'मैक्स ने खोला ब्लाइंड मर्डर, कैसर ने पकड़ा बारूद:झांसी RPF के DOG MEET में पहुंचे 70 डॉग, आज हुनर दिखाएंगे
झांसी पहुंचे अजमेर RPF के डॉग 'मैक्स' ने पहले लाश खोजी, फिर सीधे कातिल के घर जा पहुंचा। हैदराबाद की कैसर ने ट्रेन में 36 किलो बारूद सूंघकर बड़े खतरे को टालने में मदद की। ऐसे ही जांबाज डॉग शुक्रवार से झांसी में शुरू हो रहे 19वें आरपीएफ डॉग शो में अपना दम दिखाएंगे। रेलवे के विभिन्न जोन से पहुंचे 70 से ज्यादा डॉग अपराधियों के सुराग खोजने से लेकर तस्करी पकड़ने तक के अपने हुनर का प्रदर्शन करेंगे। पहले 3 तस्वीर देखिए… छिपा खतरा भी उनकी नजर से नहीं बचता रेलवे सुरक्षा बल के 19वें ऑल इंडिया रेलवे डॉग ड्यूटी मीट का आयोजन 23 से 27 अक्टूबर तक झांसी आरपीएफ रिजर्व लाइन में किया जा रहा है। इसमें भारतीय रेल के विभिन्न जोन से जर्मन शेफर्ड, लैब्राडोर, बेल्जियन और डाबरमैन नस्ल के डॉग अपने हैंडलर के साथ पहुंचे हैं। किसी के पास अपराधियों के ठिकाने तक पहुंचने की महारत है, तो कोई गांजा, शराब और दूसरी प्रतिबंधित वस्तुओं को सूंघकर पहचान लेता है। कुछ डॉग विस्फोटकों का पता लगाने में इतने माहिर हैं कि इंसानी आंखों से छिपा खतरा भी उनकी नजर से नहीं बचता। गुरुवार को शो से पहले आरपीएफ ग्राउंड पर डॉग के साथ उनके हैंडलर ने रिहर्सल किया। डॉग्स ने परेड में हिस्सा लिया और मंच के सामने से गुजरते हुए मुख्य अतिथि को सलामी दी। पांच दिन चलने वाले इस आयोजन में उनकी अलग-अलग क्षमताओं का प्रदर्शन होगा। मैक्स पांच मिनट में खोज निकाली लाश और कातिल अजमेर डिवीजन का जर्मन शेफर्ड मैक्स रेलवे सुरक्षा बल के सबसे भरोसेमंद ट्रैकर डॉग्स में शामिल है। करीब छह महीने पहले राजस्थान के किशनगढ़ स्थित गांधीनगर इलाके में एक युवक लापता हो गया था। युवक का कोई सुराग नहीं मिल रहा था। मामला ऐसा था कि पुलिस के सामने युवक को खोजने के साथ उसकी गुमशुदगी के पीछे का सच पता लगाने की चुनौती थी। ऐसे में ट्रैकर डॉग मैक्स की मदद ली गई। मैक्स को जिम्मेदारी सौंपी गई तो उसने देर नहीं लगाई। हैंडलर के मुताबिक, मैक्स लापता युवक के कपड़ों से उसकी गंध पहचानी और फिर घर से दो किलोमीटर दूर झाड़ियों की तरफ दौड़ पड़ा। पहले वह लाश के पास पहुंचा, फिर यहीं से एक किलोमीटर दूर बने मकान में मौजूद युवक तक पहुंच गया। यानी पुलिस के सामने एक साथ दो सवाल थे-लाश कहां है और कातिल कौन है? मैक्स ने पांच मिनट में दोनों का रास्ता दिखा दिया। उसके दिए सुराग से आरोपी तक पहुंचने में मदद मिली। यही वजह है कि मैक्स को ट्रैकिंग के मामले में बेहद भरोसेमंद माना जाता है। जयपुर का 'लियो', मिनटों पर पता कर लेता है मादक पदार्थ जयपुर आरपीएफ डिवीजन का डाबरमैन लियो तस्करों के लिए किसी मुसीबत से कम नहीं है। इसकी खासियत है कि यह धातुओं और मादक पदार्थों को सूंघकर पहचान सकता है। हैंडलर मुकेश कुमार के मुताबिक, लियो के लिए संदिग्ध सामान का पता लगाना चंद मिनटों का काम है। डेढ़ साल पहले ट्रेन से तस्करी कर ले जाई जा रही करीब 45 लाख रुपये की चांदी बरामद कराने में उसने अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा करीब तीन लाख रुपये कीमत का गांजा और हजारों लीटर शराब पकड़वाने में भी वह मदद कर चुका है। ट्रेन और रेलवे परिसर में तस्करी के सामान को छिपाकर ले जाने वालों के लिए लियो की मौजूदगी किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। 