शेयर बाजार में चौथे दिन भी हाहाकार, सेंसेक्स-निफ्टी लुढ़के; निवेशकों की बढ़ी टेंशन

2 जून 2026 को भारतीय शेयर बाजार में लगातार चौथे कारोबारी सत्र भी गिरावट का माहौल बना रहा। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। विदेशी निवेशकों की बिकवाली, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक तनाव के कारण बाजार पर दबाव बना हुआ है। जानिए बाजार में गिरावट की बड़ी वजहें और निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत।

शेयर बाजार में चौथे दिन भी हाहाकार, सेंसेक्स-निफ्टी लुढ़के; निवेशकों की बढ़ी टेंशन

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 2 जून 2026

देश के शेयर बाजार में मंगलवार को भी कमजोरी का माहौल देखने को मिला। लगातार चौथे कारोबारी सत्र में बिकवाली हावी रहने से प्रमुख सूचकांक दबाव में दिखाई दिए। निवेशकों की ओर से मुनाफावसूली और विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी के कारण बाजार की धारणा कमजोर बनी हुई है। वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने भी बाजार पर नकारात्मक असर डाला है।कारोबार की शुरुआत से ही बाजार में सुस्ती दिखाई दी और अधिकांश प्रमुख कंपनियों के शेयर लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में सुधार होने तक निवेशकों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।

लगातार चौथे कारोबारी सत्र में दबाव

भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ दिनों से लगातार गिरावट का दौर जारी है। सोमवार को प्रमुख सूचकांक भारी नुकसान के साथ बंद हुए थे और मंगलवार को भी उसी कमजोरी का असर देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में निवेशकों ने खरीदारी से दूरी बनाए रखी, जिससे बाजार में दबाव बढ़ गया।तीस शेयरों पर आधारित संवेदनशील सूचकांक सेंसेक्स 74 हजार अंक के स्तर से नीचे खुला और शुरुआती कारोबार में सैकड़ों अंकों की गिरावट दर्ज की गई। वहीं पचास प्रमुख शेयरों वाला सूचकांक निफ्टी भी कमजोर शुरुआत के साथ नीचे फिसल गया। लगातार गिरावट से निवेशकों की चिंता बढ़ती दिखाई दे रही है।

सेंसेक्स और निफ्टी में कितनी रही गिरावट

पिछले कारोबारी सत्र में सेंसेक्स 508 अंकों की गिरावट के साथ 74,267 अंक पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी 165 अंक टूटकर 23,382 अंक के स्तर पर पहुंच गया था। मंगलवार को भी बाजार में कमजोरी जारी रही और शुरुआती कारोबार में दोनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बने रहे।सेंसेक्स में शुरुआती दौर में 322 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी 153 अंक नीचे फिसलकर 23,229 अंक के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार की यह स्थिति दर्शाती है कि निवेशकों का भरोसा फिलहाल कमजोर पड़ा हुआ है और खरीदारी की तुलना में बिकवाली अधिक देखने को मिल रही है।

बाजार में गिरावट की प्रमुख वजहें

विश्लेषकों के अनुसार वैश्विक स्तर पर बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव बाजार की कमजोरी का बड़ा कारण बना हुआ है। पश्चिम एशिया क्षेत्र में बढ़ती अनिश्चितता के कारण निवेशकों में जोखिम लेने की क्षमता कम हुई है। ऐसी परिस्थितियों में निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं, जिससे शेयर बाजार पर दबाव बढ़ जाता है।इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भी चिंता बढ़ाई है। कच्चा तेल महंगा होने से भारत का आयात बिल बढ़ सकता है और महंगाई पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है। यही वजह है कि निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाते दिखाई दे रहे हैं।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बढ़ा दबाव

भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी गिरावट का एक बड़ा कारण मानी जा रही है। हाल के दिनों में विदेशी निवेशकों ने बाजार से बड़ी मात्रा में धन निकाला है, जिससे बाजार में तरलता और निवेशकों का मनोबल दोनों प्रभावित हुए हैं। जब विदेशी निवेशक बड़े पैमाने पर बिकवाली करते हैं तो इसका असर सीधे बाजार की दिशा पर पड़ता है। विदेशी निवेश की निकासी से बड़े शेयरों में दबाव बढ़ता है और सूचकांकों में गिरावट देखने को मिलती है। वर्तमान स्थिति में भी यही रुझान दिखाई दे रहा है।

किन क्षेत्रों के शेयरों पर सबसे ज्यादा असर

मंगलवार को बैंकिंग, वाहन और दैनिक उपभोग से जुड़े क्षेत्रों के शेयरों में सबसे अधिक कमजोरी देखने को मिली। इन क्षेत्रों की प्रमुख कंपनियों के शेयरों में गिरावट के कारण बाजार का समग्र प्रदर्शन प्रभावित हुआ। निवेशकों ने इन क्षेत्रों में खरीदारी से परहेज किया, जिससे दबाव और बढ़ गया।हालांकि सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के कुछ शेयरों ने मजबूती दिखाई। इस क्षेत्र में सीमित खरीदारी के कारण बाजार की गिरावट कुछ हद तक नियंत्रित रही। यदि सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में यह मजबूती नहीं दिखाई देती तो बाजार में गिरावट और अधिक गहरी हो सकती थी।

छोटे निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में निवेशकों को धैर्य बनाए रखना चाहिए। अचानक गिरावट के दौरान घबराहट में लिए गए फैसले भविष्य में नुकसान का कारण बन सकते हैं। इसलिए निवेशकों को मजबूत वित्तीय स्थिति वाली कंपनियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। यह भी सलाह दे रहे हैं कि अल्पकालिक उतार-चढ़ाव को देखकर निवेश रणनीति में बड़े बदलाव करने से बचना चाहिए। यदि वैश्विक परिस्थितियों में सुधार आता है और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिलती है तो बाजार में फिर से स्थिरता लौट सकती है।

आगे कैसा रह सकता है बाजार का रुख

विश्लेषकों के अनुसार आने वाले दिनों में बाजार की दिशा मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर करेगी। यदि वैश्विक तनाव कम होता है तो बाजार में खरीदारी लौट सकती है और सूचकांकों को सहारा मिल सकता है।हालांकि फिलहाल निवेशकों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है और ऐसे समय में संतुलित निवेश रणनीति अपनाना अधिक लाभकारी साबित हो सकता है।