झांसी में मेयर ने किया ECI बचाव, राहुल को घेरा:प्रेस कांफ्रेंस में छह पन्नों का नोट लेकर पहुंचे मेयर बिहारी लाल, बोले-कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बना रही

Sep 28, 2026 - 19:21
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झांसी में मेयर ने किया ECI बचाव, राहुल को घेरा:प्रेस कांफ्रेंस में छह पन्नों का नोट लेकर पहुंचे मेयर बिहारी लाल, बोले-कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बना रही
झांसी में मेयर बिहारी लाल आर्य और जिला पंचायत अध्यक्ष पवन गौतम ने संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग जैसी स्वतन्त्र संस्था पर आरोप लगाकर कांग्रेस और राहुल गांधी देश को कमजोर करना चाहते हैं। कहा कि सुप्रीम कोर्ट भी SIR की वैधता को लेकर स्पष्ट कर चुका है कि उसमें कोई खामी नहीं है। भाजपा कार्यालय में दोपहर तीन बजे से पहले पार्टी के पदाधिकारियों की बैठक हुई। इसके बाद मेयर बिहारी लाल आर्य और जिला पंचायत अध्यक्ष पवन गौतम ने भाजपा कार्यालय में शाम चार बजे प्रेस कांफ्रेंस की। वह अपने साथ 6 पन्नों में रिकॉर्ड लिखकर लाए थे। मेयर ने कहा कि देश का लोकतंत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों में न केवल मजबूत हुआ है बल्कि विश्व में भारत की साख भी मजबूत हुई है। यही कांग्रेस और विपक्षी दलों को बर्दाश्त नहीं हो रहा। बोले चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संस्था है और कांग्रेस उस पर हमला कर देश का लोकतंत्र कमजोर करना चाहती है। कहा कि हम देश की संवैधानिक संस्था को बचाने के लिए खड़े हैं। कांग्रेस एक-एककर किए हमले - कांग्रेस को अपनी राजनीतिक और संगठनात्मक कमजोरियों पर आत्ममंथन करना चाहिए। प्रशासनिक एवं संवैधानिक विषयों को राजनीतिक ढाल बनाकर जनता के बीच भ्रम पैदा करने से कांग्रेस की समस्याओं का समाधान नहीं होगा। - लगातार मिल रही हार से बौखलाई कांग्रेस अपनी राजनीतिक नाकामियों को छिपाने के लिए बार-बार देश की संवैधानिक संस्थाओं पर हमला कर रही है। लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का सम्मान करने के बजाय कांग्रेस और उसके नेता जनादेश का अनादर करने की अपनी पुरानी आदत से बाज नहीं आ रहे हैं। - कांग्रेस के तमाम बड़े नेता जान चुके हैं कि संवैधानिक व्यवस्था एवं लोकतान्त्रिक प्रक्रिया में वे अब जनता का विश्वास पुनः हासिल नहीं कर सकते हैं। यही वजह है कि वे पूरे जनतांत्रिक सिस्टम पर भ्रम एवं झूठ फैलाकर, उन्हें ध्वस्त करना चाहते हैं। - इसी रणनीति के तहत वे संवैधानिक संस्थाओं पर अनर्गल हमला करते हैं। कांग्रेस जब भी चुनाव हारती है, तब-तब वह चुनाव आयोग और लोकतांत्रिक संस्थाओं को बदनाम करने की साजिश रचती है। अपनी जमीनी विफलता से जनता का ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के झूठे और बेबुनियाद बयान दिए जाते हैं। - चुनाव आयोग के संयुक्त बयान से कांग्रेस और विपक्षी इंडी गठबंधन के झूठ का पर्दाफाश- भ्रम और मनगढ़ंत कहानियों की राजनीति पूरी तरह ध्वस्त हुई है। - चुनाव आयोग की बैठक और संयुक्त प्रेस नोट से दूध का दूध और पानी का पानी हुआ, कांग्रेस व विपक्ष सिर्फ और सिर्फ झूठ, सनसनी और भ्रम फैलाने का काम कर रहा है। कांग्रेस का झूठ बेनकाब हो गया। - तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए एसआईआर समेत सभी फैसले, निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाना विपक्ष की हताशा का प्रतीक । - कैबिनेट सेक्रेटरी को लिखा पत्र किसी नीतिगत विषय या एसआईआर से संबंधित नहीं था एक अखबार की रिपोर्ट कोरी कल्पना पर आधारित गढ़ी गई कहानी साबित हुई। - फॉर्म-6 के घोषणापत्र को माननीय सर्वोच्च न्यायालय पहले ही वैध ठहरा चुका है विपक्ष की संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने की साजिश फिर नाकाम हुई है। - कांग्रेस अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट और अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार सवाल उठाकर उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रही है। - चुनाव आयोग की स्पष्टता के बाद कांग्रेस के आरोपों की वास्तविकता सामने आ गई है। ऐसे में कांग्रेस को संवैधानिक संस्थाओं पर बेबुनियाद आरोप लगाने के बजाय तथ्यों का सम्मान करना चाहिए। - जब भी विपक्ष जनता की अदालत में पराजित होता है वह अपनी खीझ और हताशा निकालने के लिए संवैधानिक संस्थाओं पर झूठे आरोप मढ़ने लगता है। निर्वाचन आयोग पर स्पष्ट और कड़े वक्तव्य ने विपक्ष के सभी और दुर्भावनापूर्ण प्रोपेगेंडा की हवा निकाल दी है। चुनाव आयोग के दावे पेश किए सर्वसम्मति से हुए सभी फैस थे, विपक्ष का मतभेद का दावा पूरी तरह झूठा- मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों (डॉ. एस. एस. संधू एवं विवेक जोशी) की 26 सितंबर को बैठक हुई और उसके बाद एक जॉइंट प्रेस स्टेटमेंट चुनाव आयोग की और से जारी किया गया है जिसमें यह स्पष्ट कर दिया गया है कि देशभर में संचालित स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) सहित सभी प्रमुख निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं। 24 जून 2025 का मूल आदेश हो, या विभिन्न चरणों (12) राज्यों केन्द्रशासित प्रदेशों व 19 राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों) की समय-सारणी, सभी निर्णय पूरे आयोग की पूर्ण सहमति से लिए गए हैं। इतना ही नहीं, माननीय सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 को इस प्रक्रिया को कानूनी रूप से वैध ठहराया है। इसके बावजूद विपक्ष चुनाव आयोग की निष्पक्षता और प्रक्रियाओं पर झूठा कीचड़ उछालने का घिनौना काम कर रहा था। कैबिनेट सेक्रेटरी को भेजे गए पत्र पर विपक्ष का झूठ बेनकाब-विपक्ष द्वारा एक तथाकथित पत्र को लेकर जो भ्रम फैलाया जा रहा था, आयोग ने साफ कर दिया है कि केबिनेट सेक्रेटरी को लिखा गया पत्र आयोग की किसी नीति या आईटी प्रभाग से संबंधित नहीं था बल्कि यह प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) पर आए एक अधिकारी के प्रशासनिक कार्यप्रणाली तक सीमित आंतरिक मामला था। न तो यह निर्णय आयोग के किसी नीतिगत विषय के खिलाफ था और न ही एक एसआईआर से जुड़ा हुआ था। अंग्रेजी दैनिक की स्टोरी, तथ्यहीन और काल्पनिक कहानी- एक अंग्रेजी दैनिक में प्रकाशित रिपोर्ट पूरी तरह से निराधार और काल्पनिक कहानी प्रतीत होती है। उस रिपोर्ट में न तो कोई ठोस तथ्य था और न ही सच्चाई। विपक्ष ने एक काल्पनिक और तथ्यहीन लेख को हथियार बनाकर देश के लोकतंत्र और स्वतंत्र चुनाव आयोग पर सवाल उठाने की नाकाम कोशिश की, अब पूरी तरह से बेनकाब हो चुका है। फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई है मुहर-विपक्ष लगातार फॉर्म-6 को लेकर जनता में भ्रांति पैदा करने का षड्यंत्र रच रहा था। चुनाव आयोग ने दो टूक कहा है कि एसआईआर के लिए फॉर्म 6 से संत घोषणापत्र को माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्ण सही व वैध ठहराया है। गैर-एस-आईआर अवधि के लिए नियमों (रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टसे रूल्स 1960) के तहत पूर्ववत फॉर्म ही लागू है किसी भी प्रक्रिया में कोई हेरफेर नहीं किया गया है। हर पात्र नागरिक को मताधिकार देने के लिए आयोग कटिबद्ध-विपक्ष केवल अफवाहें फैलाता है, जबकि आयोग जमीनी स्तर पर हर मतदाता की भागीदारी सुनिक्षित कर रहा है चाहे वह रैन बसेरों, मजदूरों और बेघरों के लिए विशेष कैंप लगाना हो या छूटे हुए लोगों के घरों पर जाकर बीएलओं द्वारा