वंदे मातरम् के अपमान पर होगी जेल

संसद के वर्षाकालीन सत्र में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह राज्यसभा में सबसे पहले वंदे मातरम् विधेयक पेश करेंगे। प्रस्तावित कानून में राष्ट्रीय गीत का अपमान करने या उसके गायन में बाधा डालने वालों के लिए तीन वर्ष तक के कारावास का प्रावधान किया गया है।

वंदे मातरम् के अपमान पर होगी जेल

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 17 जुलाई 2026

संसद के आगामी वर्षाकालीन सत्र में केंद्र सरकार राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् को लेकर एक महत्वपूर्ण विधायी पहल करने जा रही है। सूत्रों के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस सत्र में सबसे पहले राज्यसभा में वंदे मातरम् विधेयक प्रस्तुत करेंगे। इस प्रस्तावित कानून का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत को कानूनी संरक्षण प्रदान करना, उसके सम्मान को सुनिश्चित करना तथा उसके अपमान या गायन में जानबूझकर बाधा डालने जैसी घटनाओं को दंडनीय अपराध की श्रेणी में शामिल करना है। माना जा रहा है कि केंद्र सरकार इस विधेयक को राष्ट्रीय गौरव और संवैधानिक मूल्यों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय मानते हुए प्राथमिकता के आधार पर संसद में पेश करने की तैयारी कर रही है।सरकार का मानना है कि जिस प्रकार राष्ट्रगान जन गण मन को विशेष कानूनी संरक्षण और सम्मान प्राप्त है, उसी प्रकार राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् को भी समान गरिमा मिलनी चाहिए। इसी सोच को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित विधेयक तैयार किया गया है। यदि यह कानून पारित हो जाता है, तो राष्ट्रीय गीत का अपमान करने, उसके गायन में व्यवधान उत्पन्न करने या सार्वजनिक कार्यक्रमों में उसका अनादर करने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई का स्पष्ट प्रावधान लागू हो जाएगा। सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान केवल संवैधानिक दायित्व ही नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक कर्तव्य भी है।


क्या है वंदे मातरम् विधेयक और क्यों लाई जा रही है यह व्यवस्था

प्रस्तावित विधेयक का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय गीत के सम्मान को कानूनी आधार प्रदान करना है। वर्तमान में राष्ट्रीय गीत के सम्मान को लेकर अलग से कोई स्पष्ट दंडात्मक व्यवस्था नहीं है। सरकार का मानना है कि बदलते सामाजिक परिवेश में राष्ट्रीय प्रतीकों की गरिमा बनाए रखने के लिए स्पष्ट कानून की आवश्यकता है, ताकि किसी भी प्रकार के अपमान या अवमानना की स्थिति में प्रभावी कार्रवाई की जा सके।सरकार का कहना है कि यह कानून किसी व्यक्ति की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा के लिए लाया जा रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सार्वजनिक कार्यक्रमों, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य राष्ट्रीय आयोजनों में राष्ट्रीय गीत के प्रति उचित सम्मान बना रहे। इससे लोगों में राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय एकता की भावना को भी मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।


राष्ट्रीय गीत के गायन में बाधा डालने पर हो सकती है कठोर कार्रवाई

प्रस्तावित विधेयक के अनुसार यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रीय गीत के गायन के दौरान हंगामा करता है, कार्यक्रम को बाधित करता है या किसी भी प्रकार से उसका अपमान करता है, तो उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी। सरकार का मानना है कि इस प्रकार की घटनाएं राष्ट्रीय सम्मान को ठेस पहुंचाती हैं और इनके विरुद्ध कठोर दंडात्मक व्यवस्था आवश्यक है।सूत्रों के अनुसार विधेयक में दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के लिए तीन वर्ष तक के कारावास का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही आवश्यकता पड़ने पर अन्य वैधानिक कार्रवाई भी की जा सकती है। सरकार का कहना है कि स्पष्ट कानूनी व्यवस्था लागू होने से भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगेगी और राष्ट्रीय गीत के प्रति सम्मान का वातावरण और मजबूत होगा।


