स्वामी चिदम्बरानन्द- रामायण जीवन के चारों पुरुषार्थों की संहिता:बोले- धर्म और मोक्ष को भुलाकर अर्थ-काम को लक्ष्य मानना गलत
लखनऊ के जानकीपुरम विस्तार सेक्टर-7 स्थित सूर्या अकादमी में श्रीमद् वाल्मीकि रामायण पर आधारित श्रीराम कथा के दूसरे दिन महामंडलेश्वर स्वामी चिदम्बरानन्द सरस्वती ने कहा कि वाल्मीकि रामायण जीवन के चारों पुरुषार्थों- धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की संहिता है। आज समाज में धर्म और मोक्ष की चर्चा कम हो गई है, जबकि अर्थ और काम को ही जीवन का प्रमुख लक्ष्य मान लिया गया है। इससे सामाजिक ढांचा प्रभावित हो रहा है। धर्म और मोक्ष से जुड़ी शिक्षा जरूरी स्वामी चिदम्बरानन्द ने कहा कि जिस शिक्षा व्यवस्था में धर्म और मोक्ष जैसे मूल्यों के लिए स्थान नहीं है, उसे राक्षसी शिक्षा कहा जा सकता है। महर्षि वाल्मीकि ने रामायण के माध्यम से भगवान राम के चरित्र के साथ सत्य, धर्म, कर्तव्य, करुणा, मर्यादा, त्याग और भक्ति का संदेश दिया है। राम के साथ सीता का चरित्र समझना जरूरी उन्होंने कहा कि वाल्मीकि रामायण की प्रामाणिकता सार्वभौमिक है। उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक भगवान राम के चरित्र की महिमा सुनाई जाती है। अलग-अलग राम कथाओं में भी वाल्मीकि रामायण का संदर्भ मिलता है। महर्षि वाल्मीकि ने अपनी रचना का नाम रामायण रखा, लेकिन कथा में माता सीता का चरित्र भी बेहद महत्वपूर्ण है। उनके संघर्ष, त्याग और धैर्य को देखते हुए इसे सीतायण भी कहा जा सकता था। विपत्ति में भी सत्य और धर्म का साथ न छोड़ें स्वामी चिदम्बरानन्द ने कहा कि रामायण सिखाती है कि विपत्ति कितनी भी बड़ी हो, सत्य और धर्म का साथ नहीं छोड़ना चाहिए। कठिन परिस्थितियों में यही मूल्य मनुष्य को धैर्य और शक्ति देते हैं। कथा के दौरान सुमधुर भजनों से माहौल भक्तिमय हो गया। महापौर सुषमा खर्कवाल ने स्वामी चिदम्बरानन्द से लखनऊवासियों की खुशहाली के लिए आशीर्वाद लिया। उन्होंने हरिहर सेवा समिति की ओर से आयोजित वाल्मीकि रामायण कथा की सराहना की। कार्यक्रम में आरके मिश्रा की अगुवाई में महासमिति के महासचिव विनय कृष्ण पाण्डेय, चन्द्र शेखर, गोपाल निगम, एसपी मिश्रा समेत गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
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