8वां वेतन आयोग: भुवनेश्वर बैठक में कर्मचारियों की सैलरी पर बड़ी चर्चा
ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में 8वें वेतन आयोग की दो दिवसीय बैठक शुरू हो गई है। इस बैठक में कर्मचारी संगठनों, पेंशनभोगी संघों और अन्य हितधारकों से सुझाव लिए जा रहे हैं। बैठक में मूल वेतन, फिटमेंट फैक्टर, महंगाई भत्ता, पेंशन और अन्य सेवा शर्तों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
दि राइजिंग न्यूज़ | भुवनेश्वर | 6 जुलाई 2026
केंद्र सरकार द्वारा गठित 8वें वेतन आयोग की दो दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक सोमवार से ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में शुरू हो गई। यह बैठक 6 और 7 जुलाई तक चलेगी, जिसके बाद आयोग का अगला पड़ाव कोलकाता होगा, जहां 9 और 10 जुलाई को हितधारकों के साथ चर्चा की जाएगी। आयोग का उद्देश्य देशभर के केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और कर्मचारी संगठनों से सुझाव लेकर अपनी अंतिम सिफारिशों को अधिक व्यापक और व्यवहारिक बनाना है।यह बैठक ऐसे समय आयोजित की जा रही है, जब आयोग के लिए लिखित ज्ञापन जमा करने की समय-सीमा पहले ही समाप्त हो चुकी है। अब आयोग का पूरा ध्यान विभिन्न राज्यों में जाकर कर्मचारियों, पेंशनभोगी संगठनों और अन्य संबंधित पक्षों से सीधे संवाद स्थापित करने पर है। माना जा रहा है कि इन बैठकों में मिले सुझाव आयोग की अंतिम रिपोर्ट तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, जिसका प्रभाव देश के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों पर पड़ेगा।
भुवनेश्वर बैठक में किन मुद्दों पर हो रही चर्चा
भुवनेश्वर में आयोजित इस बैठक में कर्मचारियों के वेतन ढांचे और सेवा शर्तों से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। आयोग विभिन्न कर्मचारी संगठनों और पेंशनभोगी संघों की मांगों और सुझावों को विस्तार से सुन रहा है, ताकि भविष्य की सिफारिशों में कर्मचारियों की वास्तविक आवश्यकताओं को शामिल किया जा सके। इस प्रक्रिया के जरिए आयोग सभी पक्षों की राय लेकर संतुलित रिपोर्ट तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है।बैठक में न्यूनतम मूल वेतन, फिटमेंट फैक्टर, महंगाई भत्ता, विभिन्न प्रकार के भत्ते, पदोन्नति व्यवस्था, सेवा शर्तों में सुधार, पेंशन व्यवस्था और सेवानिवृत्ति से जुड़े कई अन्य मुद्दों पर चर्चा की जा रही है। आयोग का प्रयास है कि सभी सुझावों का विस्तृत अध्ययन कर ऐसी सिफारिशें तैयार की जाएं, जो वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों और कर्मचारियों की अपेक्षाओं के अनुरूप हों।
कर्मचारी संगठनों की प्रमुख मांगें क्या हैं
कर्मचारी संगठनों की सबसे बड़ी मांग फिटमेंट फैक्टर में बढ़ोतरी को लेकर है। वर्तमान में लागू 2.57 फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाकर 2.86 अथवा 3.83 किए जाने की मांग की जा रही है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि फिटमेंट फैक्टर बढ़ाया जाता है तो उनके मूल वेतन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिससे बढ़ती महंगाई के बीच आर्थिक राहत मिल सकेगी।इसके साथ ही कर्मचारी संगठन वर्तमान 18 हजार रुपये के न्यूनतम मूल वेतन को बढ़ाकर 41 हजार रुपये अथवा 69 हजार रुपये प्रतिमाह किए जाने की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि वर्तमान वेतन संरचना महंगाई और जीवन-यापन की वास्तविक लागत के अनुरूप नहीं है। इसलिए नए वेतन आयोग में न्यूनतम वेतन को व्यावहारिक स्तर तक बढ़ाया जाना आवश्यक है।
पेंशन व्यवस्था को लेकर भी उठ रही हैं मांगें
वेतन वृद्धि के साथ-साथ पेंशन व्यवस्था भी इस समय प्रमुख मुद्दा बनी हुई है। कर्मचारी संगठनों की मांग है कि सेवानिवृत्ति के समय प्राप्त अंतिम वेतन का 67 प्रतिशत हिस्सा पेंशन के रूप में दिया जाए। वहीं पारिवारिक पेंशन को अंतिम वेतन के 50 प्रतिशत के बराबर निर्धारित करने की भी मांग की जा रही है, ताकि पेंशनभोगियों और उनके परिवारों को बेहतर आर्थिक सुरक्षा मिल सके।इसके अलावा कई कर्मचारी संगठन पुरानी पेंशन योजना को दोबारा लागू करने की मांग पर भी कायम हैं। उनका कहना है कि नई पेंशन व्यवस्था और एकीकृत पेंशन योजना उनकी अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरती। हालांकि आयोग ने अभी तक इन मांगों पर किसी प्रकार का आधिकारिक संकेत या प्रस्ताव सार्वजनिक नहीं किया है।
लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नजर आयोग की रिपोर्ट पर
आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों का सीधा प्रभाव देशभर के लगभग 55 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और करीब 69 लाख पेंशनभोगियों पर पड़ने वाला है। यही कारण है कि आयोग की प्रत्येक बैठक और उससे जुड़ी गतिविधियों पर कर्मचारी संगठनों के साथ-साथ पेंशनभोगियों की भी लगातार नजर बनी हुई है। आयोग द्वारा तैयार की जाने वाली अंतिम रिपोर्ट भविष्य के वेतन, भत्तों और पेंशन व्यवस्था की दिशा तय करेगी।भुवनेश्वर के बाद आयोग कोलकाता में भी विभिन्न संगठनों और हितधारकों से सुझाव प्राप्त करेगा। इसके बाद सभी बैठकों से मिले सुझावों का विश्लेषण कर अंतिम सिफारिशें तैयार की जाएंगी, जिन्हें केंद्र सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। सरकार द्वारा इन सिफारिशों पर अंतिम निर्णय लिए जाने के बाद ही नए वेतनमान और पेंशन से जुड़े बदलाव लागू होने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।