मिर्जापुर में पांच दिवसीय कजरी महोत्सव शुरू:रिमझिम बारिश के बीच गूंजे सुर, वाराणसी, गोरखपुर समेत चार जिलों में भी होगा कार्यक्रम
मिर्जापुर में पांच दिवसीय कजरी महोत्सव गुरुवार को शुरू हो गया। सिटी क्लब सभागार में रिमझिम बारिश के बीच कजरी के सुर गूंजे। यह महोत्सव प्रदेश के पांच जिलों में कजरी की पारंपरिक विधा को मंच देगा। कार्यक्रम का उद्घाटन पद्मश्री उर्मिला श्रीवास्तव, संस्कार भारती काशी प्रांत के अध्यक्ष डॉ. गणेश प्रसाद अवस्थी, उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान के निदेशक अतुल द्विवेदी और जिला सूचना अधिकारी ओम प्रकाश उपाध्याय ने मिलकर किया। महोत्सव में प्रयागराज की आश्रया द्विवेदी, मिर्जापुर की रानी सिंह, लखनऊ की रंजना रचिता मिश्रा के साथ मिर्जापुर की सूफिया बेगम, फगुनी देवी और कल्पना गुप्ता ने प्रस्तुति दी। इन कलाकारों ने मिर्जापुरी अखाड़े में गाई जाने वाली पारंपरिक कजरी पेश की। उनकी गायकी श्रोताओं को बहुत पसंद आई। निदेशक अतुल द्विवेदी ने बताया कि कजरी गायन मिर्जापुर की मिट्टी और लोकजीवन से जुड़ी बहुत पुरानी परंपरा है। पहले यह सिर्फ एक खास इलाके तक सीमित थी, लेकिन आज देश-विदेश में भी कजरी गाई और सुनी जा रही है। उन्होंने कहा कि इस लोकविधा को बचाकर अगली पीढ़ी तक पहुंचाना हम सबकी जिम्मेदारी है। तीन तस्वीरें उन्होंने यह भी बताया कि कजरी सिर्फ गीत नहीं है, बल्कि इससे जुड़ी दंगल की भी परंपरा रही है। गुरु घरानों को 'अखाड़ा' कहा जाता था। इस विधा में गायन के साथ नृत्य भी शामिल रहा है। जिला प्रशासन और उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान मिलकर इस महोत्सव का आयोजन कर रहे हैं। इसके तहत 25 सितंबर को अस्सी घाट वाराणसी, 26 को आजमगढ़, 27 को मुरादाबाद और 28 सितंबर को गोरखपुर में भी कजरी महोत्सव के कार्यक्रम होंगे। इसका मकसद पारंपरिक लोकगीतों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और लोक संस्कृति को बचाना है। कजरी गायिका उर्मिला श्रीवास्तव ने कलाकारों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया। संचालन शिवराम शर्मा ने किया। इस मौके पर सहयोगी संजय श्रीवास्तव समेत तमाम श्रोता मौजूद रहे।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)