हुक्का बार पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि हुक्का बार चलाना मौलिक अधिकार नहीं है। अदालत ने राज्य सरकार को जनहित और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए हुक्का बारों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का अधिकार सही ठहराया है।
दि राइजिंग न्यूज़। लखनऊ। 29 मई 2026
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने हुक्का बार को लेकर बड़ा और सख्त फैसला सुनाते हुए साफ कहा है कि हुक्का बार चलाना किसी भी व्यक्ति का मौलिक अधिकार नहीं है। अदालत ने यह भी माना कि राज्य सरकार जनहित और सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए पूरे प्रदेश में हुक्का बार पर पूर्ण प्रतिबंध लगा सकती है। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद उत्तर प्रदेश में चल रहे हुक्का बार कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। अदालत ने साफ संकेत दिए हैं कि लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वाले कारोबार को कानूनी संरक्षण नहीं दिया जा सकता।
कोर्ट ने खारिज की हुक्का बार मालिकों की दलील
यह फैसला जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की बेंच ने सुनाया। कोर्ट ने उन सभी दलीलों को खारिज कर दिया जिसमें हुक्का बार संचालकों ने कहा था कि हुक्का बार चलाना व्यापार और व्यवसाय करने के मौलिक अधिकार के दायरे में आता है। दरअसल कई हुक्का बार ऑपरेटरों ने प्रशासन द्वारा उनके प्रतिष्ठानों पर की गई कार्रवाई के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। संचालकों ने आरोप लगाया था कि प्रशासन अवैध तरीके से उनके हुक्का बार बंद करा रहा है और नए लाइसेंस जारी नहीं कर रहा। लेकिन अदालत ने साफ कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी गतिविधियों में सरकार को नियम बनाने और प्रतिबंध लगाने का पूरा अधिकार है।
कोविड काल का भी दिया हवाला
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अपने पुराने आदेशों का भी जिक्र किया। अदालत ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान संक्रमण फैलने के खतरे को देखते हुए पूरे राज्य में हुक्का बार संचालन पर रोक लगाई गई थी। कोर्ट ने माना कि हुक्का बार जैसी जगहों पर एक ही पाइप और उपकरण कई लोग इस्तेमाल करते हैं, जिससे गंभीर स्वास्थ्य खतरे पैदा हो सकते हैं।
तंबाकू और निकोटीन को बताया बड़ा खतरा
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि हुक्का बार में तंबाकू और निकोटीन का सेवन लोगों की सेहत के लिए बेहद खतरनाक है। इसलिए सरकार को ऐसे कारोबार पर नियंत्रण और प्रतिबंध लगाने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। कोर्ट ने शराब और जुए जैसे कारोबारों का उदाहरण देते हुए कहा कि हर व्यापार को मौलिक अधिकार का संरक्षण नहीं दिया जा सकता।
सरकार को मिली बड़ी कानूनी ताकत
इस फैसले के बाद अब उत्तर प्रदेश सरकार को हुक्का बारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने में बड़ी कानूनी मजबूती मिल गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कई जिलों में अवैध हुक्का बारों पर बड़ी कार्रवाई हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी लंबे समय से हुक्का बारों पर प्रतिबंध की मांग करते रहे हैं। उनका कहना है कि युवाओं में तेजी से बढ़ती हुक्का लत भविष्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह फैसला सिर्फ कानूनी आदेश नहीं बल्कि युवाओं की सेहत को बचाने की बड़ी चेतावनी भी है। पिछले कुछ वर्षों में हुक्का बार तेजी से युवाओं के बीच फैशन बन चुके थे और कई जगह नियमों की खुली धज्जियां उड़ाई जा रही थीं। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस फैसले के बाद सच में अवैध हुक्का बारों पर सख्ती दिखाएगा या फिर कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएगी।