लागत से नीचे बिक रही चीनी, मिलों ने सरकार से मांगा उचित मूल्य
चीनी उद्योग ने सरकार से मांग की है कि चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य और इथेनॉल खरीद दरों में संशोधन किया जाए। उद्योग का कहना है कि वर्तमान में चीनी उत्पादन लागत से कम कीमत पर बिक रही है, जिससे मिलों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है। यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो गन्ना किसानों के भुगतान पर भी असर पड़ सकता है।
दि राइजिंग न्यूज़। नई दिल्ली। 6 जून 2026
चीनी उद्योग ने उठाई सही कीमत देने की मांग, किसानों के भुगतान पर जताई चिंता
भारत का चीनी उद्योग लगातार उत्पादन लागत और बाजार में मिल रही चीनी की कीमतों के बीच बढ़ते अंतर को लेकर चिंता जता रहा है। इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने सरकार से मांग की है कि चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य और इथेनॉल खरीद दरों की समीक्षा की जाए, ताकि उद्योग और किसानों दोनों के हितों की रक्षा की जा सके। ISMA के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने कहा कि देश के प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में चीनी की एक्स-मिल कीमतें वर्तमान में उत्पादन लागत से नीचे बनी हुई हैं। ऐसी स्थिति लंबे समय तक बनी रहने पर चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है और इसका सीधा असर गन्ना किसानों को समय पर भुगतान करने की क्षमता पर पड़ेगा।
उत्पादन लागत से कम मिल रही कीमत
उद्योग के अनुसार उत्तर प्रदेश में चीनी की एक्स-मिल कीमत लगभग 41 से 41.50 रुपये प्रति किलोग्राम चल रही है, जबकि महाराष्ट्र में यह करीब 39 रुपये प्रति किलोग्राम है। दूसरी ओर चीनी उत्पादन की औसत लागत लगभग 42 रुपये प्रति किलोग्राम आंकी जा रही है। जब किसी उत्पाद की बिक्री कीमत लगातार उसकी उत्पादन लागत से कम रहती है तो उद्योग के लिए वित्तीय संतुलन बनाए रखना कठिन हो जाता है। यही कारण है कि चीनी उद्योग सरकार से मूल्य निर्धारण नीति में सुधार की मांग कर रहा है।
एफआरपी बढ़ने पर चीनी कीमतों पर भी हो विचार
ISMA ने कहा कि जब भी सरकार गन्ने का एफआरपी (फेयर एंड रिम्यूनरेटिव प्राइस) बढ़ाती है, तब उसी अनुपात में चीनी से होने वाली आय और बिक्री मूल्य पर भी विचार किया जाना चाहिए। उद्योग का तर्क है कि गन्ने की कीमत बढ़ने से मिलों की उत्पादन लागत बढ़ जाती है। यदि चीनी की बिक्री कीमतों में समुचित वृद्धि नहीं होती तो मिलों के लिए किसानों का भुगतान समय पर करना मुश्किल हो सकता है।
पर्याप्त रहेगा चीनी का भंडार
उद्योग के अनुमान के अनुसार 2025-26 चीनी सीजन के अंत तक देश में लगभग 42 से 43 लाख टन चीनी का क्लोजिंग स्टॉक रहने की संभावना है। पिछला सीजन करीब 50 लाख टन ओपनिंग स्टॉक के साथ शुरू हुआ था। हालांकि उद्योग का कहना है कि फिलहाल देश में चीनी की उपलब्धता को लेकर किसी प्रकार के संकट की आशंका नहीं है, क्योंकि अक्टूबर के तीसरे सप्ताह से नए सीजन की चीनी बाजार में आने लगेगी।
इथेनॉल कीमतों में संशोधन की मांग
चीनी उद्योग ने इथेनॉल खरीद कीमतों में भी संशोधन की मांग उठाई है। ISMA का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में गन्ने की लागत, प्रसंस्करण खर्च और वित्तीय लागत में लगातार वृद्धि हुई है, लेकिन इथेनॉल की खरीद कीमतों में उसी अनुपात में बढ़ोतरी नहीं हुई। इसके चलते चीनी मिलों और डिस्टिलरी इकाइयों की आर्थिक व्यवहार्यता प्रभावित हो रही है। उद्योग का मानना है कि यदि इथेनॉल की कीमतों में संशोधन किया जाता है तो इससे जैव ईंधन क्षेत्र को भी मजबूती मिलेगी।
ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने पर जोर
ISMA ने फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने का समर्थन करते हुए कहा कि इससे इथेनॉल की खपत बढ़ेगी और पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम होगी। इसके अलावा उद्योग ने इथेनॉल आधारित स्टोव के उपयोग को भी प्रोत्साहित करने की वकालत की है। उद्योग का मानना है कि इथेनॉल के बढ़ते उपयोग से देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और किसानों को भी बेहतर आर्थिक लाभ मिल सकेगा।