इश्क के लिए घर छोड़ रहीं छात्राएं, छूट रहे परिवार:अलीगढ़ में 98% केस प्रेम प्रसंग के; इंस्टाग्राम पर दोस्ती, फिर घर से भागने का फैसला

Oct 23, 2026 - 07:07
0
इश्क के लिए घर छोड़ रहीं छात्राएं, छूट रहे परिवार:अलीगढ़ में 98% केस प्रेम प्रसंग के; इंस्टाग्राम पर दोस्ती, फिर घर से भागने का फैसला
इंस्टाग्राम पर दोस्ती हुई, बातचीत बढ़ी, प्यार के वादे हुए और फिर घर छोड़ने का फैसला। किसी को प्रेमी के बुलावे पर घर से निकलने की जल्दी है, तो कोई परिवार की पाबंदियों, डांट-फटकार और भावनात्मक दबाव से दूर अपनी दुनिया बसाने निकल पड़ती है। पीछे छूट जाते हैं परेशान माता-पिता, थानों के चक्कर काटते परिवार और तलाश में जुटी पुलिस। अलीगढ़ में छात्राओं के घर छोड़ कर भागने के मामले गंभीर बन रहे हैं। SSP नीरज जादौन के मुताबिक, ऐसे मामलों में करीब 98% का संबंध प्रेम प्रसंग से सामने आता है। मनोवैज्ञानिक काउंसलर और वन स्टॉप सेंटर की काउंसलिंग में भी सोशल मीडिया की दोस्ती, पारिवारिक तनाव और भावनात्मक जुड़ाव की तस्वीर सामने आ रही है। पिछले साल 993 लड़कियां घर छोड़ कर भागीं साल 2025 में अलीगढ़ जिले में सोशल मीडिया पर दोस्ती और प्रेम प्रसंग के चलते 993 लड़कियों के घर छोड़ने का मामला सामने आया था। इनमें करीब 918 की बरामदगी की गई थी। ग्रामीण क्षेत्रों में शहर के मुकाबले लगभग दोगुने मामले सामने आए थे। वहीं, इस साल 2026 में 15 अक्टूबर तक उपलब्ध पुलिस आंकड़ों के अनुसार, नाबालिगों से जुड़े 655 और बालिगों से संबंधित 707 मुकदमे दर्ज बताए गए हैं। श्रेणीवार विवरण में 560 नाबालिग बालिकाओं में से 479 की और 637 बालिग महिलाओं में 518 की बरामदगी दर्ज है। केस-1: प्रेमी नहीं पहुंचा, रास्ता भटकी तो युवकों ने घेरा करीब एक सप्ताह पहले सिविल लाइंस इलाके के एक डॉक्टर परिवार की लगभग 15 साल की बेटी रात करीब नौ बजे घर छोड़कर निकल गई। वह उस जगह पहुंची, जहां प्रेमी ने उसे बुलाया था, लेकिन प्रेमी वहां नहीं पहुंचा। रास्ता भटकने के बाद करीब 15-20 अज्ञात युवकों ने मदद के नाम पर उसे रोक लिया। आरोप है कि वे घर पहुंचाने के बहाने उसे परेशान करने लगे। इसी दौरान एक महिला ने हस्तक्षेप कर किशोरी को बचाया और उसके परिवार को सूचना दी। पूछताछ में सामने आया कि किशोरी पिछले कई महीनों से एक लड़के के संपर्क में थी। उसे शिकायत थी कि मां उसके रिश्ते का समर्थन नहीं करतीं और अक्सर डांटती हैं। इसी नाराजगी और प्रेम प्रसंग के चलते वह घर से निकली थी। बाद में उसे परिवार के पास पहुंचाया गया। यह मामला बताता है कि भावनाओं में लिया गया एक फैसला किशोरी को अनजान लोगों के बीच असुरक्षित स्थिति में भी पहुंचा सकता है। केस-2: परिवार को बेहोश कर प्रेमी के साथ चली गई पुराने शहर का करीब पांच महीने पुराना एक मामला भी परिवारों के लिए चेतावनी है। यहां एक लड़की ने कथित तौर पर स्प्रे से परिवार के सदस्यों को बेहोश किया और घर से निकल गई। वह करीब 10 से 15 दिन तक प्रेमी के साथ रही। बाद में परिवार उसे वापस ले आया। फिलहाल वह परिवार के साथ रह रही है। इस मामले में भी प्रेम प्रसंग के चलते परिवार से दूरी बनाने का पहलू सामने आया। केस-3: इंस्टाग्राम पर पांच महीने की दोस्ती, फिर घर छोड़ा इसी महीने सासनी गेट क्षेत्र की करीब 15-16 वर्षीय इंटर की छात्रा घर से चली गई। छात्रा