राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर बढ़ी सियासत
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने करोड़ों रुपये के चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं। वहीं श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि नियमित ऑडिट में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता सामने नहीं आई है।
दि राइजिंग न्यूज़ | अयोध्या | 9 जून 2026
राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर छिड़ा बड़ा विवाद
अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले चढ़ावे और दान राशि को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। करोड़ों रुपये के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के आरोपों ने राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। विपक्षी दलों ने मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, जबकि ट्रस्ट ने सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। विवाद ऐसे समय सामने आया है जब राम मंदिर देश और दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है और प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
अखिलेश यादव ने उठाए गंभीर सवाल
विवाद की शुरुआत समाजवादी पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के एक सोशल मीडिया पोस्ट से हुई। उन्होंने दावा किया कि राम मंदिर के चढ़ावे की करोड़ों रुपये की राशि गायब पाई गई है। उन्होंने कहा कि यह मामला करोड़ों राम भक्तों की आस्था से जुड़ा हुआ है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने न्यायालय से स्वतः संज्ञान लेने की मांग भी की। अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट में सरकार की चुप्पी पर भी सवाल उठाए और पूरे मामले को गंभीर बताते हुए पारदर्शिता की आवश्यकता पर जोर दिया।
आम आदमी पार्टी ने भी लगाए आरोप
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय सिंह ने भी दान पात्रों की गिनती और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मंदिर में आने वाली दान राशि के हिसाब किताब को पूरी पारदर्शिता के साथ सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि किसी प्रकार की शंका की गुंजाइश न रहे। उनके बयान के बाद राजनीतिक विवाद और अधिक तेज हो गया।
पूर्व मंत्री ने जताई साढ़े सात करोड़ रुपये गायब होने की आशंका
उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री पवन पांडे ने दावा किया कि मंदिर में प्राप्त दान राशि में लगभग साढ़े सात करोड़ रुपये तक की गड़बड़ी हो सकती है। हालांकि उन्होंने इस संबंध में किसी आधिकारिक जांच रिपोर्ट का उल्लेख नहीं किया, लेकिन उनके बयान ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया।
चोरी और गिरफ्तारी की चर्चाओं ने बढ़ाया विवाद
कुछ मीडिया रिपोर्टों और स्थानीय चर्चाओं में यह दावा भी किया गया कि दान पात्र से धनराशि चोरी करने के आरोप में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है और कुछ नकदी भी बरामद की गई है। इन दावों के बाद सोशल मीडिया पर तरह तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं और विवाद और गहरा गया। हालांकि इन घटनाओं को लेकर आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
ट्रस्ट ने सभी आरोपों को बताया निराधार
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। ट्रस्ट का कहना है कि मंदिर में आने वाली प्रत्येक दान राशि का रिकॉर्ड रखा जाता है और समय समय पर उसका ऑडिट कराया जाता है। ट्रस्ट के अनुसार अब तक किसी भी जांच या ऑडिट में वित्तीय अनियमितता का कोई मामला सामने नहीं आया है।
महंत दिनेंद्रदास का बयान
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के न्यासी और निर्मोही अखाड़े के महंत दिनेंद्रदास ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने भगवान राम के धन के साथ किसी प्रकार की गलत हरकत की है तो उसे उसका परिणाम अवश्य भुगतना पड़ेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि सत्य सामने आएगा और किसी भी प्रकार की अनियमितता को छिपाया नहीं जा सकता।
चंपत राय ने दी आधिकारिक जानकारी
ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र का नियमित आंतरिक ऑडिट होता है। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में ट्रस्ट के प्रतिनिधियों के साथ भारतीय स्टेट बैंक के अधिकारी भी शामिल रहते हैं। ऑडिट का कार्य कई दिनों तक चलता है और वर्तमान में भी यह प्रक्रिया जारी है। चंपत राय ने कहा कि अब तक ऑडिट के दौरान कोई उल्लेखनीय वित्तीय अनियमितता सामने नहीं आई है।
कैसे होता है दान राशि का प्रबंधन
राम मंदिर में श्रद्धालु कई माध्यमों से दान करते हैं। इनमें दान पात्र, ऑनलाइन दान, बैंक ट्रांसफर, चेक, ड्राफ्ट और विशेष अनुदान शामिल हैं। मंदिर परिसर में स्थापित दान पात्रों को निर्धारित सुरक्षा व्यवस्था के बीच खोला जाता है। इसके बाद राशि की गिनती की जाती है और बैंक में जमा कराई जाती है। पूरी प्रक्रिया में सुरक्षा एजेंसियों, बैंक प्रतिनिधियों और ट्रस्ट अधिकारियों की निगरानी रहती है।
करोड़ों की आय का बड़ा केंद्र बना मंदिर
राम मंदिर के उद्घाटन के बाद से देश और विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ी है। इसके साथ ही मंदिर को मिलने वाले दान में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। विशेष अवसरों, त्योहारों और धार्मिक आयोजनों के दौरान करोड़ों रुपये का चढ़ावा प्राप्त होता है। यही कारण है कि मंदिर की आय और उसके प्रबंधन को लेकर लोगों की विशेष रुचि बनी रहती है।
पारदर्शिता पर उठ रहे सवाल
विपक्षी दलों का कहना है कि मंदिर की आय और व्यय का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि किसी प्रकार की आशंका समाप्त हो सके। वहीं ट्रस्ट का कहना है कि सभी वित्तीय प्रक्रियाएं नियमों के अनुसार संचालित की जा रही हैं और नियमित ऑडिट के माध्यम से पारदर्शिता सुनिश्चित की जाती है।
जांच और ऑडिट पर टिकी नजर
फिलहाल पूरा विवाद आरोप और जवाबी आरोपों के बीच केंद्रित है। ट्रस्ट द्वारा जारी ऑडिट प्रक्रिया और संभावित जांच रिपोर्टों पर सभी की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में यदि कोई आधिकारिक रिपोर्ट सामने आती है तो उससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और मंदिर के चढ़ावे को लेकर उठे सवालों का अंतिम जवाब क्या होगा