सऊदी ने एशिया के लिए सस्ता किया तेल, भारत को बड़ा फायदा!
सऊदी अरब ने नवंबर के लिए एशियाई देशों को मिलने वाले अरब लाइट कच्चे तेल की कीमत में 3 डॉलर प्रति बैरल की कटौती की है। अब यह तेल ओमान और दुबई के औसत मूल्य से 5 डॉलर प्रति बैरल सस्ता मिलेगा। भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए इस फैसले से भारतीय तेल कंपनियों को राहत मिल सकती है और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर बढ़ोतरी का दबाव कम हो सकता है।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 5 अक्टूबर 2026
सऊदी अरब ने नवंबर में एशियाई देशों के लिए अपने प्रमुख कच्चे तेल की आधिकारिक बिक्री कीमत में बड़ी कटौती की है। वहीं, उत्तर-पश्चिमी यूरोप और भूमध्यसागरीय क्षेत्र के लिए तेल की कीमतें बढ़ाई गई हैं। एशिया के लिए अरब लाइट कच्चे तेल की कीमत ओमान और दुबई के औसत मूल्य से 5 डॉलर प्रति बैरल कम रखी गई है। भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए सऊदी अरब के इस फैसले का भारतीय तेल कंपनियों और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर असर पड़ सकता है।
एशियाई देशों के लिए सस्ता हुआ सऊदी का तेल
सऊदी अरब ने नवंबर की आपूर्ति के लिए एशियाई देशों को दिए जाने वाले अरब लाइट कच्चे तेल की कीमत में 3 डॉलर प्रति बैरल की कटौती की है। अब इसकी कीमत ओमान और दुबई के औसत मूल्य से 5 डॉलर प्रति बैरल कम होगी। यह जून 2020 के बाद सऊदी अरब की ओर से दी गई सबसे बड़ी छूट बताई गई है। इस फैसले से एशियाई देशों के लिए सऊदी तेल की खरीद अपेक्षाकृत सस्ती हो सकती है।
यूरोप के लिए बढ़ाई गई तेल की कीमत
सऊदी अरब ने जहां एशिया के लिए कच्चे तेल की कीमत घटाई है, वहीं उत्तर-पश्चिमी यूरोप और भूमध्यसागरीय क्षेत्रों के लिए कीमतों में बढ़ोतरी की गई है। सोमवार को जारी मूल्य निर्धारण दस्तावेज में इस बदलाव की जानकारी सामने आई। इससे अलग-अलग क्षेत्रों के लिए सऊदी तेल की कीमतों में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है।
भारत पर क्या पड़ेगा असर
भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल दूसरे देशों से खरीदता है और सऊदी अरब भारत का दूसरा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता है। ऐसे में सऊदी अरब की ओर से कच्चे तेल पर दी जा रही अतिरिक्त छूट भारतीय तेल कंपनियों के लिए राहत लेकर आ सकती है। कच्चा माल सस्ता मिलने पर भारतीय सरकारी तेल कंपनियों की लागत कम हो सकती है और उनके लाभ में बढ़ोतरी की संभावना बन सकती है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर क्या असर होगा
रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक तनाव के कारण ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई है। इसके बावजूद सऊदी अरब से मिलने वाली 5 डॉलर प्रति बैरल की बड़ी छूट भारत की तेल कंपनियों को राहत दे सकती है। इससे देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों के स्थिर रहने की संभावना बढ़ सकती है और तत्काल बढ़ोतरी का दबाव कम हो सकता है।
एशिया के लिए कीमत क्यों घटा रहा है सऊदी अरब
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध तथा पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण समुद्र के रास्ते कच्चा तेल पहुंचाने वाले बड़े तेल टैंकरों का किराया बहुत बढ़ गया है। फारस की खाड़ी से चीन तक तेल पहुंचाने की लागत पिछले वर्ष के करीब 80 हजार डॉलर प्रतिदिन से बढ़कर लगभग 12 लाख डॉलर प्रतिदिन तक पहुंच गई है। ऐसे में सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी ने एशियाई खरीदारों पर बढ़े परिवहन खर्च का बोझ कम करने के लिए तेल की कीमत घटाई है।
बाजार हिस्सेदारी बचाने की भी कोशिश
सऊदी अरब को रूस और ईरान जैसे तेल उत्पादक देशों से भी कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल रही है। ये देश भारत और चीन जैसे बड़े तेल खरीदारों को भारी छूट पर कच्चा तेल उपलब्ध करा रहे हैं। ऐसे में सऊदी अरब को अपनी बाजार हिस्सेदारी कम होने का डर है। तेल की कीमत घटाकर एशियाई खरीदारों को अपने साथ बनाए रखना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
पश्चिम एशिया के तनाव से कच्चे तेल में उछाल
शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 को हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद और खुरैस क्षेत्र में स्थित अरामको के ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमले किए। इसके बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई। रिपोर्ट के अनुसार ब्रेंट कच्चा तेल 0.79 प्रतिशत बढ़कर 103.06 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल 0.50 प्रतिशत बढ़कर 91.57 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
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