10 लाख से ज्यादा दीपक बनकर स्टोर में पहुंचे:30 लाख से ज्यादा दीप जलाकर इतिहास रचने की तैयारी में अयोध्या
अयोध्या में भव्य दीपोत्सव को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। रामनगरी के घाटों को लाखों दीपों से जगमगाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। दीपोत्सव स्थल पर दीपकों के पहुंचने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। दीपोत्सव के स्टोर रूम में 10 लाख से ज्यादा दीपक बनकर पहुंच चुके हैं। अगले 3 दिनों के भीतर 30 लाख से ज्यादा दीपक स्टोर में पूरे किए जाने का लक्ष्य है। पिछले दीपोत्सव में अवध विश्वविद्यालय के स्वयंसेवकों ने 26 लाख 17 हजार 215 से अधिक दीप प्रज्ज्वलित कर इतिहास रचा था। इस उपलब्धि को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया था। अब एक बार फिर स्वयंसेवक पिछले रिकॉर्ड को तोड़ने और अयोध्या के नाम एक नया विश्व रिकॉर्ड दर्ज कराने के लक्ष्य के साथ जुटने जा रहे हैं। इस बार पिछले रिकॉर्ड को तोड़ने और नया विश्व कीर्तिमान स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। अवध विश्वविद्यालय के स्वयंसेवक 30 लाख से ज्यादा दीप जलाकर इतिहास रचने की तैयारी में जुटेंगे। अयोध्या एक बार फिर भव्य दीपोत्सव की साक्षी बनने जा रही है। दसवें दीपोत्सव को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। दीपोत्सव स्थल पर दीपकों की खेप पहुंचनी तेज हो गई है। दो दिनों से दीपकों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हुआ, जिन्हें सुरक्षित तरीके से रखा जा रहा है। तेल, बाती और कपूर की आपूर्ति भी 1 नवंबर से पहले पूरी करने की योजना तैयारी है कि दीपोत्सव स्थल पर लाखों दीपों से रामनगरी को रोशन किया जाए। दीपकों के साथ तेल, बाती और कपूर की आपूर्ति भी 1 नवंबर से पहले पूरी करने की योजना है। वहीं, तीन नवंबर से घाटों पर दीपकों को पहुंचाने का सिलसिला शुरू हो जाएगा। सात नवंबर को छोटी दीपावली के अवसर पर अयोध्या में दीपोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस बार दीपोत्सव को और भव्य बनाने की तैयारी है। आयोजन स्थल पर 33 लाख से ज्यादा दीपक पहुंचाने की योजना बनाई गई है। वहीं, अवध विश्वविद्यालय के स्वयंसेवक 30 लाख से ज्यादा दीप जलाकर नया कीर्तिमान स्थापित करने का प्रयास करेंगे। 56 घाटों पर माइक्रो-प्लानिंग से सजेंगे दीप इस वर्ष विस्तारित राम की पैड़ी, चौधरी चरण सिंह घाट और भजन संध्या स्थल सहित कुल 56 घाटों पर दीप सजाए जाएंगे। इससे पहले दीपोत्सव का आयोजन 55 घाटों पर होता था। प्रो. संत शरण मिश्र ने बताया कि सभी घाटों पर दीयों की व्यवस्थित श्रृंखला बिछाने के लिए माइक्रो-प्लानिंग के तहत काम किया जा रहा है, ताकि तय समयसीमा में तैयारियां पूरी की जा सकें। मार्किंग कमेटी के संयोजक एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. विनोद कुमार चौधरी ने बताया कि दीपों को सटीक और आकर्षक स्वरूप में सजाने के लिए चार वर्ग फीट के ब्लॉक चिह्नित किए जा रहे हैं। प्रत्येक ब्लॉक में निर्धारित संख्या के अनुसार दीपों की सजावट का खाका तैयार किया जा रहा है। उनकी टीम अगले तीन से चार दिनों में मार्किंग का काम पूरा कर लेगी। 35 हजार वालंटियर संभालेंगे दीप सज्जा की जिम्मेदारी दीपोत्सव को सफल बनाने के लिए 35 हजार वालंटियर लगाए जाएंगे। इनमें 30 डिग्री कॉलेजों, 40 इंटर कॉलेजों और अवध विश्वविद्यालय परिसर के विद्यार्थी शामिल होंगे। साकेत महाविद्यालय, राजकरण वैदिक पाठशाला इंटर कॉलेज, साहबदीन सीताराम इंटर कॉलेज, मनोहर लाल इंटर कॉलेज, आर्य कन्या इंटर कॉलेज, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, शिव सावित्री महाविद्यालय, कैनोसा इंटर कॉलेज, ग्रामर इंटरनेशनल स्कूल, एमआर जयपुरिया स्कूल, बीएस गर्ल्स डिग्री कॉलेज और भगवान आशा बख्श सिंह महाविद्यालय सहित विभिन्न शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थी इसमें भागीदारी करेंगे। वालंटियर घाटों पर दीप बिछाने से लेकर उन्हें प्रज्ज्वलित करने तक की जिम्मेदारी संभालेंगे। इसके लिए विद्यार्थियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। घाटवार जिम्मेदारियां तय की जाएंगी, जिससे दीप सज्जा का काम व्यवस्थित ढंग से पूरा हो सके। क्यूआर कोड वाले पहचान पत्र से होगी वालंटियर की पहचान लाखों दीप प्रज्ज्वलित कर विश्व कीर्तिमान बनाने की तैयारी के बीच स्वयंसेवकों का ऑनलाइन पंजीकरण अंतिम चरण में है। पंजीकरण पूरा होने के बाद वालंटियर को घाटवार जिम्मेदारियां और पहचान पत्र सौंपे जाएंगे।क्यूआर कोड युक्त पहचान पत्रों पर नाम, फोटो, मोबाइल नंबर, तैनाती स्थल और क्रमांक अंकित रहेगा। इन पर जिला प्रशासन के प्राधिकृत अधिकारी, दीपोत्सव नोडल अधिकारी और संबंधित संस्था के अधिकृत प्रतिनिधियों के हस्ताक्षर भी होंगे। इससे स्वयंसेवकों की पहचान का सत्यापन आसान होगा और डुप्लीकेसी रोकने में मदद मिलेगी। अवध विश्वविद्यालय और जिला प्रशासन दीपों की उपलब्धता, घाटों की व्यवस्था, स्वयंसेवकों की तैनाती और सुरक्षा सहित सभी पहलुओं पर मिलकर काम कर रहे हैं। दसवें दीपोत्सव में 30 लाख दीपों से सरयू तट को रोशन करने के लक्ष्य के साथ तैयारियों को आगे बढ़ाया जा रहा है।
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