मंदाकिनी की लोकप्रियता से क्यों परेशान हुए राजीव कपूर
राजीव कपूर कपूर परिवार के ऐसे अभिनेता थे जिन्हें फिल्मी विरासत तो मिली, लेकिन वह अपने भाइयों जैसी सफलता हासिल नहीं कर सके। ‘राम तेरी गंगा मैली’ ने उन्हें पहचान दिलाई, मगर मंदाकिनी की जबरदस्त लोकप्रियता के कारण उन्हें लगा कि उनकी अपनी भूमिका पीछे रह गई। इसके बाद उन्होंने पिता राज कपूर से दूसरी फिल्म बनाने की जिद की, लेकिन उनकी इच्छा पूरी नहीं हुई और दोनों के रिश्तों में दूरी बढ़ गई।
दि राइजिंग न्यूज | नई दिल्ली | 25 अगस्त 2026
कपूर परिवार का हिंदी सिनेमा में लंबे समय से दबदबा रहा है। राज कपूर, शशि कपूर और ऋषि कपूर जैसे सितारों ने अभिनय और फिल्म निर्माण के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई। इसी परिवार के सबसे छोटे बेटे राजीव कपूर भी फिल्मों में आए, लेकिन उन्हें अपने भाइयों जैसी सफलता और लोकप्रियता नहीं मिल सकी। उनकी सबसे बड़ी पहचान वर्ष 1985 में आई फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ से बनी थी।राजीव कपूर का जन्म 25 अगस्त 1962 को मुंबई में हुआ था। वह राज कपूर और कृष्णा कपूर के सबसे छोटे बेटे तथा रणधीर कपूर और ऋषि कपूर के छोटे भाई थे। उन्होंने महज 21 वर्ष की उम्र में वर्ष 1983 में आई फिल्म ‘एक जान हैं हम’ से अभिनय की शुरुआत की थी। हालांकि शुरुआती फिल्मों से उन्हें वह सफलता नहीं मिली जिसकी उन्हें उम्मीद थी।
‘राम तेरी गंगा मैली’ से मिली बड़ी पहचान
राजीव कपूर के अभिनय जीवन की सबसे सफल फिल्मों में ‘राम तेरी गंगा मैली’ का नाम सबसे ऊपर आता है। वर्ष 1985 में प्रदर्शित इस फिल्म का निर्देशन उनके पिता राज कपूर ने किया था। फिल्म में राजीव कपूर के साथ मंदाकिनी मुख्य भूमिका में नजर आई थीं और यह फिल्म दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुई थी।फिल्म की सफलता के बाद राजीव कपूर को अभिनेता के तौर पर पहचान तो मिली, लेकिन मंदाकिनी की लोकप्रियता ने उन्हें पीछे छोड़ दिया। मंदाकिनी इस फिल्म के बाद रातोंरात बड़ी अभिनेत्री बन गई थीं और उनकी चर्चा हर तरफ होने लगी थी। राजीव कपूर को लगता था कि फिल्म की सफलता का सबसे बड़ा लाभ मंदाकिनी को मिला और उनकी अपनी पहचान उतनी मजबूत नहीं बन पाई।
मंदाकिनी की लोकप्रियता से क्यों परेशान थे राजीव कपूर
राजीव कपूर को यह महसूस होने लगा था कि ‘राम तेरी गंगा मैली’ में उनकी भूमिका मंदाकिनी की बढ़ती लोकप्रियता के सामने दब गई। फिल्म की कहानी, गीतों और मंदाकिनी के अभिनय को लेकर दर्शकों के बीच काफी चर्चा थी। राजीव कपूर को उम्मीद थी कि यह फिल्म उन्हें हिंदी सिनेमा में एक बड़े अभिनेता के रूप में स्थापित करेगी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।मंदाकिनी की लोकप्रियता देखकर राजीव कपूर ने अपने पिता से एक और फिल्म बनाने की इच्छा जताई। वह चाहते थे कि राज कपूर उन्हें मुख्य अभिनेता के रूप में लेकर नई फिल्म बनाएं, जिससे उन्हें अपनी अलग पहचान बनाने का अवसर मिल सके। हालांकि राज कपूर ने उनकी इस मांग को स्वीकार नहीं किया और दोनों के रिश्तों में दूरी बढ़ने की बात सामने आती है।
पिता राज कपूर से क्यों बिगड़े रिश्ते