'कैसर' ने सूंघा 36 किलो बारूद, सीट के नीचे से खींच लाया बोरा हैदराबाद डिवीजन का लैब्राडोर 'कैसर' की कहानी यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ी है। उसके हैंडलर नरेश सिंह के मुताबिक, करीब चार साल पहले कैसर ने ट्रेन में सीट के नीचे रखे एक बोरे को सूंघकर उसमें संदिग्ध सामग्री होने का संकेत दिया। कैसर बोरे को खींचकर बाहर ले आया। जब उसकी जांच की गई तो उसमें 36 किलो बारूद मिला। ट्रेन में इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक का मौजूद होना गंभीर खतरा बन सकता था। कैसर की सतर्कता से समय रहते इसका पता चल गया। इस उपलब्धि के लिए उसे सम्मानित भी किया गया था। कैसर की यही खूबी उसे रेलवे के सबसे महत्वपूर्ण एक्सप्लोसिव डॉग्स में शामिल करती है। बिहार चुनाव में शेरू ने तस्करों की राह रोकी गोरखपुर डिवीजन का जर्मन शेफर्ड 'शेरू' भी अपने काम में उस्ताद है। उसके हैंडलर कन्हैया लाल बताते हैं कि शेरू सूंघकर मादक पदार्थों का पता लगाने में माहिर है। बिहार चुनाव के दौरान शराब और मादक पदार्थों की सप्लाई करने वाले तीन आरोपियों को पकड़ने में शेरू ने अहम भूमिका निभाई थी। आरोपियों के पास से लाखों रुपये कीमत की शराब बरामद हुई थी। इसके अलावा रेलवे स्टेशन और ट्रेनों में गांजा तस्करी के मामलों का पता लगाने में भी शेरू मदद कर चुका है। जहां तस्कर सामान छिपाकर निकलने की कोशिश करते हैं, वहां शेरू की सूंघने की क्षमता उनकी चाल पर पानी फेर देती है। 70 से ज्यादा डॉग, 150 हैंडलर; पांच दिन चलेगा मुकाबला झांसी आरपीएफ रिजर्व लाइन में आयोजित इस डॉग ड्यूटी मीट में विभिन्न रेल जोन से 70 से ज्यादा डॉग और करीब 150 हैंडलर व अन्य स्टाफ हिस्सा ले रहे हैं। मंडल के वरिष्ठ रेल सुरक्षा आयुक्त जितेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि 23 से 27 अक्टूबर तक चलने वाले इस आयोजन में ट्रैकिंग, नारकोटिक्स और एक्सप्लोसिव डॉग अपनी कार्यक्षमता का प्रदर्शन करेंगे। इस दौरान उनकी ट्रेनिंग, अनुशासन, सूंघने की क्षमता और सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियों को निभाने के कौशल को परखा जाएगा। इन डॉग्स के लिए यह सिर्फ परेड या प्रदर्शन नहीं, बल्कि उस हुनर को दिखाने का मौका है, जिसके दम पर वे कभी कातिल तक पहुंचने का रास्ता दिखाते हैं, कभी तस्करी का सामान पकड़वाते हैं और कभी सैकड़ों यात्रियों की जिंदगी को खतरे से बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं। फिलहाल इस क्षेत्र में पिछली मीट का चैंपियन सेंट्रल रेलवे है।
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