पीओके में विद्रोह भड़का पाकिस्तान पर गंभीर आरोप

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में जारी विरोध प्रदर्शनों को लेकर सामने आए एक कथित गोपनीय दस्तावेज ने पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट में 26 लोगों की मौत, मानवाधिकार उल्लंघन, संचार सेवाओं पर रोक और बड़े पैमाने पर सुरक्षा बलों की तैनाती का दावा किया गया है।

पीओके में विद्रोह भड़का पाकिस्तान पर गंभीर आरोप

दि राइजिंग न्यूज़ | मुजफ्फराबाद | 10 जून 2026

पीओके में विरोध प्रदर्शन पर बड़ा खुलासा

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में जारी विरोध प्रदर्शनों को लेकर सामने आए एक कथित गोपनीय दस्तावेज ने पाकिस्तान सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इंडिया टुडे को मिले इस दस्तावेज में दावा किया गया है कि 5 जून से 9 जून के बीच सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 26 लोगों की मौत हुई। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मृतकों में सात गर्भवती महिलाएं शामिल थीं। इन दावों ने मानवाधिकारों और नागरिक स्वतंत्रताओं को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है।

महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ उभरा आंदोलन

रिपोर्ट के अनुसार जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी से जुड़े प्रदर्शनकारी लंबे समय से बढ़ती महंगाई बेरोजगारी और आर्थिक बदहाली के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि क्षेत्र के लोगों को बेहतर सुविधाएं और अधिकार दिए जाएं। आंदोलन धीरे धीरे व्यापक जनसमर्थन हासिल करता गया और कई शहरों तक फैल गया।

सुरक्षा अभियान में बल प्रयोग के आरोप

कथित दस्तावेज में आरोप लगाया गया है कि आंदोलन को दबाने के लिए सुरक्षा बलों ने व्यापक स्तर पर बल प्रयोग किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि निहत्थे प्रदर्शनकारियों और मृतकों के जनाजों में शामिल लोगों तक पर गोलीबारी की गई। हालात को नियंत्रित करने के नाम पर जरूरत से अधिक बल प्रयोग किए जाने के आरोप लगाए गए हैं।

चौदह हजार अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों की तैनाती

दस्तावेज में दावा किया गया है कि स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए लगभग 14 हजार अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों को क्षेत्र में तैनात किया गया। सुरक्षा बलों की बढ़ी मौजूदगी के बाद कई इलाकों में तनाव और अधिक बढ़ गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस कार्रवाई के दौरान आम नागरिकों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा।

इंटरनेट और संचार सेवाओं पर रोक

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि कार्रवाई से जुड़े वीडियो और तस्वीरें बाहर न जा सकें इसके लिए इंटरनेट और अन्य संचार सेवाओं को बंद कर दिया गया। आलोचकों का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य घटनाओं के दस्तावेजीकरण को रोकना था। हालांकि पाकिस्तान सरकार ने इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

आंदोलन से जुड़े नेताओं को बनाया गया निशाना

दस्तावेज में आरोप लगाया गया है कि आंदोलन से जुड़े कई प्रमुख नेताओं को निशाना बनाया गया। कुछ नेताओं के मारे जाने के भी दावे किए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है लेकिन रिपोर्ट में इन्हें गंभीर चिंता का विषय बताया गया है।

पाकिस्तान का पक्ष

दूसरी ओर पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा कार्रवाई तब शुरू हुई जब आंदोलन से जुड़े कुछ लोगों ने हथियारों और पेट्रोल बमों का इस्तेमाल करते हुए गुरिल्ला शैली में हमले किए। अधिकारियों के अनुसार कानून व्यवस्था बनाए रखने और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई आवश्यक थी।

भारत ने पाकिस्तान को घेरा

भारत ने पाकिस्तान पर मानवाधिकार उल्लंघनों से ध्यान भटकाने के लिए फर्जी खबरें और भ्रामक वीडियो फैलाने का आरोप लगाया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान अपनी प्रशासनिक विफलताओं और मानवाधिकार संबंधी आरोपों को छिपाने के लिए दुष्प्रचार का सहारा ले रहा है। उन्होंने कहा कि पीओके में पुलिस की बर्बरता और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की खबरें सामने आई हैं। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान को कथित गलत कार्यों के लिए जवाबदेह ठहराने की मांग भी की है।

इंटरनेट बंद होने के बाद भी जारी प्रदर्शन

मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित किए जाने के बावजूद मीरपुर मुजफ्फराबाद गिलगित बाल्टिस्तान दादियाल रावलकोट सुधनोती और तत्तापानी समेत कई क्षेत्रों में प्रदर्शन जारी हैं। प्रदर्शनकारी समूह आंदोलन को और व्यापक बनाने की तैयारी कर रहे हैं जबकि प्रशासन ने लंबे मार्च को रोकने की चेतावनी दी है।

लंदन तक पहुंचा विरोध

पीओके के मुद्दे की गूंज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुनाई दे रही है। लंदन में पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर प्रदर्शनकारियों ने आजादी और राजनीतिक अधिकारों के समर्थन में नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान सरकार की नीतियों का विरोध करते हुए वैश्विक संस्थाओं से हस्तक्षेप की मांग की। रिपोर्ट के अनुसार लगभग 30 ब्रिटिश सांसदों ने भी ब्रिटेन सरकार को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप करने और स्थिति पर ध्यान देने की अपील की है। इससे यह मुद्दा अब केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बनता जा रहा है।