अफगानिस्तान में भूकंप के झटके: तीन दिन में दूसरी बार कांपी काबुल की धरती, 4.6 तीव्रता दर्ज
अफगानिस्तान में 4.6 तीव्रता का भूकंप आने से काबुल और आसपास के इलाकों में हल्का कंपन महसूस किया गया। तीन दिनों के भीतर दूसरी बार आए भूकंप के कारण लोगों में दहशत और चिंता का माहौल बन गया है। विशेषज्ञों ने क्षेत्र को भूकंपीय रूप से अत्यधिक संवेदनशील बताते हुए सतर्क रहने की सलाह दी है।
दि राइजिंग न्यूज डेस्क | 15 अप्रैल 2026 ।
अफगानिस्तान में एक बार फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। बुधवार को आए इस भूकंप की तीव्रता 4.6 मापी गई है, जिससे काबुल और आसपास के इलाकों में हल्का कंपन महसूस किया गया।
यह तीन दिनों के भीतर दूसरी बार है जब अफगानिस्तान की धरती भूकंप से कांपी है।
भूकंप की तीव्रता और केंद्र
भूकंप की तीव्रता 4.6 दर्ज की गई और इसका केंद्र लगभग 140 किलोमीटर की गहराई में था। इससे पहले 12 अप्रैल को भी इसी तीव्रता का भूकंप आया था, जिसका केंद्र करीब 150 किलोमीटर गहराई में था।
लगातार भूकंप से बढ़ी चिंता
पिछले कुछ दिनों से लगातार आ रहे भूकंप के झटकों ने स्थानीय लोगों में डर और असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह क्षेत्र पहले से ही भूकंपीय रूप से संवेदनशील है, इसलिए यहां लगातार निगरानी और सतर्कता जरूरी है।
मानवीय सहायता और भारत की मदद
भूकंप और अन्य प्राकृतिक आपदाओं को देखते हुए भारत सरकार ने अफगानिस्तान को मानवीय सहायता भी भेजी है। विदेश मंत्रालय के अनुसार राहत सामग्री में किचन सेट, हाइजीन किट, तिरपाल, स्लीपिंग बैग और अन्य जरूरी वस्तुएं शामिल थीं।
भारत ने इस कठिन समय में अफगानिस्तान के लोगों के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए हर संभव सहायता जारी रखने की बात कही है।
भूकंप से नुकसान का आंकड़ा
अफगानिस्तान में आए भूकंप और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के कारण जनहानि और नुकसान की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार देश के 25 प्रांतों में प्राकृतिक आपदाओं से अब तक 35 लोगों की मौत हो चुकी है।
इसके अलावा पिछले दो दिनों में 52 लोग घायल हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। कई इलाकों में राहत और बचाव कार्य जारी है, लेकिन दूर-दराज और पहाड़ी क्षेत्रों में पहुंचने में प्रशासन को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
हालांकि भूकंप से हुए कुल नुकसान का पूरा आकलन अभी जारी है। अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे राहत टीमें प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचेंगी, नुकसान के वास्तविक आंकड़े और स्पष्ट हो पाएंगे।
अफगानिस्तान में बार-बार भूकंप क्यों आते हैं
विशेषज्ञों के अनुसार अफगानिस्तान भूकंपीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र है क्योंकि:
- यहां भारतीय और यूरेशियाई टेक्टोनिक प्लेटों का टकराव होता है
- हिंदू कुश क्षेत्र एक सक्रिय भूकंपीय जोन है
- कई बड़ी फॉल्ट लाइनें इस क्षेत्र से गुजरती हैं
इसी वजह से यहां अक्सर भूकंप और अन्य प्राकृतिक आपदाएं आती रहती हैं।
अफगानिस्तान को भूकंपीय रूप से अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार इसका मुख्य कारण यहां की भौगोलिक और टेक्टोनिक संरचना है, जो लगातार भूगर्भीय हलचल को जन्म देती है।
इस क्षेत्र में भारतीय टेक्टोनिक प्लेट और यूरेशियाई टेक्टोनिक प्लेट का टकराव होता रहता है, जिससे धरती की सतह पर दबाव बनता है और समय-समय पर भूकंप जैसी स्थितियां उत्पन्न होती हैं। इसके अलावा हिंदू कुश पर्वतीय क्षेत्र एक सक्रिय भूकंपीय जोन माना जाता है, जहां लगातार हलचल दर्ज की जाती है।
वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि इस क्षेत्र से कई महत्वपूर्ण फॉल्ट लाइनें गुजरती हैं, जो भूकंप की संभावनाओं को और अधिक बढ़ा देती हैं। इसी कारण यहां अक्सर भूकंप, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाएं देखने को मिलती रहती हैं, जिससे यह इलाका आपदा के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील बन जाता है।
निष्कर्ष
अफगानिस्तान में लगातार आ रहे भूकंप के झटकों ने स्थानीय लोगों के बीच चिंता और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है। पिछले कुछ दिनों में बार-बार धरती के कांपने से लोगों में डर बढ़ गया है और वे सुरक्षित स्थानों की तलाश में हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील है, क्योंकि यहां टेक्टोनिक प्लेटों की सक्रिय हलचल लगातार बनी रहती है। इसी वजह से यहां समय-समय पर भूकंप आते रहते हैं, जिनमें कभी-कभी बड़े झटके भी महसूस किए जाते हैं।
वैज्ञानिकों और आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों ने लोगों को आने वाले दिनों में और अधिक सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि कमजोर संरचनाओं वाले भवनों से दूर रहें और किसी भी आपात स्थिति में सुरक्षित स्थानों पर जाने की तैयारी रखें। साथ ही प्रशासन को भी अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी संभावित आपदा से निपटा जा सके।
लगातार भूकंप के झटकों ने अफगानिस्तान में चिंता का माहौल बना दिया है। विशेषज्ञों ने आने वाले दिनों में और सतर्क रहने की सलाह दी है क्योंकि यह क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है।