सीजेपी नेताओं पर मार्कंडेय काटजू का तीखा हमला
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू ने सीजेपी के चार नेताओं के शांति बांड पर हस्ताक्षर करने की आलोचना की है। उन्होंने दावा किया कि इससे उनकी सार्वजनिक विश्वसनीयता प्रभावित हुई है। वहीं, शांति बांड पर हस्ताक्षर करने से इनकार करने वाली छात्रनेता नेहा बोरा की उन्होंने प्रशंसा की।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 26 अक्टूबर 2026
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के चार नेताओं पर शांति बांड पर हस्ताक्षर करने को लेकर तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने अभिजीत दीपके, सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे की आलोचना करते हुए दावा किया कि इस फैसले से उनकी सार्वजनिक छवि और राजनीतिक विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा है। वहीं, उन्होंने छात्रनेता नेहा बोरा की तारीफ की, जिन्होंने कथित तौर पर शांति बांड पर हस्ताक्षर करने से इनकार किया। काटजू की इन टिप्पणियों से सीजेपी आंदोलन से जुड़ा विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
शांति बांड पर हस्ताक्षर करने वाले नेताओं की आलोचना
मार्कंडेय काटजू ने सामाजिक माध्यम पर लिखी अपनी टिप्पणी में सीजेपी के चार प्रमुख नेताओं को निशाने पर लिया। उन्होंने अभिजीत दीपके, सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे के शांति बांड पर हस्ताक्षर करने के फैसले पर सवाल उठाए। काटजू के अनुसार, इस कदम से उनकी सार्वजनिक विश्वसनीयता प्रभावित हुई है। हालांकि, सार्वजनिक जीवन पर उनके भविष्य को लेकर काटजू की टिप्पणी उनकी निजी राय है, किसी स्थापित तथ्य या आधिकारिक निर्णय का प्रमाण नहीं।
काटजू ने क्यों कहा कि नेताओं का सार्वजनिक जीवन खत्म हो गया
काटजू ने अपनी टिप्पणी में दावा किया कि शांति बांड पर हस्ताक्षर करने के बाद इन चारों नेताओं का सार्वजनिक जीवन समाप्त हो गया है। उनका तर्क है कि यदि बांड की शर्तों के कारण नेता आगे किसी प्रदर्शन में शामिल होने से बचते हैं, तो इससे उनके आंदोलन की भूमिका प्रभावित हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि जनता उन्हें ऐसे लोगों के रूप में देख सकती है, जिन्होंने जेल जाने के डर से पीछे हटने का फैसला किया। यह काटजू का आकलन है; इन नेताओं की वास्तविक लोकप्रियता या भविष्य पर इसका प्रभाव स्वतंत्र रूप से स्थापित नहीं है।
नेहा बोरा की तारीफ में क्या बोले पूर्व न्यायाधीश
मार्कंडेय काटजू ने छात्रनेता नेहा बोरा की प्रशंसा करते हुए कहा कि वह उनका सम्मान करते हैं। उनके अनुसार, नेहा ने शांति बांड पर हस्ताक्षर करने से इनकार किया और शांतिपूर्ण प्रदर्शन को अपना संवैधानिक अधिकार बताया। काटजू ने इस रुख को अन्य चार नेताओं के फैसले से अलग माना। उनकी टिप्पणी से स्पष्ट है कि वह प्रदर्शन के अधिकार को लेकर नेहा के रुख का समर्थन कर रहे हैं।
अंग्रेजों के शासनकाल का उदाहरण देकर साधा निशाना
काटजू ने अपनी टिप्पणी में ब्रिटिश शासनकाल के दौरान जेल जाने वाले लोगों का उदाहरण भी दिया। उन्होंने दावा किया कि शांति बांड पर हस्ताक्षर करने वाले नेताओं की तुलना उन लोगों से की जा सकती है, जो माफी मांगने के बाद जेल से बाहर आए थे। इसी संदर्भ में उन्होंने चारों नेताओं के लिए कठोर शब्दों का इस्तेमाल किया। हालांकि, ब्रिटिश शासनकाल की घटनाओं और वर्तमान मामले के बीच की गई यह तुलना काटजू की व्यक्तिगत राजनीतिक टिप्पणी है।
सीजेपी आंदोलन पर क्या पड़ सकता है असर
सीजेपी के नेताओं को लेकर की गई इस टिप्पणी से आंदोलन में शामिल लोगों के फैसलों और उनके सार्वजनिक रुख पर बहस तेज हो सकती है। एक ओर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का सवाल है, तो दूसरी ओर शांति बांड की शर्तों और उनके संभावित कानूनी परिणामों का विषय है। किसी भी नेता के बांड पर हस्ताक्षर करने को अपने आप में कायरता या सार्वजनिक जीवन का अंत नहीं माना जा सकता। इस मामले में आगे की स्थिति संबंधित शर्तों, कानूनी प्रक्रिया और नेताओं के आगामी कदमों पर निर्भर करेगी।
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