अंटार्कटिका में रिकॉर्ड कम हुई बर्फ, वैज्ञानिकों की चेतावनी!
अंटार्कटिका में इस साल सर्दियों के दौरान समुद्री बर्फ का अधिकतम विस्तार रिकॉर्ड के तीसरे सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। 14 सितंबर 2026 को बर्फ का क्षेत्रफल करीब 1.759 करोड़ वर्ग किलोमीटर दर्ज हुआ। वैज्ञानिकों के अनुसार लगातार कम होता बर्फ का स्तर जलवायु परिवर्तन और बढ़ते वैश्विक तापमान से जुड़े बदलावों का संकेत हो सकता है। इससे अंटार्कटिका के समुद्री जीवों और पर्यावरण पर असर पड़ने की चिंता बढ़ गई है।
दि राइजिंग न्यूज़ | अंटार्कटिका | 30 सितंबर 2026
अंटार्कटिका में इस साल सर्दियों के दौरान समुद्री बर्फ का अधिकतम विस्तार रिकॉर्ड में तीसरे सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। राष्ट्रीय हिम एवं हिम डेटा केंद्र के अनुसार 14 सितंबर 2026 को समुद्री बर्फ का विस्तार लगभग 1.759 करोड़ वर्ग किलोमीटर दर्ज किया गया। वैज्ञानिकों के मुताबिक, लगातार कम बर्फ का स्तर अंटार्कटिका के बदलते जलवायु तंत्र का संकेत हो सकता है।
अंटार्कटिका में बर्फ ने बढ़ाई वैज्ञानिकों की चिंता
अंटार्कटिका में सर्दियों के दौरान समुद्री बर्फ का विस्तार सामान्य तौर पर काफी बढ़ जाता है, लेकिन इस साल इसका अधिकतम स्तर सामान्य से काफी कम रहा।14 सितंबर को समुद्री बर्फ का क्षेत्रफल करीब 1.759 करोड़ वर्ग किलोमीटर दर्ज किया गया, जो उपग्रह रिकॉर्ड में तीसरा सबसे कम अधिकतम स्तर है।1979 से शुरू हुए उपग्रह रिकॉर्ड में हाल के वर्षों में अंटार्कटिका की समुद्री बर्फ लगातार कम स्तर पर देखी गई है।वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बदलाव को केवल एक साल की घटना मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
लगातार चौथी सर्दी में कम रहा बर्फ का स्तर
वैज्ञानिकों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि कम समुद्री बर्फ का यह सिलसिला लगातार कई वर्षों से दिखाई दे रहा है।राष्ट्रीय हिम एवं हिम डेटा केंद्र के अनुसार पिछले कई वर्षों में अंटार्कटिका की समुद्री बर्फ का विस्तार लंबे समय के औसत से नीचे रहा है।इस साल भी बर्फ का विस्तार बढ़ने के मौसम में अधिकांश समय रिकॉर्ड के निचले स्तरों के आसपास बना रहा।विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति अंटार्कटिका के समुद्री और जलवायु तंत्र में बदलाव की ओर संकेत कर सकती है।
क्या समुद्री बर्फ पिघलने से समुद्र का स्तर बढ़ेगा
समुद्र में पहले से तैर रही समुद्री बर्फ के पिघलने से समुद्र का स्तर सीधे उसी तरह नहीं बढ़ता, क्योंकि वह पानी पहले से समुद्र में मौजूद होता है।लेकिन अंटार्कटिका की जमीन पर मौजूद विशाल बर्फ की चादर अलग मामला है, क्योंकि उसके पिघलने या समुद्र में तेजी से पहुंचने से वैश्विक समुद्र स्तर बढ़ सकता है।वैज्ञानिक इसीलिए समुद्री बर्फ में हो रहे बदलावों को ध्यान से देख रहे हैं, क्योंकि इसका संबंध समुद्री पारिस्थितिकी और बर्फ की चादरों के आसपास की परिस्थितियों से भी है।कम समुद्री बर्फ का असर समुद्री जीवों और पूरे दक्षिणी महासागर के पर्यावरण पर पड़ सकता है।
