रील, रफ्तार और राजनीति: यूपी बीजेपी में क्यों बढ़ी हलचल?
दि राइजिंग न्यूज। लखनऊ। 21 जुलाई 2025 । नई दिल्ली से लखनऊ तक सियासी गर्मी बढ़ती जा रही है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों जबरदस्त हलचल है। सीएम योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक की दिल्ली यात्राएं चर्चा का केंद्र बन गई हैं। पहले मौर्य और पाठक ने पार्टी हाईकमान से मुलाकात की, फिर खुद सीएम योगी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जेपी नड्डा और अमित शाह से एक-एक कर मिले। इन मुलाकातों ने प्रदेश बीजेपी के अंदर किसी बड़े बदलाव की आहट को और तेज कर दिया है।
दि राइजिंग न्यूज। लखनऊ। 21 जुलाई 2025 ।
नई दिल्ली से लखनऊ तक सियासी गर्मी बढ़ती जा रही है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों जबरदस्त हलचल है। सीएम योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक की दिल्ली यात्राएं चर्चा का केंद्र बन गई हैं। पहले मौर्य और पाठक ने पार्टी हाईकमान से मुलाकात की, फिर खुद सीएम योगी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जेपी नड्डा और अमित शाह से एक-एक कर मिले। इन मुलाकातों ने प्रदेश बीजेपी के अंदर किसी बड़े बदलाव की आहट को और तेज कर दिया है।
बड़ी वजह: क्यों सुलग रही है यूपी बीजेपी की सियासत?
2024 लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश ने बीजेपी के लिए खतरे की घंटी बजा दी थी। 2019 की तुलना में पार्टी की 34 सीटें कम हो गईं और वोट शेयर में भी भारी गिरावट आई। सपा का ‘पीडीए’ फार्मूला काम कर गया और बीजेपी का जातीय समीकरण बिखर गया। ऐसे में हाईकमान अब पार्टी की सोशल इंजीनियरिंग को दोबारा मजबूत करना चाहता है।
‘प्रदेश अध्यक्ष’ बना सियासत की धुरी
भूपेंद्र चौधरी का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, लेकिन नया अध्यक्ष अब तक नहीं चुना गया। यही वजह है कि तीनों बड़े नेताओं के दिल्ली दौरों को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। सीएम योगी ने नए अध्यक्ष के लिए अपनी पसंद-नापसंद साफ कर दी है। अब पार्टी ये देख रही है कि जो भी नया अध्यक्ष बने, वो योगी के साथ तालमेल भी बिठा सके और केशव-पाठक को भी भरोसे में रखे।
सूत्रों की मानें तो पहले बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव होगा, उसके बाद यूपी का नया कप्तान तय किया जाएगा।
जाति और क्षेत्र का संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती
सीएम योगी पूर्वांचल से आते हैं, इसलिए संगठन में पश्चिमी या अवध क्षेत्र से अध्यक्ष बनाए जाने की संभावना है। इसके साथ-साथ जातीय समीकरण भी अहम हैं — मौर्य, कुर्मी, सैनी, मल्लाह जैसी ओबीसी जातियों में बीजेपी की पकड़ कमजोर हुई है। इसीलिए ओबीसी चेहरा पार्टी अध्यक्ष बनाया जा सकता है।
क्या होने जा रहा है बड़ा कैबिनेट फेरबदल?
सिर्फ संगठन ही नहीं, सरकार में भी बदलाव की चर्चा गर्म है। योगी कैबिनेट के कुछ मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है, और नए चेहरों को जगह मिल सकती है। इससे सत्ता और संगठन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश होगी। सीएम योगी ने पीएम मोदी के सामने प्रदेश के नाराज़ नेताओं की रिपोर्ट भी रखी है।
‘ऑल इज वेल’ का सियासी मैसेज
दिल्ली में अलग-अलग मुलाकातों के बाद तीनों बड़े नेता—योगी, केशव और पाठक—एक मंच पर नजर आए। इसका सीधा संदेश है कि पार्टी अंदरूनी खींचतान को सुलझाकर एकजुट दिखना चाहती है। अमित शाह और योगी के बीच भी हाल के दिनों में बेहतर तालमेल दिखा है।
2027 का मिशन: हैट्रिक की तैयारी
बीजेपी यूपी को गुजरात की तरह मजबूत गढ़ बनाना चाहती है। 2017 और 2022 की जीत के बाद अब 2027 की बारी है। लेकिन 2024 के नतीजे बता रहे हैं कि राह इतनी आसान नहीं है। यही वजह है कि संगठन और सरकार दोनों स्तर पर नए सिरे से रणनीति बनाई जा रही है — ताकि 2027 में सत्ता की हैट्रिक लगाई जा सके।