'पढ़े-लिखों' के चुनाव में प्रधानी जैसा गदर:25 शहरों में हंगामा-मारपीट; MLC चुनाव 2027 का सेमीफाइनल क्यों?
हमेशा शांति से निपट जाने वाला MLC चुनाव इस बार खासा हंगामेदार रहा। वोटिंग के दिन वाराणसी, गोरखपुर, आगरा, बरेली और मुजफ्फरनगर समेत करीब 25 शहरों में हंगामा और मारपीट हुई। MLC चुनावों के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ। आखिर शिक्षक जैसे पढ़े-लिखे वर्ग के इस चुनाव में राजनीति इतनी हावी क्यों रही? इसी की वजह जानेंगे आज यूपी एक्सप्लेनर में… सवाल 1: इस बार शिक्षक-स्नातक चुनाव में मारपीट क्यों हुई, राजनीति इतनी हावी कैसे? जवाब: इसकी कई वजहें दिखती हैं… सवाल 2: गोरखपुर और वाराणसी सीटें भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल क्यों बनीं? जवाब: साफ नजर आने वाली वजह है कि ये सीटें सीएम योगी और पीएम मोदी के इलाकों की हैं। यहां हुई किसी भी तरह की चूक सीधे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर सवाल खड़ा करेगी। इसके अलावा कुछ और वजहें भी हैं… सवाल 3: MLC चुनाव को 2027 का सेमीफाइनल क्यों माना जा रहा है? जवाब: इसकी 3 बड़ी वजहें दिखती हैं… I) पढ़े-लिखे लोगों का रुझान पता चलेगा: शिक्षक और स्नातक वोटर को समाज का सबसे जागरूक और ओपिनियन मेकर (माहौल बनाने वाला) वर्ग माना जाता है। यह वर्ग सरकारी नीतियों और प्रशासनिक कार्यप्रणाली का सीधा आकलन करता है। 2027 के आम चुनाव से ठीक पहले इस वर्ग का वोटिंग पैटर्न यह दिखाएगा कि प्रदेश का यह तबका किस राजनीतिक धारा के साथ बह रहा है। II) सपा-भाजपा का आक्रामक आमना-सामना: 2024 लोकसभा चुनाव के बाद यह पहला मौका है, जब भाजपा और सपा आमने-सामने हैं। भाजपा के लिए खुद सीएम योगी ने खुद मोर्चा संभाला। वहीं, सपा ने अपने कैडर को बूथों पर आक्रामक रूप से तैनात किया। दोनों दलों ने इसे प्रतिष्ठा का सवाल बनाकर 2027 की चुनावी मशीनरी को सक्रिय कर दिया। III) जमीनी और बूथ स्तर के संगठन का टेस्ट: MLC सीटों का दायरा काफी बड़ा होता है। एक-एक सीट कई जिलों में फैली होती है। इतने बड़े क्षेत्र में अपने वोटरों का रजिस्ट्रेशन कराना, उन्हें बूथ तक लाना और हर बूथ पर मजबूती से टिके रहना, दोनों पार्टियों के संगठनात्मक कैडर की क्षमता का असली टेस्ट है। हालांकि, यह ध्यान रखना चाहिए कि चुनाव में एक बहुत बड़ी आबादी जैसे ग्रामीण वोटर, किसान, मजदूर, गैर-स्नातक युवा और महिलाएं शामिल नहीं होती हैं। इस चुनाव में उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि, उसकी जाति और स्नातक और टीचरों के बीच उसकी पहुंच पार्टी से इतर बड़ा रोल निभाती है। इसलिए, MLC चुनाव की हार-जीत का 2027 विधानसभा चुनाव पर हूबहू असर पड़े, ऐसा जरूरी नहीं है। फिर भी 27 अक्टूबर को आने वाले नतीजों से यूपी की राजनीति को कुछ इशारे जरूर मिलेंगे… अगर भाजपा जीती अगर सपा जीती -------------------------------------------- यह एक्सप्लेनर भी पढ़ें… राहुल-अखिलेश जोड़ी की काट निकालने लखनऊ आ रहे अमित शाह, सीट बंटवारा बड़ी चुनौती विधानसभा चुनावों को लेकर अमित शाह की एक सेट रणनीति रही है। वे चुनाव से 4 से 6 महीने पहले एक्टिव होते हैं और भाजपा के खिलाफ चल रही हवा को पलटकर रख देते हैं। यूपी विधानसभा चुनाव में करीब 4 महीने बाकी हैं। राहुल-अखिलेश की जोड़ी ने इस चुनाव को मुश्किल बना दिया है। अब अमित शाह 30-31 अक्टूबर को लखनऊ आ रहे हैं। तो अमित शाह इस जोड़ी का तोड़ कैसे खोजेंगे? पढ़िए यूपी एक्सप्लेनर में…
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