ऑर्गेनिक कपास किसान संकट में

भारत ऑर्गेनिक कपास उत्पादन में दुनिया में पहले स्थान पर है, लेकिन लंबी सर्टिफिकेशन प्रक्रिया, कम उत्पादकता, बढ़ती लागत और प्रीमियम मूल्य नहीं मिलने के कारण किसान आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर बीज, आसान नियम और मजबूत बाजार व्यवस्था से स्थिति सुधर सकती है।

ऑर्गेनिक कपास किसान संकट में

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 16 जून 2026

ऑर्गेनिक कपास उत्पादन में अव्वल भारत

भारत ऑर्गेनिक कपास उत्पादन में विश्व का अग्रणी देश है। इसके बावजूद इस क्षेत्र से जुड़े किसानों को कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। लंबी सर्टिफिकेशन प्रक्रिया, कम उत्पादकता और उचित मूल्य नहीं मिलने से किसानों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है।

सर्टिफिकेशन प्रक्रिया बनी बड़ी चुनौती

ऑर्गेनिक कपास की खेती करने वाले किसानों को प्रमाणन प्राप्त करने के लिए तीन से पांच वर्षों तक इंतजार करना पड़ता है। इस दौरान खेतों का निरीक्षण और फसल की निगरानी की जाती है। प्रक्रिया लंबी और जटिल होने के कारण कई किसान बीच में ही परेशान हो जाते हैं। जागरूकता की कमी के चलते कई बार किसान अनजाने में रासायनिक खाद या कीटनाशकों का उपयोग कर लेते हैं। इससे ऑर्गेनिक मानकों का उल्लंघन हो जाता है और प्रमाणन रद्द होने का खतरा बढ़ जाता है।

कम पैदावार से बढ़ रही परेशानी

ऑर्गेनिक खेती अपनाने वाले किसानों को पारंपरिक खेती की तुलना में कम उत्पादन मिलता है। भारत में ऑर्गेनिक कपास की औसत उत्पादकता लगभग 508 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है, जबकि तुर्की में यह आंकड़ा 1687 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक पहुंचता है। कम उत्पादन के साथ यदि बाजार में प्रीमियम मूल्य भी नहीं मिले तो किसानों को दोहरा नुकसान उठाना पड़ता है।

श्रम लागत और इनपुट की समस्या

ऑर्गेनिक खेती में खरपतवार नियंत्रण, फसल देखभाल और कपास की तुड़ाई जैसे कार्यों में अधिक मानवीय श्रम की आवश्यकता होती है। मजदूरों की कमी और बढ़ती मजदूरी किसानों की लागत को और बढ़ा देती है। इसके अलावा जैविक कीटनाशकों और अन्य ऑर्गेनिक इनपुट की उपलब्धता भी सीमित है। कई जैविक उत्पाद रासायनिक विकल्पों की तुलना में कम प्रभावी साबित होते हैं।

बेहतर व्यवस्था की जरूरत

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि ऑर्गेनिक कपास क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए बेहतर बीज, मजबूत सप्लाई चेन, आसान सर्टिफिकेशन प्रक्रिया और किसानों को उचित मूल्य सुनिश्चित करना जरूरी है। यदि सरकार और संबंधित एजेंसियां इन चुनौतियों का समाधान करती हैं तो भारत न केवल उत्पादन में बल्कि किसानों की आय बढ़ाने के मामले में भी वैश्विक उदाहरण बन सकता है। ऑर्गेनिक कपास की संभावनाएं व्यापक हैं, लेकिन इसके लिए किसानों को तकनीकी और आर्थिक दोनों स्तरों पर मजबूत समर्थन की आवश्यकता होगी।