अंटार्कटिका में हर साल बदलता है बर्फ का विस्तार
अंटार्कटिका की समुद्री बर्फ में मौसम के अनुसार बहुत बड़ा उतार-चढ़ाव होता है।
दक्षिणी गोलार्ध की गर्मियों में बर्फ काफी कम हो जाती है, जबकि सर्दियों में समुद्री सतह पर बर्फ का विस्तार तेजी से बढ़ता है।आमतौर पर इसका अधिकतम स्तर सितंबर के आसपास पहुंचता है, हालांकि अलग-अलग वर्षों में अधिकतम स्तर की तारीख बदल सकती है।इसी वजह से वैज्ञानिक अधिकतम स्तर की अंतिम पुष्टि करने से पहले कुछ समय तक आंकड़ों की निगरानी करते हैं।
इस साल अधिकतम स्तर कब दर्ज हुआ
राष्ट्रीय हिम एवं हिम डेटा केंद्र के अनुसार 14 सितंबर 2026 को अंटार्कटिका की समुद्री बर्फ का विस्तार करीब 1.759 करोड़ वर्ग किलोमीटर रहा।संस्थान ने इसे अभी प्रारंभिक आंकड़ा माना है, क्योंकि अधिकतम स्तर के आसपास बर्फ के क्षेत्र में प्राकृतिक उतार-चढ़ाव काफी अधिक होता है।बदलती हवाओं और मौसम की परिस्थितियों के कारण अंतिम आंकड़ों में थोड़ा बदलाव संभव है।फिर भी उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर यह 1979 से अब तक का तीसरा सबसे कम वार्षिक अधिकतम स्तर माना जा रहा है।
वैज्ञानिकों ने जलवायु परिवर्तन से जोड़ा मामला
वैज्ञानिकों के अनुसार अंटार्कटिका की समुद्री बर्फ में लंबे समय से देखे जा रहे बदलावों के पीछे कई प्राकृतिक और जलवायु संबंधी कारण हो सकते हैं।हाल के वर्षों में वैश्विक तापमान में वृद्धि और समुद्री तथा वायुमंडलीय परिस्थितियों में बदलाव को लेकर लगातार अध्ययन किए जा रहे हैं।कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार कम बर्फ के स्तर को जलवायु परिवर्तन के व्यापक संदर्भ में देखा जाना चाहिए।हालांकि किसी एक वर्ष में बर्फ कम होने के पीछे केवल एक कारण तय करना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं होगा।
समुद्री जीवों पर भी पड़ सकता है असर
अंटार्कटिका की समुद्री बर्फ केवल जमी हुई पानी की सतह नहीं है, बल्कि यह वहां के समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है।समुद्री बर्फ में बदलाव से उसके आसपास रहने वाले छोटे जीवों से लेकर बड़े समुद्री जीवों तक पर प्रभाव पड़ सकता है।विशेषज्ञ विशेष रूप से उन प्रजातियों को लेकर चिंतित हैं जिनका जीवन समुद्री बर्फ और उससे जुड़े खाद्य तंत्र पर निर्भर करता है।यदि कम बर्फ का सिलसिला लंबे समय तक जारी रहता है, तो इसके व्यापक पर्यावरणीय प्रभावों का अध्ययन करना जरूरी होगा।
आगे वैज्ञानिकों की नजर किस पर रहेगी
वैज्ञानिक अब यह देखेंगे कि आने वाले महीनों में अंटार्कटिका की समुद्री बर्फ किस तरह बदलती है।राष्ट्रीय हिम एवं हिम डेटा केंद्र ने कहा है कि अक्टूबर की शुरुआत में इस मौसम का विस्तृत विश्लेषण जारी किया जाएगा।उस विश्लेषण में बर्फ की स्थिति, संभावित कारणों और लंबे समय के आंकड़ों के साथ तुलना की जाएगी।इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि इस साल की स्थिति सामान्य उतार-चढ़ाव का हिस्सा है या लंबे समय से चल रहे बदलाव का संकेत।
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