ईरान-अमेरिका तनाव के बीच शेयर बाजार में सतर्कता, सेंसेक्स-निफ्टी की सुस्त शुरुआत
ईरान पर अमेरिकी हमलों के बाद वैश्विक बाजारों में बढ़ी अनिश्चितता का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया। बुधवार को सेंसेक्स मामूली बढ़त के साथ खुला, जबकि निफ्टी दबाव में रहा। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 10 जून 2026
भारतीय शेयर बाजार में बुधवार सुबह कारोबार की शुरुआत बेहद सतर्क माहौल में हुई। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद वैश्विक निवेशकों के बीच अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। इसी वजह से घरेलू निवेशकों ने भी शुरुआती सत्र में संभलकर कारोबार करना उचित समझा। बाजार में सीमित खरीदारी और चुनिंदा क्षेत्रों में तेजी के बावजूद समग्र रुख कमजोर दिखाई दिया।कारोबार की शुरुआत में बंबई शेयर बाजार का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 69 अंकों की मामूली बढ़त के साथ 73,988.27 के स्तर पर पहुंच गया। दूसरी ओर राष्ट्रीय शेयर बाजार का प्रमुख सूचकांक निफ्टी 8 अंकों की हल्की गिरावट के साथ 23,233 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। वैश्विक परिस्थितियों के कारण निवेशकों का भरोसा पूरी तरह मजबूत नहीं दिखा, जिसका असर शुरुआती कारोबार में साफ नजर आया।
पश्चिम एशिया संकट का बाजार पर असर
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी सेना द्वारा ईरान पर नए हमलों के बाद भू-राजनीतिक जोखिमों में इजाफा हुआ है। निवेशकों को आशंका है कि यदि यह तनाव और बढ़ता है तो वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति तथा आर्थिक गतिविधियों पर व्यापक असर पड़ सकता है।पश्चिम एशिया में किसी भी प्रकार का संघर्ष सीधे तौर पर ऊर्जा बाजार को प्रभावित करता है। भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए यह स्थिति विशेष चिंता का विषय बन सकती है। इसी कारण विदेशी निवेशक जोखिम वाले निवेशों से दूरी बनाते हुए सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।
बैंकिंग और ऊर्जा क्षेत्र के शेयरों में मजबूती
शुरुआती कारोबार के दौरान बैंकिंग और ऊर्जा क्षेत्र के कुछ प्रमुख शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। बाजार विश्लेषकों के अनुसार मजबूत निवेश सलाह और बेहतर कारोबारी संभावनाओं के चलते बैंकिंग क्षेत्र में निवेशकों की रुचि बनी हुई है। इससे इस क्षेत्र के प्रमुख शेयरों को समर्थन मिला।वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में दोबारा आई तेजी का लाभ तेल उत्पादन से जुड़ी कंपनियों को मिला। ऊर्जा क्षेत्र के कई शेयर बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। निवेशकों को उम्मीद है कि ऊंची कीमतों का लाभ इन कंपनियों की आय और मुनाफे पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
सूचना प्रौद्योगिकी और रंग-रसायन क्षेत्र पर दबाव
वैश्विक स्तर पर प्रौद्योगिकी क्षेत्र के शेयरों में हुई बिकवाली का असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों के शेयर दबाव में कारोबार करते दिखाई दिए। विदेशी बाजारों में कमजोर मांग और निवेशकों की सतर्कता के कारण इस क्षेत्र में बिकवाली बढ़ी।इसके अलावा रंग-रसायन और निर्माण सामग्री से जुड़े क्षेत्रों में भी कमजोरी दर्ज की गई। निवेशकों ने जोखिम कम करने के उद्देश्य से इन क्षेत्रों में मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी। परिणामस्वरूप कई प्रमुख कंपनियों के शेयर लाल निशान में कारोबार करते नजर आए।
एशियाई बाजारों में छाया निराशा का माहौल
बुधवार को अधिकांश एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा और कई प्रमुख सूचकांक दबाव में आ गए। क्षेत्रीय बाजारों में व्यापक बिकवाली का असर देखने को मिला।दक्षिण कोरिया का प्रमुख सूचकांक सबसे अधिक कमजोरी के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। जापान के प्रमुख सूचकांकों में भी गिरावट दर्ज की गई, जबकि हांगकांग का बाजार भी लाल निशान में रहा। छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों के शेयरों में भी निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया।
अमेरिकी बाजारों में भी दिखी कमजोरी
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अमेरिकी वित्तीय बाजारों पर भी पड़ा है। प्रमुख वायदा सूचकांकों में गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह संकेत मिला कि निवेशक संभावित जोखिमों को लेकर चिंतित हैं। बाजार में अस्थिरता बढ़ने के कारण निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्पों को प्राथमिकता दी।पिछले कारोबारी सत्र में अमेरिकी बाजार मिश्रित रुख के साथ बंद हुए। कुछ प्रमुख सूचकांकों में गिरावट दर्ज की गई जबकि एक प्रमुख औद्योगिक सूचकांक सीमित बढ़त के साथ बंद होने में सफल रहा। हालांकि समग्र रूप से निवेशकों की चिंता और अनिश्चितता बाजार की दिशा पर हावी रही।
कच्चे तेल की कीमतों में फिर लौटी तेजी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिली है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के कारण तेल बाजार में खरीदारी बढ़ी है। निवेशकों को डर है कि यदि स्थिति और बिगड़ती है तो आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है।तेल की कीमतों में यह बढ़ोतरी ऐसे समय आई है जब एक दिन पहले भारी गिरावट दर्ज की गई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के कारण ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति पर बाजार की नजरें टिकी रहेंगी।
मजबूत हुआ अमेरिकी डॉलर
वैश्विक अनिश्चितता के माहौल में अमेरिकी मुद्रा को सुरक्षित निवेश विकल्प माना जा रहा है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय निवेशकों ने डॉलर में खरीदारी बढ़ाई है, जिसके चलते उसकी मजबूती बनी हुई है। संकट के समय आमतौर पर निवेशक जोखिम वाले निवेशों से दूरी बनाकर सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर रुख करते हैं। पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो डॉलर की मजबूती और बढ़ सकती है। इसका असर उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर पड़ सकता है तथा विदेशी निवेश प्रवाह भी प्रभावित हो सकता है। भारतीय बाजार के लिए भी यह स्थिति निकट भविष्य में महत्वपूर्ण बनी रहेगी।
निवेशकों के लिए आगे क्या
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी। ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव तथा विदेशी निवेशकों की गतिविधियां बाजार की चाल तय कर सकती हैं।फिलहाल निवेशकों को सतर्क रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अनिश्चित परिस्थितियों में मजबूत मूलभूत आधार वाली कंपनियों पर ध्यान देना अधिक सुरक्षित हो सकता है। जब तक वैश्विक हालात स्पष्ट नहीं होते, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहने की संभावना बनी हुई है।