के मुताबिक, इंस्टाग्राम पर उसकी एक लड़के से करीब पांच महीने पहले दोस्ती हुई थी। धीरे-धीरे बातचीत बढ़ी और वह उसके साथ चली गई। पुलिस ने करीब एक सप्ताह तक प्रयास कर उसे बरामद किया। बताया गया कि इस दौरान वह अपनी मर्जी से लड़के के साथ रही थी। बरामदगी के बाद उसे परिवार के सुपुर्द कर दिया गया। केस-4: इंटरकास्ट प्रेम प्रसंग पर विरोध, दोनों घर से निकले रोरावर क्षेत्र का इसी महीने का एक अन्य मामला भी सामने आया। यहां करीब 17-18 वर्षीय लड़की का दूसरे समुदाय के युवक से प्रेम प्रसंग था। परिवार को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने विरोध किया। इसके बाद दोनों घर से चले गए। पुलिस की मदद से उन्हें बरामद किया गया। लड़की को वन स्टॉप सेंटर में रखा गया, जहां काउंसलिंग के बाद उसे परिवार के सुपुर्द कर दिया गया। मनोवैज्ञानिक बोलीं- पाबंदियां और तानों से परेशान लड़कियां ऐसा कर रहीं शहर की प्रख्यात मनोवैज्ञानिक काउंसलर डॉ. पूनम बत्रा के मुताबिक, मेरे पास भी इस तरह के मामले लगातार आ रहे हैं। कम उम्र की लड़कियां इंस्टाग्राम और फेसबुक के जरिए दोस्ती करती हैं। ऑनलाइन बातचीत बढ़ने के बाद वे कई बार बाहरी व्यक्ति पर भावनात्मक रूप से निर्भर हो जाती हैं। फिर घर छोड़ने का बड़ा फैसला कर लेती हैं। घर में लगाई जाने वाली पाबंदियां, डांट-फटकार, ताने और कभी-कभी होने वाला दबाव या टॉर्चर किशोरियों को भावनात्मक रूप से कमजोर कर सकता है। वन स्टॉप सेंटर में काउंसिलिंग, बालिगों को अपनी मर्जी से जाने का अधिकार जिला प्रशासन के वन स्टॉप सेंटर की इंचार्ज सीमा अब्बास ने कहा- बालिग और नाबालिग, दोनों में प्रेम प्रसंग से जुड़े मामले सामने आ रहे हैं। बरामद होने वाली लड़कियों को सेंटर में रखकर दो से तीन दिन तक उनकी काउंसलिंग की जाती है। इस दौरान कई मामलों में प्रेम संबंध, पारिवारिक विरोध और घर में होने वाले विवादों की बातें सामने आती हैं। नाबालिग लड़की को उसकी इच्छा के आधार पर सीधे किसी के साथ नहीं भेजा जा सकता। उसकी सुरक्षा और कानूनी प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की जाती है। उसे परिवार के सुपुर्द किया जाता है। सवाल सिर्फ घर छोड़ने का नहीं, वजह समझने का भी है सोशल मीडिया ने दोस्ती और रिश्ते बनाने के तरीके बदल दिए हैं। किशोरावस्था में भावनाएं तेजी से बदलती हैं, लेकिन हर ऑनलाइन रिश्ता भरोसे के लायक नहीं होता। अनजान व्यक्ति के वादे, निजी जानकारी साझा करना और बिना पूरी पहचान जाने उससे मिलने जाना जोखिम बढ़ा सकता है। दूसरी ओर, घर में लगातार डांट, अविश्वास और संवाद की कमी भी बच्चों को परिवार से दूर कर सकती है। ऐसे मामलों में परिवारों को बच्चों की गतिविधियों के प्रति सजग रहने के साथ उनकी बात सुनने और भरोसा कायम रखने की जरूरत है। पुलिस को भी हर मामले की परिस्थितियों की जांच करनी होगी, क्योंकि नाबालिग के घर छोड़ने को महज प्रेम प्रसंग मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सवाल यही है कि बेटियां घर छोड़ने का फैसला क्यों कर रही हैं और उन्हें ऐसे कदम से पहले सुरक्षित विकल्प और भरोसे का माहौल क्यों नहीं मिल पा रहा। इसका जवाब केवल पुलिस की बरामदगी में नहीं, बल्कि परिवार और समाज की जिम्मेदारी समझने में भी छिपा है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User