राष्ट्रीय सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की तैयारी

केंद्र सरकार का कहना है कि देश के राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक मूल्यों का अभिन्न हिस्सा है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि आजादी की लड़ाई का प्रेरणास्रोत बना था। इसी ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए सरकार इसे कानूनी संरक्षण देने की दिशा में आगे बढ़ रही है।सरकार का मानना है कि आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रीय इतिहास, स्वतंत्रता आंदोलन और देशभक्ति के मूल्यों से जोड़ने के लिए भी इस प्रकार की व्यवस्था आवश्यक है। यदि राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को लेकर स्पष्ट कानून होगा, तो समाज में इनके प्रति जागरूकता और सम्मान दोनों बढ़ेंगे।


कैबिनेट से मिल चुकी है मंजूरी, राज्यसभा में होगी शुरुआत

सूत्रों के अनुसार इस विधेयक को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल चुकी है। अब इसे संसद के वर्षाकालीन सत्र में सबसे पहले राज्यसभा में प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद संसदीय प्रक्रिया के अनुसार इस पर चर्चा होगी और दोनों सदनों से पारित होने के बाद इसे कानून का स्वरूप मिल सकेगा।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार इस विधेयक को राष्ट्रीय महत्व का विषय मानते हुए प्राथमिकता दे रही है। संसद में इस पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है, क्योंकि यह विषय राष्ट्रीय सम्मान और संवैधानिक मूल्यों से सीधे जुड़ा हुआ माना जा रहा है।


सरकार को विधेयक पारित होने का भरोसा

सूत्रों का दावा है कि केंद्र सरकार को विश्वास है कि संसद में इस विधेयक को पारित कराने के लिए पर्याप्त समर्थन उपलब्ध है। सरकार विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और सांसदों से भी संपर्क बनाए हुए है, ताकि राष्ट्रीय महत्व के इस विषय पर व्यापक सहमति बनाई जा सके। रणनीतिक स्तर पर सरकार इस विधेयक को अपनी प्राथमिक सूची में शामिल कर चुकी है।राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि सरकार ऐसे सभी विधेयकों को प्राथमिकता दे रही है, जो राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक विरासत और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने से जुड़े हैं। इसी कारण वंदे मातरम् विधेयक को वर्षाकालीन सत्र के शुरुआती चरण में ही सदन के सामने लाने की तैयारी की गई है।


पहले भी राष्ट्रीय गीत को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए थे कदम

केंद्र सरकार इससे पहले भी विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों और सार्वजनिक आयोजनों में वंदे मातरम् के गायन को प्रोत्साहित करने के लिए कई पहल कर चुकी है। सरकार का मानना है कि राष्ट्रीय गीत देश की स्वतंत्रता संग्राम की अमूल्य धरोहर है और यह देशवासियों को एकता, अखंडता और राष्ट्रभक्ति की भावना से जोड़ता है।प्रस्तावित विधेयक को इसी दिशा में अगला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि यह कानून लागू होता है, तो राष्ट्रीय गीत के सम्मान से जुड़े मामलों में पहली बार स्पष्ट कानूनी व्यवस्था लागू होगी। इससे भविष्य में किसी भी प्रकार के अपमान, व्यवधान या अवमानना की स्थिति में तत्काल कानूनी कार्रवाई का मार्ग भी स्पष्ट हो जाएगा।


राष्ट्रीय सम्मान को लेकर नया अध्याय खुलने की संभावना

यदि संसद इस विधेयक को मंजूरी देती है, तो राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् को लेकर देश में एक नई कानूनी व्यवस्था लागू हो सकती है। इससे राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश तय होंगे और सार्वजनिक जीवन में इनके प्रति संवेदनशीलता बढ़ेगी। सरकार का मानना है कि यह कदम केवल दंड देने के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है। कि इस कानून के लागू होने के बाद राष्ट्रीय गीत से जुड़े विवादों में स्पष्ट कानूनी प्रावधान उपलब्ध होंगे। साथ ही देशभर में राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को लेकर एक समान व्यवस्था विकसित हो सकेगी, जिससे संविधान की मूल भावना और राष्ट्रीय एकता को भी मजबूती मिलेगी।