पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: लाठीचार्ज, नारेबाजी और शुभेंदु अधिकारी के साथ झड़प, हिंसा के साये में हुआ मतदान

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण में भारी मतदान के बीच कई जगहों पर हिंसा और झड़प की घटनाएं सामने आईं। कालीघाट में शुभेंदु अधिकारी के साथ टकराव, सुरक्षाबलों का लाठीचार्ज और भाजपा-तृणमूल के बीच आरोप-प्रत्यारोप ने चुनावी माहौल को तनावपूर्ण बना दिया। निर्वाचन आयोग ने घटनाओं पर रिपोर्ट मांगी है और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण में भारी मतदान के बीच कई जगहों पर हिंसा और झड़प की घटनाएं सामने आईं। कालीघाट में शुभेंदु अधिकारी के साथ टकराव, सुरक्षाबलों का लाठीचार्ज और भाजपा-तृणमूल के बीच आरोप-प्रत्यारोप ने चुनावी माहौल को तनावपूर्ण बना दिया। निर्वाचन आयोग ने घटनाओं पर रिपोर्ट मांगी है और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: लाठीचार्ज, नारेबाजी और शुभेंदु अधिकारी के साथ झड़प, हिंसा के साये में हुआ मतदान

दि राइजिंग न्यूज डेस्क | 29 अप्रैल 2026 ।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण में जहां एक ओर भारी मतदान देखा गया, वहीं दूसरी ओर कई इलाकों से हिंसा और झड़पों की खबरें सामने आईं। दोपहर तीन बजे तक करीब 78.68 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। राज्य के कई संवेदनशील क्षेत्रों में राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं के बीच टकराव की स्थिति बनी रही। चुनावी माहौल तनावपूर्ण नजर आया, जिससे निष्पक्ष मतदान पर सवाल भी उठे। प्रशासन और सुरक्षाबलों को कई जगह हस्तक्षेप करना पड़ा।


कई जिलों में हिंसा और तनाव की स्थिति

इस चरण में 142 विधानसभा सीटों पर मतदान हुआ, जिनमें नदिया, उत्तर और दक्षिण चौबीस परगना तथा हावड़ा जैसे जिले शामिल हैं। इन इलाकों से मारपीट, तोड़फोड़ और झड़प की कई घटनाएं सामने आईं। मतदान केंद्रों के बाहर कार्यकर्ताओं के बीच टकराव की स्थिति बनी रही। कुछ जगहों पर मतदाताओं को डराने-धमकाने के आरोप भी लगे। इससे चुनावी माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया।


कालीघाट में शुभेंदु अधिकारी के साथ टकराव

कोलकाता के कालीघाट इलाके में उस समय स्थिति बिगड़ गई जब भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी एक मतदान केंद्र पर पहुंचे। वहां तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों ने उनका विरोध करते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। जवाब में भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी नारे लगाए, जिससे माहौल और अधिक गरमा गया। दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। इसके बाद पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।


सुरक्षाबलों का लाठीचार्ज और कार्रवाई

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षाबलों को लाठीचार्ज करना पड़ा। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस और केंद्रीय बलों ने सख्त कदम उठाए। कई जगहों पर लोगों को हटाने के लिए बल प्रयोग किया गया। प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई जरूरी थी। इस दौरान कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया गया।


भाजपा और तृणमूल के आरोप-प्रत्यारोप

भाजपा ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के समर्थक जानबूझकर मतदान को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना है कि मतदाताओं को डराया जा रहा है और निष्पक्ष चुनाव नहीं होने दिया जा रहा। वहीं तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह जनता का स्वाभाविक विरोध है। दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी रहा। इससे राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया।


अन्य इलाकों में भी झड़प और गड़बड़ी

नदिया, शांतिपुर और भांगड़ जैसे क्षेत्रों में भी हिंसा और गड़बड़ी की घटनाएं सामने आईं। कुछ जगहों पर मतदान एजेंटों के साथ मारपीट के आरोप लगे। वहीं कुछ मतदान केंद्रों पर मशीनों में खराबी के कारण मतदान में देरी हुई। इससे मतदाताओं में नाराजगी देखी गई। कई स्थानों पर पुलिस और सुरक्षाबलों को स्थिति संभालनी पड़ी।


मतदान में बाधा और विरोध की घटनाएं

कुछ इलाकों में विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि उनके एजेंटों को मतदान केंद्र में प्रवेश नहीं करने दिया गया। वहीं कुछ उम्मीदवारों ने अपने ऊपर हमले और गाड़ियों पर पथराव के आरोप लगाए। इससे चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठे हैं। मतदाताओं को प्रभावित करने के प्रयासों की भी शिकायतें मिली हैं। प्रशासन इन मामलों की जांच में जुटा है।


निर्वाचन आयोग और प्रशासन की प्रतिक्रिया

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने इन घटनाओं पर रिपोर्ट मांगी है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि मतदान निष्पक्ष और भयमुक्त तरीके से कराया जाए। प्रशासन का कहना है कि हर मतदाता को सुरक्षित माहौल में वोट देने का अधिकार है। अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती भी की जा रही है। स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।


पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 का यह चरण जहां भारी मतदान के लिए जाना जा रहा है, वहीं हिंसा और विवादों ने इसे चर्चा का विषय बना दिया है। राजनीतिक दलों के बीच टकराव ने चुनावी माहौल को प्रभावित किया है। हालांकि प्रशासन स्थिति को नियंत्रित करने का दावा कर रहा है। अब सबकी नजर आगे आने वाले नतीजों पर टिकी हुई है। यह चुनाव राज्य की राजनीति के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।