ममता बनर्जी को बड़ा झटका! राज्यसभा सदस्य ने छोड़ी पार्टी और पद

तृणमूल कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक झटका देते हुए राज्यसभा सदस्य शुखेंदु शेखर रॉय ने सदस्यता और पार्टी दोनों से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने पार्टी में भ्रष्टाचार और आंतरिक हालात पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके इस कदम से पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई हलचल तेज हो गई है।

ममता बनर्जी को बड़ा झटका! राज्यसभा सदस्य ने छोड़ी पार्टी और पद

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 8 जून 2026

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य शुखेंदु शेखर रॉय ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के साथ-साथ पार्टी भी छोड़ दी है। उनके इस फैसले को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। लंबे समय तक पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे रॉय के अचानक अलग होने से राज्य और राष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह इस्तीफा केवल एक सांसद के पद छोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पार्टी के भीतर चल रही असंतुष्टि और मतभेद भी उजागर हुए हैं। ऐसे समय में जब विपक्षी राजनीति नए समीकरणों की तलाश में है, यह घटनाक्रम तृणमूल कांग्रेस के लिए चिंता का विषय बन सकता है।


राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा देकर बढ़ाई सियासी हलचल

शुखेंदु शेखर रॉय ने राज्यसभा के सभापति और देश के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन को अपना इस्तीफा सौंप दिया। इसके साथ ही उन्होंने तृणमूल कांग्रेस से भी अलग होने की घोषणा कर दी। उनके इस कदम ने राष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।रॉय ने अपने इस्तीफे के बाद कई गंभीर मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर भ्रष्टाचार और संगठनात्मक समस्याओं को लेकर आवाज उठाने के बाद उन्हें लगातार उपेक्षा का सामना करना पड़ा। उनका कहना है कि पार्टी में अपनी बात रखने वाले नेताओं के लिए अब पहले जैसी जगह नहीं बची है।


भ्रष्टाचार के मुद्दे पर पार्टी नेतृत्व को घेरा

इस्तीफे के बाद शुखेंदु शेखर रॉय ने पश्चिम बंगाल में कथित भ्रष्टाचार को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मांग की कि पिछले पांच वर्षों में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में हुए विकास कार्यों और सरकारी खर्चों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।रॉय का कहना है कि जनता के बीच कई मुद्दों को लेकर असंतोष लंबे समय से मौजूद था। उन्होंने आरोप लगाया कि इन शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया और इसी कारण जनता का भरोसा कमजोर हुआ। उनके बयान ने राज्य की राजनीति में भ्रष्टाचार के मुद्दे को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है।


विपक्षी गठबंधन के भविष्य पर भी उठाए सवाल

शुखेंदु शेखर रॉय ने विपक्षी दलों के महागठबंधन को लेकर भी अपनी राय स्पष्ट रूप से रखी। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में इस गठबंधन का भविष्य मजबूत दिखाई नहीं देता। उनके अनुसार विभिन्न दलों के बीच विचारधारा और नेतृत्व को लेकर मतभेद लगातार बढ़ रहे हैं।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विपक्षी खेमे से जुड़े एक वरिष्ठ नेता का ऐसा बयान आगामी चुनावी रणनीतियों पर असर डाल सकता है। इससे विपक्षी एकता को लेकर भी नए सवाल खड़े हो गए हैं।


तृणमूल कांग्रेस में लंबे समय तक निभाई अहम भूमिका

शुखेंदु शेखर रॉय वर्ष 2011 में तृणमूल कांग्रेस से जुड़े थे और उसके बाद पार्टी के प्रमुख नेताओं में गिने जाने लगे। संगठनात्मक मामलों से लेकर संसद तक, उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उन्हें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी नेताओं में भी माना जाता था।पार्टी के राजनीतिक संघर्ष और चुनावी अभियानों में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही। ऐसे में उनका इस्तीफा केवल एक औपचारिक राजनीतिक फैसला नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे तृणमूल कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण नुकसान के रूप में देखा जा रहा है।


क्या बदल रहे हैं पश्चिम बंगाल के राजनीतिक समीकरण

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। कुछ समय से पार्टी के भीतर असंतोष और नेताओं की नाराजगी की खबरें सामने आती रही हैं। ऐसे में एक वरिष्ठ नेता का पार्टी छोड़ना इन अटकलों को और मजबूत कर रहा है। यदि आने वाले समय में अन्य नेता भी इसी तरह के कदम उठाते हैं तो इसका असर पार्टी की संगठनात्मक मजबूती पर पड़ सकता है। साथ ही विपक्षी दलों को भी इसका राजनीतिक लाभ मिलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।


नए राजनीतिक सफर की अटकलें तेज

इस्तीफे के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि शुखेंदु शेखर रॉय जल्द किसी नए राजनीतिक दल के साथ दिखाई दे सकते हैं। हाल के दिनों में उन्होंने कुछ ऐसे बयान दिए हैं जिन्हें कई राजनीतिक पर्यवेक्षक नए राजनीतिक संकेत के रूप में देख रहे हैं।हालांकि उन्होंने अभी तक अपने अगले राजनीतिक कदम को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन उनके भविष्य को लेकर अटकलों का दौर लगातार जारी है। आने वाले दिनों में उनका निर्णय पश्चिम बंगाल की राजनीति को नई दिशा दे सकता है।