राम मंदिर चढ़ावा कांड में सबसे बड़ा खुलासा!
अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में विशेष जांच दल को बड़ी सफलता मिली है। जांच के दौरान आरोपियों की निशानदेही पर फर्जी रसीद पुस्तिका बरामद हुई है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने कथित रूप से इन रसीदों के माध्यम से श्रद्धालुओं से चंदा वसूलने की बात स्वीकार की है। मामले की जांच जारी है और सभी तथ्यों की पुष्टि आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
दि राइजिंग न्यूज़ | अयोध्या | 8 जुलाई 2026
अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले की जांच के दौरान विशेष जांच दल को बड़ी सफलता मिली है। आरोपियों की निशानदेही पर फर्जी रसीद पुस्तिका बरामद की गई है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने कथित रूप से श्रद्धालुओं से फर्जी रसीद के माध्यम से चंदा वसूलने की बात स्वीकार की है। जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क, धन के लेन-देन और अन्य संभावित संलिप्त लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बड़ा खुलासा, फर्जी रसीद पुस्तिका बनी जांच की अहम कड़ी
अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। विशेष जांच दल की कार्रवाई के दौरान आरोपियों की निशानदेही पर एक फर्जी रसीद पुस्तिका बरामद की गई है, जिसे जांच में अत्यंत महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने कथित रूप से स्वीकार किया है कि इन रसीदों का उपयोग श्रद्धालुओं से चंदा लेने के लिए किया जाता था। हालांकि इन बयानों की पुष्टि अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही संभव होगी।जांच अधिकारियों का कहना है कि बरामद दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और वित्तीय लेन-देन का भी मिलान किया जा रहा है। यदि जांच में यह साबित होता है कि लंबे समय तक इस प्रकार का फर्जीवाड़ा चलता रहा, तो कई अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। फिलहाल जांच कई स्तरों पर जारी है और हर तथ्य को प्रमाणों के आधार पर परखा जा रहा है।
असली जैसी दिखाई देती थीं फर्जी रसीदें, श्रद्धालुओं को नहीं होता था संदेह
सूत्रों के अनुसार बरामद फर्जी रसीद पुस्तिका देखने में पूरी तरह वास्तविक रसीद जैसी प्रतीत होती थी। इन रसीदों पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र का प्रतीक चिन्ह और उसी प्रकार की छपाई कराई गई थी, जिससे पहली नजर में किसी भी श्रद्धालु को यह असली रसीद ही लगती थी। यही कारण था कि दान देने वाले लोगों को किसी प्रकार की आशंका नहीं होती थी।जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इन रसीदों की छपाई कहां कराई गई, कितनी संख्या में इन्हें तैयार कराया गया और इन्हें किस-किस स्थान पर उपयोग किया गया। यदि इस संबंध में और साक्ष्य मिलते हैं तो जांच का दायरा और भी व्यापक हो सकता है।
पूछताछ में चंदा वसूली की बात स्वीकार करने का दावा
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों ने प्रारंभिक पूछताछ में बताया है कि जब कोई श्रद्धालु मंदिर में दान देने की इच्छा व्यक्त करता था, तब उसे यही फर्जी रसीद देकर धन लिया जाता था। इससे श्रद्धालु यह मान लेते थे कि उनका चढ़ावा अधिकृत रूप से स्वीकार कर लिया गया है।विशेष जांच दल अब यह भी पता लगाने का प्रयास कर रहा है कि इस तरीके से कितनी धनराशि एकत्र की गई और उसका उपयोग कहां किया गया। अधिकारियों का कहना है कि बैंक खातों, मोबाइल अभिलेखों तथा अन्य आर्थिक दस्तावेजों की भी बारीकी से जांच की जा रही है ताकि पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर सामने लाई जा सके।
ऑनलाइन दान व्यवस्था लागू होने के बाद बंद हुआ कथित फर्जीवाड़ा
जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया है कि पहले मंदिर परिसर में कागजी रसीदों के माध्यम से दान स्वीकार किया जाता था। बाद में जब दान की व्यवस्था को पूरी तरह संगणकीय प्रणाली से जोड़ दिया गया और रसीदें भी संगणकीय माध्यम से जारी होने लगीं, तब कथित रूप से फर्जी रसीदों का उपयोग समाप्त हो गया।अब श्रद्धालु सीधे अधिकृत बैंक खाते में धनराशि जमा कर सकते हैं अथवा मंदिर के अधिकृत दान केंद्र से संगणकीय रसीद प्राप्त करते हैं। इस व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ी है और दान प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित मानी जा रही है। जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि नई व्यवस्था लागू होने से पहले कितने समय तक पुरानी प्रणाली का कथित दुरुपयोग किया गया।
फर्जी रसीदों की छपाई और पूरे नेटवर्क की जांच जारी
विशेष जांच दल केवल बरामद रसीद पुस्तिका तक ही सीमित नहीं है। जांच अधिकारी यह भी पता लगा रहे हैं कि फर्जी रसीदें तैयार करने के पीछे कौन लोग शामिल थे और इस पूरे नेटवर्क का संचालन किस स्तर से किया जा रहा था। यदि जांच में किसी मुद्रण प्रतिष्ठान अथवा अन्य व्यक्तियों की भूमिका सामने आती है तो उनके विरुद्ध भी वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।जांच एजेंसियां मोबाइल अभिलेख, आपसी संपर्क, आर्थिक लेन-देन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का भी विश्लेषण कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
अरविंद केजरीवाल ने जांच की निष्पक्षता पर उठाए सवाल
इस मामले को लेकर आम आदमी दल के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि वास्तविक दोषियों तक पहुंचने के बजाय मामले को भटकाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कराई जाए ताकि देश के सामने वास्तविक तथ्य आ सकें।हालांकि राज्य सरकार और जांच एजेंसियों की ओर से यह कहा गया है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष ढंग से की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी उपलब्ध साक्ष्यों की वैज्ञानिक तरीके से जांच की जा रही है।
राज्य सरकार ने दिया सख्त कार्रवाई का भरोसा
उत्तर प्रदेश सरकार की मंत्री गुलाब देवी ने कहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल पूरी गंभीरता और निष्पक्षता के साथ कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े इस महत्वपूर्ण मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली व्यक्ति क्यों न हो।सरकार का कहना है कि श्रद्धालुओं की आस्था के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि जांच में किसी व्यक्ति की संलिप्तता सिद्ध होती है तो उसके विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने के बाद आवश्यकतानुसार आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
जांच अभी जारी, अंतिम निष्कर्ष आना बाकी
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में फर्जी रसीद पुस्तिका की बरामदगी को जांच की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। हालांकि जांच एजेंसियों का कहना है कि अभी कई पहलुओं की जांच बाकी है और सभी तथ्यों की पुष्टि साक्ष्यों के आधार पर ही की जाएगी। आरोपियों के कथित बयान, बरामद दस्तावेज और अन्य प्रमाण न्यायिक प्रक्रिया में भी परखे जाएंगे।इस पूरे मामले पर देशभर की नजर बनी हुई है। श्रद्धालु और आम नागरिक भी जांच के अंतिम निष्कर्ष का इंतजार कर रहे हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पूरे घटनाक्रम में कौन-कौन लोग शामिल थे और चढ़ावे की राशि के साथ वास्तव में क्या हुआ।