधन की 30 सितंबर को नई दिल्ली में महत्वपूर्ण बैठक हो रही है। बैठक में विशेष गहन पुनरीक्षण, चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष की साझा रणनीति पर चर्चा होनी है। आम आदमी पार्टी और डीएमके ने बैठक से दूरी बनाई है, जबकि समाजवादी पार्टी की ओर से प्रतिनिधिमंडल भेजा जा रहा है।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 30 सितंबर 2026
नई दिल्ली में आज विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया की अहम बैठक हो रही है। बैठक में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण, चुनाव आयोग की भूमिका और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दों पर साझा रणनीति पर चर्चा होनी है। हालांकि, आम आदमी पार्टी और द्रविड़ मुनेत्र कषगम ने बैठक से दूरी बनाई है, जबकि समाजवादी पार्टी की ओर से प्रतिनिधि भेजे गए हैं।
बैठक में किन मुद्दों पर होगी चर्चा
विपक्षी दलों की बैठक नई दिल्ली के संविधान क्लब में हो रही है। बैठक में विशेष गहन पुनरीक्षण के मुद्दे पर संयुक्त विरोध की रणनीति तैयार किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने से जुड़े प्रस्ताव पर भी विपक्षी दलों के बीच चर्चा होनी है।
आम आदमी पार्टी ने बैठक से क्यों बनाई दूरी
आम आदमी पार्टी ने इस बैठक में शामिल नहीं होने का फैसला किया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, पार्टी दिल्ली और पंजाब में कांग्रेस के साथ सीधे राजनीतिक मुकाबले में है, जिसके कारण दोनों दलों के बीच राज्य स्तर पर अलग राजनीतिक समीकरण हैं। हालांकि, पार्टी ने संकेत दिया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने से जुड़ा प्रस्ताव संसद में आता है तो वह विपक्ष के साथ खड़ी हो सकती है।
डीएमके का रुख क्या है
द्रविड़ मुनेत्र कषगम ने भी बैठक से दूरी बनाने की घोषणा की है। पार्टी के प्रवक्ता टी.के.एस. एलंगोवन के अनुसार, कांग्रेस के साथ तमिलनाडु की राजनीति और अभिनेता विजय की पार्टी के प्रति कांग्रेस के रुख को लेकर मतभेद हैं। डीएमके ने यह भी कहा है कि वैचारिक स्तर पर वह भाजपा का विरोध करती है, लेकिन खुद को इंडिया गठबंधन के संगठनात्मक ढांचे का हिस्सा नहीं मानती।
अखिलेश यादव बैठक में क्यों नहीं आएंगे
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव बैठक में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो रहे हैं। उनकी जगह पार्टी का वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल बैठक में हिस्सा लेगा। आधिकारिक तौर पर उनके नहीं आने को उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़ा गया है, जबकि कुछ रिपोर्टों में कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे को लेकर मतभेदों का भी उल्लेख किया गया है।
विपक्षी दलों के बीच मतभेद की बड़ी वजहें
विपक्षी दल कई राष्ट्रीय मुद्दों पर एक समान रुख रखते हैं, लेकिन राज्यों में उनके राजनीतिक हित अलग-अलग हैं। कांग्रेस और क्षेत्रीय दल कई राज्यों में एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी हैं। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर साझा मंच बनाने के बावजूद राज्य स्तर के चुनावी समीकरण गठबंधन की एकजुटता को प्रभावित कर रहे हैं। यह स्थिति खास तौर पर दिल्ली, पंजाब और तमिलनाडु जैसे राज्यों में दिखाई देती है।
कांग्रेस के नेतृत्व को लेकर भी मतभेद
क्षेत्रीय दलों और कांग्रेस के बीच नेतृत्व तथा गठबंधन के स्वरूप को लेकर भी अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आते रहे हैं। कुछ क्षेत्रीय पार्टियां सामूहिक नेतृत्व और अपने राज्यों में स्वतंत्र राजनीतिक भूमिका बनाए रखने पर जोर देती हैं। यही कारण है कि किसी राष्ट्रीय मुद्दे पर साथ आने और गठबंधन के संगठनात्मक ढांचे में शामिल रहने को कुछ दल अलग-अलग तरीके से देखते हैं।
आगे क्या रणनीति बन सकती है
बैठक में विपक्षी दल चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर संयुक्त अभियान और देशव्यापी आंदोलन की रणनीति पर विचार कर सकते हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संसद में प्रस्ताव लाने और विशेष गहन पुनरीक्षण के मुद्दे को लेकर साझा रुख बनाने की भी चर्चा है। हालांकि, बैठक से कुछ प्रमुख दलों की दूरी विपक्षी एकता के सामने मौजूद राजनीतिक मतभेदों को भी सामने रखती है।
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