‘राम तेरी गंगा मैली’ की सफलता के बाद राजीव कपूर अपने पिता राज कपूर के साथ एक और फिल्म करना चाहते थे। उन्होंने पिता से उन्हें मुख्य भूमिका में लेकर फिल्म बनाने का आग्रह किया था। लेकिन राज कपूर ने इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी, जिसके बाद दोनों के बीच मतभेद बढ़ने लगे।बताया जाता है कि पिता के इस फैसले से राजीव कपूर काफी नाराज हुए थे। दोनों के रिश्तों में आई यह दूरी आगे भी बनी रही। यहां तक कि राज कपूर के निधन के समय राजीव कपूर के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होने की बात भी कही जाती है, हालांकि इस घटना को लेकर अलग-अलग दावे मिलते हैं।
अभिनेता के साथ निर्देशक भी बने राजीव कपूर
राजीव कपूर ने अभिनय के अलावा फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भी अपनी किस्मत आजमाई। उन्होंने ‘लवर ब्वॉय’, ‘हम तो चले परदेस’, ‘नाग नागिन’ और ‘अंगारे’ जैसी फिल्मों में अभिनय किया। हालांकि उनके अभिनय जीवन में ‘राम तेरी गंगा मैली’ जैसी बड़ी सफलता दोबारा नहीं आई।वर्ष 1996 में राजीव कपूर ने फिल्म ‘प्रेम ग्रंथ’ का निर्देशन किया था। इस फिल्म में उनके बड़े भाई ऋषि कपूर और माधुरी दीक्षित मुख्य भूमिकाओं में थे। इसके अलावा वर्ष 1999 में आई फिल्म ‘आ अब लौट चलें’ से वह निर्माता के रूप में जुड़े थे, जिसमें ऐश्वर्या राय और अक्षय खन्ना मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे।
निजी जीवन भी नहीं रहा सफल
राजीव कपूर का निजी जीवन भी बहुत ज्यादा सफल नहीं रहा। वर्ष 2001 में उन्होंने आरती सभरवाल से विवाह किया था, लेकिन यह रिश्ता लंबे समय तक नहीं चल सका। विवाह के करीब दो वर्ष बाद वर्ष 2003 में दोनों अलग हो गए और उनका तलाक हो गया।तलाक के बाद राजीव कपूर ने दोबारा विवाह नहीं किया। फिल्मी परिवार से आने के बावजूद उनका निजी और पेशेवर जीवन उतना सफल नहीं रहा, जितनी उनसे उम्मीद की जाती थी। वह अपने भाइयों रणधीर कपूर और ऋषि कपूर की तरह लंबे समय तक बड़े पर्दे पर अपनी मजबूत पहचान कायम नहीं कर सके।
58 वर्ष की उम्र में हुआ निधन
राजीव कपूर का निधन 9 फरवरी 2021 को मुंबई में हुआ था। उस समय उनकी उम्र केवल 58 वर्ष थी। अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद परिवार के लोग उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन चिकित्सकों की कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।राजीव कपूर के निधन से कपूर परिवार और हिंदी सिनेमा जगत में शोक की लहर दौड़ गई थी। उन्होंने अभिनय, निर्देशन और निर्माण के क्षेत्र में काम किया, लेकिन उनके करियर की सबसे चर्चित पहचान आज भी ‘राम तेरी गंगा मैली’ से जुड़ी हुई है। उनके जीवन की कहानी कपूर परिवार की चमक-दमक के पीछे छिपे संघर्षों को भी सामने लाती है।
महत्वपूर्ण बिंदु
- राजीव कपूर का जन्म 25 अगस्त 1962 को मुंबई में हुआ था।
- उन्होंने वर्ष 1983 में फिल्म ‘एक जान हैं हम’ से अभिनय की शुरुआत की थी।
- वर्ष 1985 की ‘राम तेरी गंगा मैली’ उनके करियर की सबसे बड़ी सफल फिल्म रही।
- फिल्म की सफलता के बाद मंदाकिनी की लोकप्रियता बहुत तेजी से बढ़ी थी।
- राजीव कपूर चाहते थे कि उनके पिता राज कपूर उन्हें मुख्य भूमिका में लेकर दूसरी फिल्म बनाएं।
- राज कपूर के साथ मतभेद के बाद दोनों के रिश्तों में दूरी बढ़ने की बात कही जाती है।
- वर्ष 1996 में राजीव कपूर ने ‘प्रेम ग्रंथ’ का निर्देशन किया था।
- वर्ष 2001 में उनका विवाह आरती सभरवाल से हुआ और वर्ष 2003 में दोनों का तलाक हो गया।
- 9 फरवरी 2021 को 58 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया था।
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