दि राइजिंग न्यूज़ | लखनऊ | 27 मई 2026
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार अब प्रदेश की जेल व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कारागार विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान स्पष्ट कहा कि जेल केवल अपराधियों को बंद रखने की जगह नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे सुधार, पुनर्वास और आत्मनिर्भरता का केंद्र बनाया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने खासतौर पर छोटे अपराधों में बंद कैदियों के लिए ‘ओपन जेल’ की व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जेलों का सख्त स्वरूप पेशेवर अपराधियों और माफियाओं के लिए होना चाहिए, जबकि छोटे अपराधों में शामिल लोगों को सुधार और पुनर्वास का अवसर मिलना चाहिए।
क्या है ओपन जेल की योजना
ओपन जेल ऐसी व्यवस्था होती है जहां छोटे अपराधों में सजा काट रहे कैदियों को अपेक्षाकृत खुला वातावरण दिया जाता है। यहां कैदियों को काम करने, कौशल सीखने और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का मौका मिलता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस योजना को जल्द लागू करने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की जाए। सरकार का मानना है कि इससे छोटे अपराधियों के मानसिक और सामाजिक सुधार में मदद मिलेगी।
जेलों में सुधार को लेकर योगी सरकार का बड़ा प्लान
बैठक में मुख्यमंत्री ने जेलों में सुरक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और तकनीकी सुविधाओं को और मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और पारदर्शी व्यवस्था के जरिए कारागारों को नई पहचान दी जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जेलों में बंद कैदियों को केवल सजा देना ही उद्देश्य नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाना भी जरूरी है।
तेजी से कम हुई ओवरक्राउडिंग
बैठक में पेश आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2017 में प्रदेश की 70 जेलों की क्षमता 58,400 थी, जबकि वहां 96 हजार से ज्यादा बंदी मौजूद थे। उस समय ओवरक्राउडिंग दर 1.77 थी। वर्तमान में प्रदेश में 77 जेलें संचालित हो रही हैं, जिनकी क्षमता बढ़कर 77,673 हो गई है। वहीं बंदियों की संख्या लगभग 79,782 बताई गई है। इसके चलते ओवरक्राउडिंग दर घटकर 1.03 तक पहुंच गई है।
सात नई जेलें शुरू, कई निर्माणाधीन
सरकार की ओर से बताया गया कि वर्ष 2017 के बाद चित्रकूट, अंबेडकरनगर, संतकबीरनगर, इटावा, प्रयागराज, श्रावस्ती और बरेली समेत सात नए कारागार शुरू किए गए हैं। इसके अलावा अमेठी, महोबा, हाथरस, कुशीनगर, जौनपुर और हापुड़ में नई जेलों का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। मुख्यमंत्री ने बहुमंजिला जेलों के निर्माण को भी प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं।
जेलों में तकनीक आधारित सुरक्षा व्यवस्था
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जेल सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि किसी भी स्तर पर सुरक्षा से समझौता स्वीकार नहीं होगा। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2017 से 2026 के बीच प्रदेश की जेलों में—
- 6200 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए
- 24 बैगेज स्कैनर स्थापित किए गए
- 30 ड्रोन कैमरे लगाए गए
- 84 डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर लगाए गए
- 195 बॉडी वार्न कैमरे उपलब्ध कराए गए
इसके अलावा सभी जेल बैरकों में सीसीटीवी और मेनवॉल पर वायर फेंसिंग की व्यवस्था की गई है।
बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने पर योगी सरकार का फोकस
उत्तर प्रदेश सरकार अब जेलों को केवल कैदियों को रखने की जगह नहीं, बल्कि उन्हें सुधारकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ने वाले केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ कहा है कि जेलों में बंद कैदियों को ऐसा प्रशिक्षण दिया जाए जिससे वे रिहाई के बाद सम्मानजनक जीवन जी सकें और दोबारा अपराध की दुनिया में न लौटें। इसी सोच के तहत प्रदेश की कई जेलों में रोजगार और कौशल विकास से जुड़े कार्यक्रम तेजी से चलाए जा रहे हैं। सरकार का मानना है कि अगर बंदियों को हुनर और रोजगार मिलेगा तो उनका मानसिक बदलाव भी संभव होगा।
जेलों में चल रहे उद्योग और प्रशिक्षण
