भारत पर डबल खतरा! चीन-पाकिस्तान को लेकर बड़ी चेतावनी...
अंतरराष्ट्रीय सामरिक अध्ययन संस्थान की नई एशिया-प्रशांत सुरक्षा रिपोर्ट में भारत के सामने चीन और पाकिस्तान से बढ़ते दोहरे खतरे को लेकर बड़ा अलर्ट जारी किया गया है। रिपोर्ट में “न युद्ध, न शांति” जैसी स्थिति को भारत की सबसे बड़ी चुनौती बताया गया है। साथ ही सीमापार सैन्य कार्रवाइयों, हिंद महासागर क्षेत्र और बढ़ते एशियाई तनाव पर भी चिंता जताई गई है।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 28 मई 2026
भारत की सुरक्षा चुनौतियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी चेतावनी सामने आई है। लंदन स्थित सामरिक अध्ययन संस्थान की ताज़ा एशिया-प्रशांत सुरक्षा रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के सामने चीन और पाकिस्तान के रूप में दोहरा खतरा लगातार गहराता जा रहा है। रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि दोनों परमाणु संपन्न पड़ोसी देशों के साथ सीमा तनाव आने वाले समय में भी भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता बना रहेगा। इस खुलासे के बाद रणनीतिक और सुरक्षा हलकों में हलचल तेज हो गई है। भारत को भविष्य में पारंपरिक युद्ध से ज्यादा “न युद्ध और न शांति” जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। यही कारण है कि भारतीय सेना लगातार सीमाओं पर अपनी तैयारी मजबूत कर रही है और हर परिस्थिति के लिए रणनीतिक ढांचा तैयार किया जा रहा है।
चीन और पाकिस्तान बने भारत की सबसे बड़ी चुनौती
रिपोर्ट के अनुसार भारत की सबसे बड़ी सुरक्षा चुनौती उसके दो पड़ोसी देश चीन और पाकिस्तान बने हुए हैं। दोनों देशों के साथ लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद और तनावपूर्ण रिश्ते भारत के लिए लगातार चिंता का विषय बने हुए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले वर्षों में भी भारत की दोनों देशों के साथ सैन्यीकृत सीमाएं बनी रहेंगी। चीन सीमा पर लगातार अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ा रहा है, जबकि पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद और अप्रत्यक्ष रणनीति के जरिए भारत पर दबाव बनाने की कोशिश करता रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दोनों देशों की संयुक्त चुनौती भारत की सुरक्षा नीति को और अधिक जटिल बना रही है।
न युद्ध, न शांति जैसी स्थिति को बताया सबसे बड़ा खतरा
रिपोर्ट में भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती “न युद्ध और न शांति” जैसी स्थिति को बताया गया है। इसमें कहा गया है कि भारत को लगातार ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है, जहां खुला युद्ध तो नहीं होता, लेकिन तनाव, घुसपैठ, सीमा विवाद और आतंकवादी गतिविधियां जारी रहती हैं।रिपोर्ट के मुताबिक यह स्थिति पारंपरिक युद्ध से अधिक खतरनाक मानी जाती है क्योंकि इसमें दुश्मन देश लगातार दबाव बनाए रखते हैं। भारत को एक साथ सैन्य, कूटनीतिक और रणनीतिक स्तर पर जवाब देना पड़ता है। यही वजह है कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियां और सेना अब पारंपरिक युद्ध के साथ-साथ आधुनिक रणनीतिक चुनौतियों पर भी विशेष ध्यान दे रही हैं।
सर्जिकल कार्रवाई ने बदली भारत की रणनीति
रिपोर्ट में भारत द्वारा पिछले वर्षों में की गई सीमापार सैन्य कार्रवाइयों का भी उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई बार सीमित सैन्य कार्रवाई कर अपनी नई रणनीतिक सोच का परिचय दिया है। इन कार्रवाइयों ने यह संकेत दिया कि भारत अब आतंकवाद और सीमा पार हमलों पर पहले की तुलना में अधिक सख्त जवाब देने की नीति अपना रहा है। इन अभियानों के बाद भारत की सैन्य रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। राजनीतिक नेतृत्व की इच्छाशक्ति और सेना की तैयारी ने मिलकर भारत की सुरक्षा नीति को अधिक आक्रामक और प्रभावी बनाया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस बदलाव का असर पूरे क्षेत्र की सामरिक स्थिति पर पड़ा है।
चीन-अमेरिका तनाव से भी प्रभावित हो सकता है क्षेत्र
रिपोर्ट में एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते तनाव का भी जिक्र किया गया है। इसमें कहा गया है कि चीन और अमेरिका के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा पूरे क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति को प्रभावित कर सकती है। विशेष रूप से ताइवान को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है।हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत इस संघर्ष से दूरी बनाए रखना चाहेगा और सीधे किसी बड़े शक्ति संघर्ष में शामिल होने से बचेगा। भारत की प्राथमिकता अपनी सीमाओं की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत संतुलित रणनीति के जरिए अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने की कोशिश करेगा।
हिंद महासागर और मलक्का क्षेत्र पर बढ़ी रणनीतिक प्रतिस्पर्धा
रिपोर्ट में हिंद महासागर क्षेत्र और मलक्का जलडमरूमध्य को भी बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक क्षेत्र बताया गया है। इसमें कहा गया है कि इस इलाके में चीन की बढ़ती सैन्य मौजूदगी और गतिविधियों ने प्रतिस्पर्धा को और तेज कर दिया है। कई बड़े देश अब इस क्षेत्र में अपनी सैन्य और सामरिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।हिंद महासागर क्षेत्र भारत की सुरक्षा और व्यापारिक हितों के लिए बेहद अहम माना जाता है। ऐसे में भारत इस क्षेत्र में अपनी रणनीतिक स्थिति को मजबूत बनाए रखने के लिए लगातार कदम उठा रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले समय में यह क्षेत्र वैश्विक शक्ति संतुलन का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।
अंतरराष्ट्रीय रक्षा संवाद पर दुनिया की नजर
सिंगापुर में होने वाले बड़े अंतरराष्ट्रीय रक्षा संवाद से पहले जारी इस रिपोर्ट ने वैश्विक सुरक्षा जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इस सम्मेलन में कई देशों के रक्षा मंत्री, सैन्य अधिकारी और रणनीतिक विशेषज्ञ शामिल होने वाले हैं। माना जा रहा है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा चुनौतियों पर गहन चर्चा होगी।रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद भारत की सुरक्षा रणनीति, चीन-पाकिस्तान संबंध और क्षेत्रीय तनाव एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय बहस का केंद्र बन गए हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत को बेहद सतर्क और रणनीतिक तरीके से आगे बढ़ना होगा।