नैनी जेल में अतीक अहमद का बेटा अली अहमद शिफ्ट हुआ ‘फांसी घर’
दि राइजिंग न्यूज। प्रयागराज। 20 जून, 2025 । माफिया अतीक अहमद के बेटे और उमेश पाल हत्याकांड के आरोपी अली अहमद को प्रयागराज की नैनी सेंट्रल जेल के ‘फांसी घर’ वाली हाई सिक्योरिटी बैरक में शिफ्ट कर दिया गया है। यह कदम उस वक्त उठाया गया जब जेल प्रशासन को उसकी बैरक से नकद रकम बरामद हुई। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर जेल की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे हैं।
दि राइजिंग न्यूज। प्रयागराज। 20 जून, 2025 ।
माफिया अतीक अहमद के बेटे और उमेश पाल हत्याकांड के आरोपी अली अहमद को प्रयागराज की नैनी सेंट्रल जेल के ‘फांसी घर’ वाली हाई सिक्योरिटी बैरक में शिफ्ट कर दिया गया है। यह कदम उस वक्त उठाया गया जब जेल प्रशासन को उसकी बैरक से नकद रकम बरामद हुई। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर जेल की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे हैं।
कैश मिलने के बाद मचा हड़कंप
हाल ही में जेल का औचक निरीक्षण करने पहुंचे डीआईजी जेल राजेश श्रीवास्तव को बड़ी चूक का पता चला। जब अली अहमद की बैरक की तलाशी ली गई, तो वहां से ₹1100 नगद बरामद हुए। यह घटना नैनी जैसी हाई सिक्योरिटी जेल की गंभीर लापरवाही को दर्शाती है।
दो अधिकारी सस्पेंड, जांच के आदेश
इस खुलासे के बाद जेल प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई करते हुए डिप्टी जेलर कांति देवी और वार्डर संजय द्विवेदी को तत्काल निलंबित कर दिया है। इनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। सवाल यह उठ रहा है कि एक कैदी के पास नकद कैसे पहुंचा, जबकि बाहरी मुलाकातें बंद हैं?
'फांसी घर' में क्यों रखा गया अली अहमद?
नैनी जेल का 'फांसी घर' बैरक, जो अब हाई सिक्योरिटी सेल के रूप में उपयोग में लाया जाता है, आम कैदियों से अलग और अत्यंत संरक्षित क्षेत्र है। यहां:
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24x7 सीसीटीवी निगरानी है,
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तैनात रहते हैं 4 सुरक्षाकर्मी और विशेष नंबरदार,
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कोई भी आवाजाही पूरी तरह नियंत्रित होती है,
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पहले यह बैरक फांसी से एक दिन पहले दोषियों के लिए प्रयोग होती थी,
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अब इसे अति संवेदनशील बंदियों के लिए रखा गया है।
यही कारण है कि अब अली अहमद को यहीं शिफ्ट कर दिया गया है।
अली अहमद की स्थिति और केस का अपडेट
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अली अहमद 30 जुलाई 2022 से नैनी जेल में बंद है।
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वह उमेश पाल हत्याकांड में नामजद आरोपी है।
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उसके सभी बाहरी मुलाकातें बंद कर दी गई हैं।
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अब केवल वकील से ही जेल में संपर्क कर सकता है।
कैदियों की निगरानी पर सवाल
नैनी जेल को यूपी की सुरक्षिततम जेलों में गिना जाता है, लेकिन कैश की बरामदगी ने जेल की व्यवस्था की पोल खोल दी है। यह भी आशंका जताई जा रही है कि जेल स्टाफ के कुछ सदस्य सहयोग कर रहे थे, तभी कैश जैसी वस्तुएं भीतर पहुंच सकीं।
निष्कर्ष
कैश मिलने के बाद अली अहमद को ‘फांसी घर’ शिफ्ट करना जेल प्रशासन का सख्त कदम जरूर है, लेकिन इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि सिर्फ बैरक बदलने से नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम को कसने की जरूरत है। जेल में बंद हाई प्रोफाइल अपराधियों की गतिविधियों पर निगरानी अब और बढ़ाई जानी चाहिए।