प्रदेश की अलग-अलग जेलों में बंदियों को विभिन्न प्रकार के कार्यों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इनमें शामिल हैं—
- सिलाई और रेडीमेड गारमेंट निर्माण
- दरी और कंबल निर्माण
- मसाला और फिनायल उत्पादन
- प्रिंटिंग और हैंडीक्राफ्ट
- एलईडी बल्ब निर्माण
- काष्ठ कला और पॉटरी
- कार्पेट और अन्य हस्तशिल्प उद्योग
सरकार का दावा है कि इन गतिविधियों से बंदियों में आत्मविश्वास बढ़ रहा है और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
‘वन जेल वन प्रोडक्ट’ योजना
प्रदेश की 37 जेलों में ‘वन जेल वन प्रोडक्ट’ योजना लागू की गई है। इस योजना के तहत हर जेल को किसी विशेष उत्पाद से जोड़ा गया है, ताकि वहां बंद कैदी उसी क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल कर सकें। सरकार का मानना है कि यह मॉडल जेलों को उत्पादन केंद्र के रूप में विकसित करने में मदद करेगा और रिहाई के बाद बंदियों को रोजगार पाने में आसानी होगी।
जेलों में योग, खेती और गौसंवर्धन को बढ़ावा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जेलों में केवल सुरक्षा व्यवस्था पर ही नहीं, बल्कि बंदियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी विशेष जोर दिया है। उनका कहना है कि सकारात्मक वातावरण से कैदियों के व्यवहार में सुधार लाया जा सकता है।
योग और मानसिक स्वास्थ्य
प्रदेश की जेलों में योग और ध्यान कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार का मानना है कि योग से बंदियों का मानसिक तनाव कम होगा और उनमें सकारात्मक सोच विकसित होगी। इसके अलावा खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि जेलों का वातावरण तनावपूर्ण न रहे।
खेती और कृषि गतिविधियां
प्रदेश की जेलों में कृषि गतिविधियों का भी विस्तार किया गया है। जेलों की कृषि भूमि वर्ष 2020 में 584.51 एकड़ थी, जो अब बढ़कर 624.14 एकड़ तक पहुंच चुकी है। इन कृषि फार्मों में सब्जियां और आलू जैसी फसलों का उत्पादन किया जा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, उत्पादन 81,270 क्विंटल से बढ़कर 86,720 क्विंटल तक पहुंच गया है।सरकार का कहना है कि इससे बंदियों को खेती और कृषि संबंधी कार्यों का व्यावहारिक अनुभव मिलता है।
गौसंवर्धन पर भी विशेष ध्यान
प्रदेश की 17 जेलों में वर्तमान समय में गौशालाएं संचालित की जा रही हैं। यहां 1200 से अधिक गोवंश संरक्षित हैं। बंदियों को गौसेवा और पशुपालन से जोड़ने का उद्देश्य उनमें संवेदनशीलता और अनुशासन विकसित करना बताया जा रहा है। सरकार इसे सुधारात्मक गतिविधि के रूप में देख रही है।
बुजुर्ग और बीमार कैदियों के लिए मानवीय दृष्टिकोण
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया कि जेलों में बंद ऐसे कैदियों की अलग सूची तैयार की जाए जो विशेष मानवीय सहायता के पात्र हैं।
इनमें शामिल हैं—
- 75 वर्ष से अधिक आयु के कैदी
- गंभीर और असाध्य बीमारियों से पीड़ित बंदी
- बच्चों के साथ जेल में रह रही महिला कैदी
- जमानत राशि जमा न कर पाने के कारण जेल में बंद लोग
सरकार का कहना है कि ऐसे मामलों में केवल कानूनी नहीं बल्कि मानवीय दृष्टिकोण भी अपनाया जाना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे जेल प्रशासन में संवेदनशीलता बढ़ेगी और जरूरतमंद कैदियों को राहत मिल सकेगी।
भर्ती और पदोन्नति पर भी सरकार का जोर
कारागार विभाग में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने की प्रक्रिया भी तेज की जा रही है। बैठक में बताया गया कि वर्तमान में विभाग में 3647 रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है।
सरकार के अनुसार—
- वर्ष 2017 से अब तक 4055 नई नियुक्तियां दी जा चुकी हैं
- विभिन्न श्रेणियों में 2868 पदोन्नतियां भी की गई हैं
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि भर्ती प्रक्रिया को जल्द पूरा किया जाए ताकि जेलों में स्टाफ की कमी दूर हो सके और सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत बनाई जा सके।
क्या बदल सकती है यूपी की जेल व्यवस्था
योगी सरकार की नई रणनीति यह संकेत दे रही है कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की जेलों का स्वरूप पूरी तरह बदल सकता है। अब केवल सजा पर नहीं, बल्कि सुधार, पुनर्वास और आत्मनिर्भरता पर भी जोर दिया जा रहा है। सरकार का दावा है कि यदि बंदियों को सही माहौल, प्रशिक्षण और अवसर मिले तो वे समाज की मुख्यधारा में लौटकर बेहतर जीवन जी सकते हैं।