भारतीय मक्का की विदेशों में बढ़ी मांग

घरेलू बाजार में कमजोर कीमतों और पड़ोसी देशों से बढ़ती मांग के कारण भारत का मक्का निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की ओर बढ़ रहा है। अमेरिकी कृषि विभाग के स्थानीय कार्यालय ने वर्ष 2025-26 के लिए निर्यात अनुमान बढ़ाकर 24 लाख टन कर दिया है। बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका और वियतनाम जैसे देशों में भारतीय मक्का की मांग तेजी से बढ़ रही है।

भारतीय मक्का की विदेशों में बढ़ी मांग

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 25 जून 2026

भारतीय मक्का की वैश्विक मांग में उछाल

घरेलू बाजार में मक्का की कीमतें कमजोर रहने और पड़ोसी देशों से मांग बढ़ने के कारण भारत का मक्का निर्यात तेजी से बढ़ रहा है। अमेरिकी कृषि विभाग (यूएसडीए) के स्थानीय कार्यालय ने वर्ष 2025-26 के लिए भारत के मक्का निर्यात का अनुमान बढ़ाकर 24 लाख टन कर दिया है। इससे पहले यह अनुमान 10 लाख टन रखा गया था। प्रतिस्पर्धी कीमतों और बेहतर आपूर्ति के चलते भारतीय मक्का अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।

पांच महीनों में निर्यात तीन गुना बढ़ा

यूएसडीए की रिपोर्ट के अनुसार नवंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच भारत ने 9.96 लाख टन मक्का का निर्यात किया। यह पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में तीन गुना से अधिक है।रिपोर्ट में बताया गया है कि इस अवधि में औसतन हर महीने लगभग दो लाख टन मक्का की शिपमेंट दर्ज की गई, जो निर्यात क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि का संकेत है।

पड़ोसी देशों से मिल रहा बड़ा बाजार

भारतीय मक्का की सबसे अधिक मांग बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका, भूटान और वियतनाम जैसे देशों से आ रही है। कम परिवहन लागत, भौगोलिक निकटता और छोटी खेपों में आपूर्ति की सुविधा भारतीय निर्यातकों के लिए लाभदायक साबित हो रही है।यदि भारतीय मक्का अन्य निर्यातक देशों की तुलना में प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध रहता है तो आने वाले महीनों में भी निर्यात मजबूत बना रह सकता है।

आयात अनुमान में भी कमी

यूएसडीए ने मक्का आयात के अनुमान को भी घटाकर 50 हजार टन कर दिया है। इसका अर्थ है कि देश में उत्पादन और उपलब्धता की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है तथा घरेलू जरूरतों की पूर्ति के साथ निर्यात भी बढ़ रहा है।

अगले वर्ष धीमी पड़ सकती है रफ्तार

रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि मार्केटिंग वर्ष 2026-27 में निर्यात की गति कुछ धीमी हो सकती है। इसका प्रमुख कारण घरेलू मांग में लगातार वृद्धि और संभावित आपूर्ति दबाव माना जा रहा है।यूएसडीए ने अगले मार्केटिंग वर्ष के लिए मक्का निर्यात का अनुमान घटाकर 10 लाख टन रखा है, जबकि आयात एक लाख टन तक पहुंचने की संभावना जताई है।

बुवाई क्षेत्र में हुई बढ़ोतरी

कृषि मंत्रालय के अनुसार 19 जून 2026 तक देश में 5.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मक्का की बुवाई हो चुकी है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 5.34 लाख हेक्टेयर था।मॉनसून की धीमी शुरुआत के बावजूद किसानों ने मक्का की खेती में रुचि दिखाई है। पिछले खरीफ सीजन में रिकॉर्ड 98.61 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मक्का की खेती की गई थी।

रिकॉर्ड उत्पादन का अनुमान

वर्ष 2025-26 के तीसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार देश का मक्का उत्पादन बढ़कर रिकॉर्ड 5.5 करोड़ टन तक पहुंच सकता है। यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 27 प्रतिशत अधिक है।बेहतर मानसून, रिकॉर्ड बुवाई क्षेत्र और उच्च उत्पादकता को इस वृद्धि का प्रमुख कारण माना जा रहा है। इसके अलावा पिछले वर्षों में बेहतर कीमत मिलने से किसानों ने भी मक्का की खेती का रकबा बढ़ाया।

एमएसपी बढ़ा, लेकिन किसानों को नहीं मिल रही पूरी कीमत

सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य 10 रुपये बढ़ाकर 2410 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। हालांकि बाजार में किसानों को अभी भी एमएसपी से कम कीमत मिल रही है।मई 2026 में प्रमुख राज्यों में मक्का की औसत कीमत 17,950 रुपये से 21,000 रुपये प्रति टन के बीच रही। यह स्तर पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 14 प्रतिशत कम और एमएसपी के मुकाबले करीब 19 प्रतिशत नीचे रहा।

किसानों और निर्यातकों के लिए मिश्रित संकेत

एक ओर निर्यात बढ़ने से भारतीय कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार में नई पहचान मिल रही है, वहीं दूसरी ओर घरेलू बाजार में कम कीमतें किसानों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं।यदि निर्यात मांग मजबूत बनी रहती है और वैश्विक बाजार में भारतीय मक्का प्रतिस्पर्धी बना रहता है, तो आने वाले समय में किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ सकती है। साथ ही बढ़ता निर्यात कृषि क्षेत्र की आय और देश की विदेशी मुद्रा कमाई में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।