फॉर्म एकत्र करना हो। देश की जनता भली-भांति जानती है कि जितने भी राज्यों में चुनाव संपन्न हुए हैं, वे पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र रूप से संपन्न हुए हैं। कांग्रेस और उसके सहयोगी दल जब चुनाव हारते हैं, तो कभी ईवीएम पर, कभी संवैधानिक संस्थाओं पर तो कभी चुनाव आयोग पर झूठे आरोप लगाते हैं। चुनाव आयोग के इस पूर्ण और सर्वसम्मत बयान के बाद कांग्रेस नेतृत्व को देश और संवैधानिक संस्थाओं से बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए। राहुल गांधी और इंडी ठगबंधन के सदस्य बार-बार संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम- - लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान और उसके बाद एलन मस्क के एक बयान का हवाला देते हुए राहुल गांधी ने ईवीएम को भारतीय लोकतंत्र के लिए ब्लैक बाक्स दिया था। उन्होंने दावा किया कि संस्थागत पारदर्शिता की कमी है, जबकि चुनाव बार-बार ईवीएम की सुरक्षा और विश्वसनीयता को प्रमाणित कर चुके हैं। चुनावी प्रक्रिया और आयोग की निष्पक्षता पर सवाल राहुल गांधी राहुल गांधी ने कई बार आरोप लगाया कि चुनाव आयोग सत्ताधारी दल के दबाव में काम कर रहा है और यह एक कठपुतली बन चुका है। लेकिन हर बार राहुल गाँधी के झूठ को न्याय की अदालत ने खारिज किया है। ये हर बार झूठे आरोप लगाकर भाग जाते हैं। चौकीदार चोर है पर सुप्रीम कोर्ट की अवमानना साल 2019 में राफेल मामले में सुप्रीम कोर्ट के एक तकनीकी आदेश को तोड़-मरोड़ कर राहुल गांधी ने मीडिया के सामने दावा किया था कि सुप्रीम कोर्ट ने भी मान लिया है कि चौकीदार चोर है। इस मामले में अदालत द्वारा अवमानना नोटिस जारी किए जाने के बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बिना शर्त माफी मांगनी पड़ी थी। विदेशी मंचों पर न्यायपालिका पर दबाव का आरोप ब्रिटेन (कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय, 2023) और अमेरिका के दौरों के दौरान राहुल गांधी ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कहा कि भारत में सुप्रीम कोर्ट और न्यायपालिका स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर पा रही है और उस पर सरकार का कड़ा नियंत्रण है। इसे देश की न्यायिक संप्रभुता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमजोर करने के प्रयास के रूप में देखा गया। राफेल सौदे पर कैग की रिपोर्ट खारिज करना जब सीएजी ने राफेल विमान सौदे की ऑडिट रिपोर्ट संसद में पेश कर खरीद प्रक्रिया और कीमतों को संप्रभु दृष्टिकोण से सही ठहराया, तब राहुल गांधी ने सीएजी की रिपोर्ट को ही खारिज करते हुए उसे चौकीदार ऑडिटर जनरल कहकर संस्था का उपहास उड़ाया था। 'खून की दलाली' वाला बयान उरी हमले के बाद भारतीय सेना द्वारा सीमा पार की गई ऐतिहासिक सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा था कि सरकार 'जवानों के खून की दलाली' कर रही है, जिसे सेना के शौर्य का अपमान माना गया। बालाकोट एयर स्ट्राइक पर सवाल पुलवामा हमले के बाद भारतीय वायुसेना द्वारा पाकिस्तान के बालाकोट में की गई एयर स्ट्राइक के सबूत मांगने और वायुसेना के दावों पर सवाल उठाने के आरोप लगे। तवांग झड़प और 'पिटाई' वाला बयान अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई झड़प के बाद राहुल गांधी ने बयान दिया था कि चीन के सैनिक हमारे जवानों को पीट रहे हैं। सेना और सरकार दोनों ने इस बयान की कड़े शब्दों में निंदा की थी। राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी को देश की संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक लाभ के लिए निशाना बनाना बंद कर जनता से इस झूठे प्रचार के लिए माफी मांगनी चाहिए।

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