पुतिन बोले- भारत ने कभी विदेशी फरमान नहीं माना

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की खुलकर सराहना करते हुए कहा है कि भारत ने कभी भी विदेश से आए किसी आदेश या दबाव को स्वीकार नहीं किया। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका की ओर से भारत और रूस के व्यापारिक संबंधों को लेकर लगातार दबाव बनाए जाने की चर्चाएं हैं। पुतिन ने साथ ही यह भी दावा किया कि रूस को वैश्विक स्तर पर अलग-थलग करने की पश्चिमी कोशिशें पूरी तरह विफल रही हैं।

पुतिन बोले- भारत ने कभी विदेशी फरमान नहीं माना

दि राइजिंग न्यूज़। मॉस्को। 06 जून 2026

भारत की स्वतंत्र नीति की तारीफ

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की खुलकर सराहना करते हुए कहा है कि भारत ने कभी भी विदेश से आए किसी आदेश या दबाव को स्वीकार नहीं किया। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका की ओर से भारत और रूस के व्यापारिक संबंधों को लेकर लगातार दबाव बनाए जाने की चर्चाएं हैं। पुतिन ने साथ ही यह भी दावा किया कि रूस को वैश्विक स्तर पर अलग-थलग करने की पश्चिमी कोशिशें पूरी तरह विफल रही हैं। रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में आयोजित सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम (SPIEF-2026) में बोलते हुए राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत और चीन जैसे देशों की संप्रभु निर्णय क्षमता की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारत ऐसा देश है जिसने कभी भी अपनी सीमाओं के बाहर से मिले आदेशों का पालन नहीं किया और हमेशा अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। पुतिन का यह बयान उस समय सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत पर रूस के साथ व्यापारिक संबंधों को सीमित करने का दबाव बना रहे हैं। रूस के राष्ट्रपति के इस बयान को अमेरिका और पश्चिमी देशों के लिए एक स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

एसपीआईईएफ-2026 में भारत की भूमिका पर चर्चा

SPIEF-2026 रूस का सबसे बड़ा वार्षिक आर्थिक सम्मेलन माना जाता है। इस वर्ष सम्मेलन में दुनिया के 130 देशों से लगभग 20 हजार प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। कार्यक्रम के दौरान पुतिन ने भारत को वैश्विक सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र का प्रमुख खिलाड़ी बताया और कहा कि भारत आज विश्व अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा अपनी विदेश नीति को स्वतंत्र रखा है और किसी भी वैश्विक शक्ति के दबाव में आकर निर्णय नहीं लिए हैं। यही कारण है कि भारत आज दुनिया के सबसे सम्मानित देशों में शामिल है।

रूस को अलग-थलग करने की कोशिशें विफल

सम्मेलन के दौरान जब पुतिन से रूस को आर्थिक रूप से अलग-थलग किए जाने को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि पश्चिमी देशों की यह रणनीति सफल नहीं हो सकी। पुतिन ने कहा कि रूस आज भी दुनिया के अनेक देशों के साथ मजबूत आर्थिक, व्यापारिक और रणनीतिक संबंध बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि एक मजबूत और संप्रभु देश को पूरी तरह अलग-थलग नहीं किया जा सकता। रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि रूस लगातार अपने विदेशी साझेदारों के साथ सहयोग बढ़ा रहा है और विभिन्न सीमा-पार परियोजनाओं पर काम जारी है। उन्होंने सड़क, रेलवे और ऊर्जा क्षेत्र में चल रही योजनाओं का भी उल्लेख किया।

पश्चिमी प्रतिबंधों पर पुतिन का जवाब

यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका और यूरोप के कई देशों ने रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे। इसके बावजूद पुतिन का दावा है कि रूस की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। उन्होंने कहा कि पिछली अमेरिकी सरकार ने रूस को अलग-थलग करने की नीति शुरू की थी, जिसका बाद में कई यूरोपीय देशों ने समर्थन किया। लेकिन यह रणनीति पूरी तरह असफल साबित हुई। पुतिन ने कहा कि कई पश्चिमी कंपनियां और देश सार्वजनिक रूप से रूस से दूरी बनाने की बात करते हैं, लेकिन व्यावहारिक स्तर पर आर्थिक सहयोग अभी भी जारी है।

ऊर्जा और यूरेनियम व्यापार का दिया उदाहरण

रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि तनाव के बावजूद ऊर्जा क्षेत्र सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अमेरिका और रूस के बीच व्यापार जारी रहा है। उन्होंने अमेरिका को यूरेनियम निर्यात का उदाहरण देते हुए कहा कि जब आर्थिक हित जुड़े होते हैं तो सहयोग जारी रहता है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी लोग व्यावहारिक सोच रखते हैं और जहां उन्हें लाभ दिखाई देता है, वहां सहयोग जारी रखते हैं।

निवेशकों के लिए आकर्षक बना रहेगा रूस

पुतिन ने विश्वास जताया कि भविष्य में भी रूस वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षक बाजार बना रहेगा। उन्होंने कहा कि रूस अपने सहयोगी देशों, पड़ोसी राष्ट्रों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ मिलकर विकास की दिशा में आगे बढ़ता रहेगा। राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि रूस ने कभी खुद को दुनिया से अलग नहीं किया और आगे भी वैश्विक सहयोग के लिए अपने दरवाजे खुले रखेगा।